Thursday, June 11, 2026
Home Blog Page 208

भव सगरा पोखरा: पांडवों की तपोभूमि से जुड़ी लोकआस्थाएं

महाभारत काल से जुड़ा भव सगरा पोखरा: आस्था, इतिहास और संस्कृति का जीवंत संगम

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।उत्तर प्रदेश के जनपद महराजगंज में परतावल क्षेत्र के समीप स्थित भव सगरा पोखरा केवल एक प्राचीन जलस्रोत नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, धार्मिक आस्था और पौराणिक इतिहास का अमूल्य प्रतीक माना जाता है। यह स्थल लोकमान्यताओं के अनुसार महाभारत काल से जुड़ा हुआ है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता और अधिक बढ़ जाती है। आज भी यह पोखरा ग्रामीण जनमानस में श्रद्धा, विश्वास और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बना हुआ है।
महाभारत काल से जुड़ी लोककथाएं
स्थानीय जनश्रुतियों और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही कथाओं के अनुसार, अज्ञातवास के समय पांडवों ने भव सगरा पोखरा के समीप कुछ समय व्यतीत किया था। बताया जाता है कि पांडवों ने अपने दैनिक स्नान, जल उपयोग, यज्ञ-अनुष्ठान और साधना के लिए इसी पोखरे के पवित्र जल का उपयोग किया। आसपास के वन क्षेत्र को तपोभूमि माना जाता है, जहां ऋषि-मुनियों और साधकों का आवागमन रहा।

ये भी पढ़ें – हनुमान जी का पम्पापुर आगमन: जन्म से लेकर किष्किंधा यात्रा तक की अद्भुत दिव्य कथा

भव सगरा नाम का आध्यात्मिक अर्थ
भव सगरा नाम को लेकर भी कई धार्मिक और दार्शनिक मान्यताएं प्रचलित हैं। ग्रामीणों के अनुसार ‘भव’ का अर्थ संसारिक कष्टों और जन्म-मरण के बंधन से है, जबकि ‘सगरा’ का अर्थ विशाल सागर से है। इस प्रकार भव सगरा पोखरा संसारिक दुखों से मुक्ति और आत्मिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। इसी आस्था के कारण श्रद्धालु यहां स्नान, पूजा और मनोकामना पूर्ति के लिए दूर-दूर से आते हैं।
धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख केंद्र
प्राचीन काल से ही भव सगरा पोखरा धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। अमावस्या, पूर्णिमा, मकर संक्रांति, कार्तिक स्नान और अन्य पावन तिथियों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां एकत्र होकर पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यहां स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

ये भी पढ़ें – राशिफल: इन 4 राशियों की आज खुलेगी किस्मत

ऐतिहासिकता के संकेत और संभावनाएं
हालांकि महाभारत काल से जुड़े ठोस लिखित प्रमाण सीमित हैं, लेकिन लोक परंपराएं, सामाजिक स्मृति, पोखरे की प्राचीन बनावट और आसपास के स्थल इसकी प्राचीनता की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार समय-समय पर साफ-सफाई या सीमित खुदाई के दौरान पुराने अवशेष मिलने की चर्चाएं सामने आती रही हैं। यदि इस स्थल पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुरातात्विक खुदाई और शोध कराया जाए, तो इसके ऐतिहासिक महत्व से जुड़े महत्वपूर्ण प्रमाण सामने आ सकते हैं।

ये भी पढ़ें – मनरेगा, एमएसपी और श्रम कानूनों को लेकर सड़क पर उतरेगा मजदूर-किसान संगठन

सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का केंद्र
वर्तमान समय में भव सगरा पोखरा केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का केंद्र भी बन चुका है। यहां आयोजित धार्मिक अनुष्ठान, सामूहिक पूजा और छोटे मेलों के माध्यम से ग्रामीणों में आपसी भाईचारा और सांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत होता है।
संरक्षण और पर्यटन की आवश्यकता
आज के समय में भव सगरा पोखरा जैसे ऐतिहासिक और आस्थावान स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की अत्यंत आवश्यकता है। यदि प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और जनसहभागिता के माध्यम से इसके संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, तो यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के रूप में विकसित हो सकता है। इससे न केवल स्थानीय पहचान मजबूत होगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

ये भी पढ़ें – हिंदू पंचांग 29 जनवरी 2026: राहुकाल, चौघड़िया और आज का ज्योतिष

आस्था, इतिहास और संस्कृति का संगम
भव सगरा पोखरा अतीत की गौरवशाली परंपराओं का साक्षी है, जो आज भी अपनी पवित्रता और महत्ता को बनाए हुए है। यह स्थल आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और पौराणिक इतिहास से जोड़ने का कार्य करता रहेगा।

Colombia Plane Crash: Satena विमान हादसे में सांसद समेत 15 की मौत

Colombia Plane Crash News:
कोलंबिया और वेनेजुएला की सीमा से सटे नॉर्टे डे सैंटेंडर प्रांत में बुधवार को एक बड़ा विमान हादसा हो गया। Satena एयरलाइन का व्यावसायिक विमान Beechcraft 1900D टेकऑफ के कुछ ही मिनट बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 15 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक मौजूदा सांसद और एक चुनावी उम्मीदवार भी शामिल हैं।

टेकऑफ के बाद टूटा एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क

Satena फ्लाइट 8895 ने कोलंबिया के कुकूटा शहर से उड़ान भरी थी और इसे ओकाना एयरपोर्ट पर लैंड करना था। उड़ान के दौरान अचानक विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क टूट गया। काफी देर तक कोई सिग्नल न मिलने पर प्रशासन ने तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

पहाड़ी इलाके में मिला मलबा

कुछ घंटों की तलाश के बाद विमान का मलबा एक दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्र में मिला, जो वेनेजुएला सीमा के पास स्थित है। अधिकारियों ने पुष्टि की कि विमान में सवार सभी 13 यात्री और 2 क्रू मेंबर्स की मौके पर ही मौत हो गई।

ये भी पढ़ें – भागलपुर में गैस सिलेंडर फटने से मचा हड़कंप, झोपड़ी जलकर राख

सांसद और चुनावी उम्मीदवार की भी मौत

इस हादसे में कोलंबिया की चैंबर ऑफ डेप्युटीज के सदस्य डियोजेनेस क्विंटेरो और आगामी चुनावों में हिस्सा ले रहे विधायी उम्मीदवार कार्लोस साल्सेडो की भी जान चली गई। दोनों अपने राजनीतिक दलों की टीम के साथ यात्रा कर रहे थे। हादसे की खबर मिलते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई।

मौसम और जंगल बने राहत कार्य में बाधा

दुर्घटना स्थल घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बदलते मौसम और खराब भौगोलिक परिस्थितियों ने मलबे तक पहुंचने में समय लगाया।

हादसे की जांच जारी

फिलहाल विमान हादसे के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। कोलंबियाई विमानन एजेंसियां और सुरक्षा अधिकारी मामले की गहन जांच में जुटे हुए हैं।

Read this: https://ce123steelsurvey.blogspot.com/search/label/AE%20exam?m=1

भागलपुर में गैस सिलेंडर फटने से मचा हड़कंप, झोपड़ी जलकर राख

🔥 भागलपुर में सिलेंडर ब्लास्ट: चाय बनाते समय झोपड़ी में लगी आग, बाल-बाल बचे परिजन


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)भागलपुर सिलेंडर ब्लास्ट की एक बड़ी घटना बुधवार को सामने आई, जब देवरिया जनपद के मईल थाना क्षेत्र अंतर्गत भागलपुर पुलिस चौकी से महज 500 मीटर की दूरी पर एक झोपड़ी में गैस सिलेंडर फट गया। इस हादसे में झोपड़ी पूरी तरह जलकर खाक हो गई, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
चाय बनाते समय हुआ हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, भागलपुर के दक्षिण टोला स्थित चौरसिया ढाबा के समीप दूधनाथ यादव अपने घोठा (झोपड़ी) में चाय बना रहे थे। इसी दौरान अचानक गैस सिलेंडर की पाइप में आग लग गई। कुछ ही पलों में आग ने झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें देखकर घर में मौजूद लोग घबरा गए और जान बचाकर बाहर निकल आए।
जोरदार धमाके से दहला इलाका
आग की तीव्रता बढ़ने के कारण झोपड़ी में रखा छोटा घरेलू गैस सिलेंडर अचानक तेज धमाके के साथ फट गया। भागलपुर सिलेंडर ब्लास्ट की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग सहम गए और इलाके में अफरातफरी मच गई। झोपड़ी कच्ची होने के कारण आग ने तेजी से फैलकर घर में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन और दैनिक उपयोग का सारा सामान जला दिया।
ग्रामीणों ने किया आग बुझाने का प्रयास
धमाके की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अपने स्तर से आग बुझाने का प्रयास किया। हालांकि तब तक झोपड़ी पूरी तरह जल चुकी थी। समय रहते लोग बाहर निकल गए, नहीं तो यह भागलपुर सिलेंडर ब्लास्ट एक बड़ी जनहानि का कारण बन सकता था।
पुलिस चौकी की नजदीकी पर उठे सवाल
घटना को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा रही कि यह गंभीर हादसा भागलपुर पुलिस चौकी से मात्र 500 मीटर की दूरी पर हुआ। लोगों का कहना है कि यदि आग पर काबू पाने में थोड़ी भी देरी होती, तो आसपास की अन्य झोपड़ियां भी इसकी चपेट में आ सकती थीं। प्रशासनिक सतर्कता और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
कोई जनहानि नहीं, लेकिन बड़ा नुकसान
इस भागलपुर सिलेंडर ब्लास्ट में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन पीड़ित परिवार का भारी नुकसान हुआ है। झोपड़ी में रखा सारा घरेलू सामान जलकर राख हो गया। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

मध्यस्थता अभियान 2.0 से न्यायिक प्रक्रिया होगी और अधिक सरल

आगरा,(राष्ट्र की परम्परा)l न्यायिक प्रक्रिया को सरल, त्वरित और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 को प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से बुधवार को जनपद आगरा में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक मा. जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगरा संजय कुमार मलिक की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें जनपद के समस्त न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे।
यह अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के क्रम में संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का सुलह-समझौते के माध्यम से त्वरित निस्तारण कर आम जनता को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराना है।
मध्यस्थता को प्राथमिकता देने के निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान मा. जनपद न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे ऐसे मामलों को चिन्हित करें, जिनका निस्तारण मध्यस्थता (Mediation) के माध्यम से संभव है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता न केवल न्यायालयों पर भार कम करती है, बल्कि वादकारियों के समय, धन और मानसिक तनाव की भी बचत करती है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि अधिक से अधिक उपयुक्त पत्रावलियों को मध्यस्थता हेतु संदर्भित किया जाए तथा मध्यस्थों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया जाए कि वे त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी मध्यस्थता कर अधिकाधिक मामलों का समाधान करें।
पूर्व अभियान की सफलता से मिली प्रेरणा
बैठक में विनीता सिंह प्रथम, सचिव (पूर्णकालिक), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगरा ने जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व वर्ष राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान के अंतर्गत बड़ी संख्या में ऐसे वाद चिन्हित किए गए थे, जिनका निस्तारण सुलह-समझौते के माध्यम से सफलतापूर्वक किया गया।
उन्होंने बताया कि पिछले अभियान में पारिवारिक विवाद, वैवाहिक मामले, धन वसूली, आपसी विवाद जैसे अनेक प्रकरणों का समाधान बिना लंबी न्यायिक प्रक्रिया के किया गया, जिससे वादकारियों को शीघ्र राहत मिली और अभियान अत्यंत सफल सिद्ध हुआ।
अभियान 2.0 में अधिक व्यापक स्तर पर कार्य
इसी सफलता को दृष्टिगत रखते हुए राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 को और अधिक व्यापक रूप में संचालित किया जा रहा है। इस चरण में अधिक से अधिक मामलों को चिन्हित कर उन्हें मध्यस्थता के लिए भेजा जा रहा है, ताकि न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी और जन-अनुकूल बनाया जा सके।
विनीता सिंह प्रथम ने कहा कि यह अभियान न केवल न्यायालयों के लिए बल्कि आम नागरिकों के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा, क्योंकि इससे वर्षों से लंबित मामलों का समाधान आपसी सहमति से संभव हो सकेगा।
मीडिया से सहयोग की अपील
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आगरा द्वारा जनपद की प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से भी अपील की गई कि वे राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें, जिससे आम जनता को इस अभियान की जानकारी मिल सके और वे अपने लंबित मामलों के निस्तारण के लिए मध्यस्थता का लाभ उठा सकें।
उन्होंने कहा कि मीडिया की सकारात्मक भूमिका से आम नागरिकों में विधिक जागरूकता बढ़ेगी और न्याय तक पहुंच और अधिक सरल होगी।
जिला कारागार आगरा में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन
इसी क्रम में दिनांक 28 जनवरी 2026 को जिला कारागार, आगरा के महिला बैरक में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य निरुद्ध महिला बंदियों को उनके विधिक अधिकारों से अवगत कराना एवं उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी देना रहा।
शिविर में नागेश सिंह (कारापाल), मेघा राजपूत, अंजनी सिंह (डिप्टी जेलर/उप कारापाल) सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
महिला बंदियों को दी गई विधिक अधिकारों की जानकारी
शिविर के दौरान महिला बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता, जेल लोक अदालत, चश्मा वार्निंग, जमानत संबंधी अधिकार, अपील प्रक्रिया एवं अन्य संवैधानिक अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बंदियों को बताया गया कि वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से बिना किसी शुल्क के विधिक सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
पुरुष बैरकों का भी किया गया निरीक्षण
इसके अतिरिक्त जिला कारागार के समस्त पुरुष बैरकों का निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान निरुद्ध बंदियों से जातिगत भेदभाव, साफ-सफाई एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर जानकारी ली गई। किसी भी बंदी द्वारा किसी प्रकार की समस्या व्यक्त नहीं की गई।
फिर भी निरीक्षण के दौरान उपस्थित कारापाल को निर्देशित किया गया कि जेल परिसर में स्वच्छता, मानवीय व्यवहार तथा किसी भी प्रकार के जातिगत भेदभाव से पूर्णतः मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
न्याय को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में सशक्त पहल
राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 और कारागारों में विधिक जागरूकता शिविर जैसे कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि न्यायपालिका एवं विधिक सेवा प्राधिकरण आम नागरिकों को त्वरित, सुलभ और सस्ता न्याय उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। यह पहल न केवल न्यायिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में विश्वास और समरसता को भी मजबूत करती है।

बाबा कालीचरण फुटबॉल प्रतियोगिता के फाइनल में गाजीपुर ने सिवान को हराकर जीती ट्रॉफी

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री श्री 1008 बाबा कालीचरण फुटबॉल प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। गाजीपुर और सिवान की टीमों के बीच हुए फाइनल मुकाबले में जब जज्बा, कौशल और अनुशासन एक साथ मैदान पर उतरे तो खेल प्रेमियों को यादगार मुकाबला देखने को मिला। बाबा कालीचरण स्पोर्टिंग फुटबॉल क्लब द्वारा आयोजित इस महामुकाबले में गाजीपुर (मिस्टर इंडिया) की टीम ने सिवान (यूनाइटेड क्लब/IFC) को पराजित कर चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली और दर्शकों की सांसें अंत तक थमी रहीं। निर्णायक क्षणों में गाजीपुर के खिलाड़ी सरफराज अहमद (जर्सी नंबर 11) ने शानदार गोल दागकर मैच का रुख अपनी टीम की ओर मोड़ दिया। सिवान की टीम ने बराबरी के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन गाजीपुर की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने उनके प्रयास सफल नहीं हो सके। अंततः गाजीपुर विजेता और सिवान उप-विजेता रही।
मैच के रोमांच को और भी खास बना दिया मशहूर कमेंटेटर फिरोज खान उर्फ बुलेट की जोशीली और प्रभावशाली कमेंट्री ने। उनके अंदाज-ए-बयां ने पूरे स्टेडियम को उत्साह से भर दिया, जिसकी चर्चा दर्शकों के बीच खूब रही।
खेल के साथ-साथ आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी माहौल को रंगीन बना दिया। मुरली सिंह प्रेमी, अवनीश प्रेमी तथा गोल्डन लाइफ चिल्ड्रन एकेडमी के नन्हे बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। एकेडमी के प्रबंधक संतोष सैनी और शिक्षकों के मार्गदर्शन में दी गई प्रस्तुतियों की अतिथियों ने सराहना की।
फाइनल मुकाबले में क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियों की उपस्थिति रही। समाजसेवी अभय मिश्रा, पूर्व विधायक स्वामीनाथ यादव, पूर्व फुटबॉलर रामराज यादव सहित रोशन यादव, विजय जायसवाल, सुशील चौरसिया, अभिषेक सिंह, अनुपम मिश्रा, हिमांशु सिंह, आदिल अंसारी और विकास ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
प्रतियोगिता के अध्यक्ष और समाजसेवी अजय यादव के नेतृत्व में ग्रामीण युवाओं ने आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। मैच का संचालन मुख्य रेफरी अजीजुल हसन और शब्बीर अहमद ने किया, जबकि लाइनमैन के रूप में मज्जबर रहमान और रिंकू ने सटीक निर्णय दिए।
विजेता गाजीपुर टीम के कप्तान बरकतउल्लाह रहे, जबकि कोच की भूमिका अमानुल्लाह ने निभाई। टीम में उबैद, मोनू, अफजल, बालाजी, अमीर आजम, मोहम्मद अलकमा, अबू बकर, भोलू, नजीर, खोजेमा, इब्राहिम, शाहिद और हाशिम शामिल रहे।
उप-विजेता सिवान (IFC) टीम की कप्तानी सोनू यादव ने की। टीम में आरिफ, अर्सलान, सोनू, अप, विवेक, बृजेश, हसन, राजू, रत्नेश्वर, हर्ष, अर्जुन और जाहिद शामिल रहे।
आयोजन के समापन पर वक्ताओं ने कहा कि खेल एकता, अनुशासन और भाईचारे का संदेश देता है, और इस प्रतियोगिता ने ग्रामीण क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने का कार्य किया है।

आगरा में गुजरात के युवाओं ने बिखेरी संस्कृति और भाईचारे की मिसाल

आगरा, (राष्ट्र की परम्परा)l युवाओं को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और नेतृत्व क्षमता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में इंटरस्टेट यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम 2026 का सफल समापन मंगलवार को यूथ होस्टल, संजय पैलेस, आगरा में किया गया। यह कार्यक्रम मेरा युवा भारत, आगरा द्वारा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें गुजरात राज्य से आए युवाओं ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपरा, भाषा और जीवन शैली से परिचित कराना तथा उनमें राष्ट्रीय एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना रहा। समापन समारोह पूरे दिन अनुशासन, सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।
योग और ध्यान सत्र से हुई समापन समारोह की शुरुआत

समापन कार्यक्रम की शुरुआत गुजरात से आए युवाओं के लिए विशेष रूप से आयोजित योग एवं ध्यान सत्र से की गई। इस सत्र का उद्देश्य युवाओं को मानसिक शांति, आत्मसंयम, सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था। प्रशिक्षकों ने योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर बल देते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर और शांत मन ही सफलता की कुंजी है।
गरिमामयी अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
समापन समारोह में जिला सूचना अधिकारी शैलेन्द्र कुमार शर्मा, जिला पंचायती राज अधिकारी आगरा मनीष कुमार तथा जिला युवा अधिकारी आगरा डॉ. श्रवण कुमार सहगल की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंचासीन अतिथियों का पारंपरिक तरीके से माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र (पटका) पहनाकर स्वागत किया गया तथा स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का सशक्त माध्यम: शैलेन्द्र शर्मा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला सूचना अधिकारी शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि भारत सरकार द्वारा आयोजित इस प्रकार के इंटरस्टेट यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम युवाओं को एक-दूसरे से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक, खेल एवं शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को विभिन्न राज्यों की परंपराओं, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से परिचित कराया जाता है, जिससे आपसी समझ और राष्ट्रीय एकता को बल मिलता है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ऐसे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लें और देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएं।
युवा ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति: डॉ. श्रवण कुमार सहगल
जिला युवा अधिकारी आगरा डॉ. श्रवण कुमार सहगल ने अपने संबोधन में कहा कि आज का युवा भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि युवा अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं तो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को और तेज किया जा सकता है। उन्होंने अनुशासन, सकारात्मक सोच और निरंतर परिश्रम को सफलता का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि स्पष्ट लक्ष्य और आत्मविश्वास के साथ कोई भी उपलब्धि असंभव नहीं है।
संकल्प और आत्मविश्वास से ही भविष्य का निर्माण: मनीष कुमार
जिला पंचायती राज अधिकारी आगरा मनीष कुमार ने युवाओं को जीवन में स्पष्ट संकल्प लेने और आने वाली चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को नेतृत्व, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराते हैं।
गुजरात के युवाओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
समारोह के दौरान गुजरात के सुरेंद्रनगर, सूरत, राजकोट, अहमदाबाद सहित विभिन्न जिलों से आए 38 सदस्यीय युवा प्रतिनिधिमंडल ने अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को दर्शाते हुए आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। देशभक्ति गीतों, लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ युवाओं का उत्साहवर्धन किया।
प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और स्मृति उपहार
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं जिला युवा अधिकारी आगरा द्वारा सभी प्रतिभागी युवाओं को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति-उपहार प्रदान किए गए। आयोजकों ने युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
सहयोगियों का रहा अहम योगदान
इस सफल आयोजन को व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में राजेन्द्र शर्मा, अंकित, आशु रानी शर्मा, अमन, दीक्षा, रविकांत सहित अन्य सहयोगियों का विशेष योगदान रहा। उनके सामूहिक प्रयासों से कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा।

सड़क हादसे में घायल हेड कांस्टेबल हिमांशु पति त्रिपाठी का लखनऊ में निधन

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के श्यामदेउरवा थाने में तैनात हेड कांस्टेबल हिमांशु पति त्रिपाठी का बुधवार को लखनऊ में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके असामयिक निधन की सूचना मिलते ही श्यामदेउरवा थाना परिसर सहित पूरे पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। इस दुखद खबर से पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग स्तब्ध नजर आए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 19 जनवरी को हेड कांस्टेबल हिमांशु पति त्रिपाठी किसी आवश्यक सरकारी कार्य से महराजगंज आए हुए थे। कार्य निपटाने के बाद वह अपनी बाइक से श्यामदेउरवा थाने लौट रहे थे। इसी दौरान कोतवाली थाना क्षेत्र के बरवा विद्यापति के पास सामने से आ रही एक अन्य बाइक से उनकी बाइक की जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में वह सड़क पर गिर पड़े और उनके सिर में गंभीर चोटें आईं।
घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन्हें तत्काल जिला अस्पताल महराजगंज पहुंचाया। हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। वहां से बेहतर उपचार के लिए उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक चले इलाज के बावजूद बुधवार को उनका निधन हो गया।
श्यामदेउरवा थानाध्यक्ष अभिषेक सिंह ने बताया कि हेड कांस्टेबल हिमांशु पति त्रिपाठी मूल रूप से देवरिया जनपद के निवासी थे और वर्ष 1994 बैच के आरक्षी थे। करीब एक वर्ष पूर्व उनकी तैनाती श्यामदेउरवा थाने में हुई थी। वे अपने कार्यकाल के दौरान अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और सौम्य व्यवहार के लिए जाने जाते थे।
उनके निधन से पुलिस विभाग ने एक अनुभवी, ईमानदार और समर्पित कर्मी को खो दिया है। साथी पुलिस कर्मियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। पूरे पुलिस महकमे में शोक का माहौल है और हर आंख नम है।

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026:परिवहन कार्यालय में सड़क सुरक्षा और राहवीर योजना पर जागरूकता कार्यक्रम

कुशीनगर(राष्ट्र की परम्परा)राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह जनवरी 2026 के तहत परिवहन कार्यालय, कुशीनगर में एक व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करना और दुर्घटना के समय जीवनरक्षक सहायता को प्रोत्साहित करना रहा।कार्यक्रम में एआरटीओ कुशीनगर मो. अजीम एवं यात्री/मालकर अधिकारी बलवंत सिंह ने सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद से जुड़ी राहवीर योजना की विस्तार से जानकारी दी।अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई नागरिक सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को “गोल्डन आवर” यानी दुर्घटना के पहले एक घंटे के भीतर नजदीकी अस्पताल पहुंचाता है, तो उसे केंद्र सरकार की राहवीर योजना के अंतर्गत ₹25,000 की नकद पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।
अधिकारियों ने कहा कि सड़क पर दुर्घटना के समय भय या झिझक छोड़कर मानवता के नाते आगे आना प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। राहवीर योजना ऐसे लोगों को सम्मानित कर समाज में सकारात्मक संदेश देने का कार्य करती है।इस दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े अहम नियमों पर भी जोर दिया गया, जिनमें दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का अनिवार्य प्रयोग, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट का उपयोग, निर्धारित गति सीमा का पालन, यातायात संकेतों का सम्मान और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करना शामिल है।कार्यक्रम में मौजूद नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सड़क सुरक्षा एवं राहवीर योजना से संबंधित प्रश्न पूछकर जानकारी प्राप्त की। परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में आमजनमानस की सहभागिता रही।अधिकारियों ने अपील की कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए हर व्यक्ति को स्वयं नियमों का पालन करना चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।

“पेटेंट से प्रोडक्ट तक” प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय का नवाचार

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में आयोजित “पेटेंट से प्रोडक्ट तक” प्रदर्शनी में शोध को व्यावहारिक उत्पाद में बदलने के नवाचार दिखाए गए। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने नवाचारों का अवलोकन कर सराहना की।
प्रदर्शनी में तरल जैविक खाद (वर्मीवाश) बनाने की विधि प्रदर्शित की गई। यह विधि कम लागत, पर्यावरण-अनुकूल और छोटे किसानों के लिए लाभकारी है। वर्मीवाश को विशेष यंत्र से फिल्टर कर फसलों पर छिड़काव किया जाता है। 3–4 बार छिड़काव से फसलों की वृद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उत्पादन बढ़ता है। इसमें नाइट्रोजन, पोटैशियम, कैल्शियम, खनिज लवण, एंजाइम, हार्मोन और विटामिन प्रचुर मात्रा में होते हैं।
वर्मीवाश बाजार में ₹30–40 प्रति लीटर और वर्मीकम्पोस्ट ₹10–15 प्रति किलोग्राम में उपलब्ध है। यह बेरोजगारों के लिए स्वरोजगार का अवसर भी प्रदान करता है। इस नवाचार को प्राणि विज्ञान विभाग के प्रो. केशव सिंह और निशात फ़ातिमा ने पेटेंट से उत्पाद तक विकसित किया।
IPR में प्रगति
विश्वविद्यालय ने पिछले दो वर्षों में 79 पेटेंट आवेदन, 65 कॉपीराइट और 1 ट्रेडमार्क आवेदन किए। कुलपति ने कहा कि मजबूत IPR प्रणाली नवाचार की गुणवत्ता और प्रभाव बढ़ाती है।

बाबू मैनेजर सिंह जयंती पर आयोजित मैराथन में इथियोपिया के फिरोनिशा रहे अव्वल

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। द्वाबा के मालवीय कहे जाने वाले पूर्व विधायक बाबू मैनेजर सिंह की जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य मैराथन प्रतियोगिता में देश-विदेश के धावकों ने उत्साह के साथ भाग लिया। खेल भावना और प्रतिस्पर्धा से भरपूर इस आयोजन में करीब एक हजार धावक शामिल हुए, जिससे पूरा क्षेत्र खेलमय माहौल में रंगा नजर आया।

42.195 किमी की फुल मैराथन में अफ्रीकी देश इथियोपिया के धावक फिरोनिशा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने यह दूरी मात्र 2 घंटे 8 मिनट में पूरी कर सभी को प्रभावित किया। मुजफ्फरनगर के अक्षय कुमार दूसरे तथा दिल्ली के अमरेश प्रजापति तीसरे स्थान पर रहे।

21 किमी की हाफ मैराथन में वाराणसी के पंकज कुमार ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि अयोध्या के प्रिंस राज यादव दूसरे और आगरा के मनीष सिंह तीसरे स्थान पर रहे। 10 किमी दौड़ में प्रिंस राज मिश्र पहले, वाराणसी के आशीष पाल दूसरे और बलिया के राकेश वर्मा तीसरे स्थान पर रहे। वहीं 5 किमी दौड़ में वाराणसी की सोनी ने पहला, लक्ष्मी चौहान ने दूसरा और रूबी पाल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

फुल मैराथन विजेता फिरोनिशा को खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने 2.25 लाख रुपये का पुरस्कार प्रदान किया। दूसरे स्थान पर आए अक्षय कुमार को 1.25 लाख रुपये और तीसरे स्थान पर रहे अमरेश प्रजापति को 75 हजार रुपये दिए गए। अन्य सभी वर्गों में भी आकर्षक नकद पुरस्कार वितरित किए गए। प्रत्येक श्रेणी में 50वें स्थान तक आने वाले प्रतिभागियों को भी प्रोत्साहन राशि दी गई।

मैराथन का शुभारंभ सुबह 8 बजे वीर लोरिक स्टेडियम से गिरीश चंद्र यादव और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया। फुल मैराथन का समापन बैरिया स्थित बाबू मैनेजर सिंह की प्रतिमा स्थल पर हुआ, जबकि पुरस्कार वितरण कार्यक्रम सुदिष्टपुरी स्थित सुदिष्ट बाबा स्कूल में आयोजित किया गया।

अपने संबोधन में गिरीश चंद्र यादव ने इस आयोजन को जनपद के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि भविष्य में इसे और भव्य रूप दिया जाएगा। उन्होंने बलिया के प्रत्येक ब्लॉक में स्टेडियम निर्माण की घोषणा भी की। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने आयोजन को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि जिले में खेल और विकास से जुड़े कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। उन्होंने 70 वर्षीय धावक चंद्रभान सिंह और कक्षा तीन के छात्र कार्तिक राजभर को 50-50 हजार रुपये देकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम के दौरान बाबू मैनेजर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, खेल प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की मौजूदगी ने आयोजन को यादगार बना दिया।

नया नाम जोड़ना या सुधार करना अब आसान,विशेष चुनावी अभियान

औरैया, (राष्ट्र की परम्परा)। लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा प्रत्येक पात्र नागरिक को मताधिकार से जोड़ने के उद्देश्य से जनपद औरैया में मतदाता सूची विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान 2026 आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत एक दिवसीय विशेष कार्यक्रम दिनांक 31 जनवरी 2026 (शनिवार) को आयोजित होगा। यह जानकारी उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) अविनाश चन्द्र मौर्य ने दी।
उन्होंने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशानुसार यह अभियान जनपद की तीनों विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ संचालित किया जाएगा। अभियान का समय पूर्वान्ह 10:30 बजे से अपरान्ह 4:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस दौरान मतदाता सूची से संबंधित सभी प्रकार के दावे एवं आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी।

ये भी पढ़ें – हत्या के प्रयास मामले में वांछित अभियुक्त गिरफ्तार

तीनों विधानसभा क्षेत्रों में रहेगा विशेष अभियान
इस विशेष अभियान के अंतर्गत जनपद औरैया की
202 – बिधूना विधानसभा क्षेत्र,
203 – दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र,
204 – औरैया (अनुसूचित जाति) विधानसभा क्षेत्र
के सभी मतदान स्थलों पर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) एवं पदाभिहीत अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। नागरिक अपने नजदीकी मतदान स्थल पर जाकर सीधे बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं।
मतदाता सूची का पठन और सत्यापन
निर्वाचन आयोग के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुसार, अभियान के दिन सभी मतदान स्थलों पर आलेख्य (ड्राफ्ट) मतदाता नामावली का पठन किया जाएगा। इसके साथ ही अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक एवं डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची भी पढ़ी जाएगी, जिससे मतदाता स्वयं अपनी प्रविष्टियों की जांच कर सकें और समय रहते सुधार करा सकें।
फॉर्म 6, 7 और 8 की सुविधा
प्रत्येक बूथ पर बीएलओ के पास पर्याप्त मात्रा में
फॉर्म-6 (नया नाम जोड़ने हेतु),
फॉर्म-7 (नाम विलोपन हेतु),
फॉर्म-8 (संशोधन हेतु)
उपलब्ध रहेंगे। नए मतदाता, जिन्होंने हाल ही में 18 वर्ष की आयु पूर्ण की है, वे आवश्यक घोषणा पत्र के साथ फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।
अधिकारियों का भ्रमण और समस्या समाधान
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक अधिकारी, सुपरवाइजर एवं पर्यवेक्षणीय अधिकारी मतदान स्थलों का भ्रमण करेंगे। वे मौके पर ही मतदाताओं की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करेंगे।
लोकतंत्र की मजबूती में जनभागीदारी जरूरी
उप जिला निर्वाचन अधिकारी अविनाश चन्द्र मौर्य ने नागरिकों से अपील की कि वे मतदाता सूची विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान 2026 में सक्रिय सहभागिता करें। उन्होंने कहा कि शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित मतदाता सूची ही निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की आधारशिला होती है। प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे।

विष्णु भगवान -सृष्टि पालक श्रीहरि की दिव्य लीला

परिचय
विष्णु भगवान कथा सनातन धर्म की आत्मा है। विष्णु पुराण कथा में वर्णित श्रीहरि विष्णु लीला केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन के गूढ़ सत्य और धर्म, कर्म व मोक्ष का मार्ग दिखाने वाली अमूल्य धरोहर है। शास्त्रोक्त मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं। इस एपिसोड 12 में हम वैकुंठ लोक, श्रीहरि के स्वरूप, उनके गुणों और भक्तों के प्रति करुणा को विस्तार से समझेंगे। यह कथा न केवल आस्था बढ़ाती है बल्कि मन को स्थिर और विचारों को शुद्ध करती है।

ये भी पढ़ें – सच्चे भक्त के साथ कैसे खड़े होते हैं भगवान विष्णु

वैकुंठ लोक का दिव्य स्वरूप
शास्त्रों के अनुसार वैकुंठ लोक वह धाम है जहाँ न दुख है, न भय और न ही काल का प्रभाव। यहाँ भगवान विष्णु शेषनाग पर योगनिद्रा में स्थित रहते हैं। उनके चरणों में माता लक्ष्मी विराजमान रहती हैं। वैकुंठ का प्रत्येक कण चेतना से परिपूर्ण है। विष्णु पुराण कथा बताती है कि जो भक्त मन, वचन और कर्म से श्रीहरि का स्मरण करता है, उसका अंतःकरण वैकुंठ के समान पवित्र हो जाता है।
श्रीहरि विष्णु का शास्त्रोक्त स्वरूप
भगवान विष्णु का स्वरूप अत्यंत शांत और सौम्य है। उनके चार हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित रहते हैं।
शंख धर्म की उद्घोषणा करता है, चक्र अधर्म का नाश करता है, गदा बल और न्याय का प्रतीक है तथा पद्म वैराग्य और पवित्रता का संकेत देता है।
विष्णु भगवान कथा में यह स्पष्ट किया गया है कि श्रीहरि का स्वरूप स्वयं वेदों का साक्षात रूप है।

ये भी पढ़ें – “सत्य, करुणा और विष्णु-भक्ति: कलियुग के लिए शास्त्रोक्त अमर संदेश”

मुख्य कथा: भक्त और भगवान का संवाद
शास्त्रों में एक प्रसंग आता है जब देवर्षि नारद वैकुंठ पधारते हैं। वे भगवान विष्णु से पूछते हैं कि सृष्टि में सबसे प्रिय क्या है। श्रीहरि मुस्कुराते हुए कहते हैं – “मुझे न यज्ञ प्रिय है, न तप, न दान; मुझे प्रिय है मेरा सच्चा भक्त।”
यह संवाद श्रीहरि विष्णु लीला का हृदय है। भगवान भक्त की भावना देखते हैं, बाहरी आडंबर नहीं।
भक्ति का शास्त्रोक्त महत्व
विष्णु पुराण कथा के अनुसार भक्ति ही वह साधन है जिससे जीव भवसागर से पार होता है। जब भक्त नाम-स्मरण करता है, तो स्वयं विष्णु भगवान उसके जीवन का भार उठा लेते हैं।
यह स्पष्ट होता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का स्थान नहीं होता। जो स्वयं को शून्य मान लेता है, वही श्रीहरि को पा लेता है।

ये भी पढ़ें – “भक्त की पुकार पर प्रकट हुए श्रीविष्णु: करुणा, न्याय और सनातन सत्य की कथा”

सृष्टि पालन में विष्णु की भूमिका
त्रिदेवों में भगवान विष्णु पालनकर्ता हैं। ब्रह्मा सृष्टि की रचना करते हैं और महादेव संहार करते हैं, परंतु सृष्टि का संतुलन श्रीहरि के हाथों में है।
विष्णु भगवान कथा बताती है कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान विष्णु अवतार लेते हैं। यही कारण है कि वे मत्स्य से लेकर कल्कि तक अनेक रूपों में प्रकट होते हैं।
लक्ष्मी-नारायण का दिव्य संबंध
माता लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं, वे करुणा और समृद्धि की प्रतीक हैं। विष्णु पुराण कथा में वर्णित है कि लक्ष्मी वहीं निवास करती हैं जहाँ धर्म और सत्य होता है।
हमें यह शिक्षा मिलती है कि धन तभी स्थायी होता है जब वह धर्म के साथ जुड़ा हो।
मानव जीवन के लिए संदेश
श्रीहरि विष्णु लीला हमें सिखाती है कि जीवन में संतुलन आवश्यक है। न अत्यधिक भोग, न कठोर त्याग। कर्म करते हुए भगवान का स्मरण ही मोक्ष का मार्ग है।
जो व्यक्ति प्रतिदिन विष्णु भगवान कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन में शांति और स्थिरता आती है।

ये भी पढ़ें – जब हनुमान ने अपनी शक्ति पहचानी

कलियुग और विष्णु भक्ति
कलियुग में भक्ति ही सबसे सरल साधन है। शास्त्र कहते हैं कि नाम-स्मरण से ही भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। विशेष रूप से बताया गया है कि कलियुग में विष्णु नाम का जाप समस्त पापों का नाश करता है।
शास्त्रोक्त निष्कर्ष
भगवान विष्णु केवल देवता नहीं, वे जीवन-दर्शन हैं। उनकी कथा सुनकर मन निर्मल होता है और बुद्धि विवेकशील बनती है।
विष्णु भगवान कथा, विष्णु पुराण कथा और श्रीहरि विष्णु लीला – ये तीनों मिलकर मानव को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का संतुलित मार्ग दिखाती हैं।
पाठक के लिए विशेष संदेश
यदि आप जीवन में शांति, सुरक्षा और स्थायित्व चाहते हैं, तो प्रतिदिन श्रीहरि का स्मरण करें। वैकुंठ दूर नहीं, वह आपके अंतःकरण में ही है।

अमर नाम और अविस्मरणीय योगदान

29 जनवरी का इतिहास: देश-दुनिया की महान विभूतियों के निधन की स्मृति

✍️ भूमिका
इतिहास केवल तिथियों का संकलन नहीं होता, बल्कि उन व्यक्तित्वों की स्मृति होता है जिन्होंने अपने कर्म, संघर्ष और विचारों से समाज को दिशा दी। 29 जनवरी का इतिहास भारत और विश्व के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन राजनीति, साहित्य, सिनेमा, प्रशासन और सामाजिक चेतना से जुड़े कई महान व्यक्तित्वों का निधन हुआ।
यह लेख 29 जनवरी को हुए निधन पर केंद्रित एक ऐतिहासिक दस्तावेज है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्मरण और प्रेरणा दोनों का कार्य करेगा।
🕯️ 29 जनवरी को हुए प्रमुख निधन (विस्तृत इतिहास)
🔸 महाराणा प्रताप (1597)
महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के उन योद्धाओं में से हैं जिनका नाम स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्रभक्ति का पर्याय है। मेवाड़ के शिशोदिया राजवंश के इस महान राजा ने मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
हल्दीघाटी का युद्ध भले ही रणनीतिक रूप से निर्णायक न रहा हो, लेकिन महाराणा प्रताप का संघर्ष भारतीय आत्मसम्मान की अमर गाथा बन गया।
29 जनवरी का इतिहास महाराणा प्रताप के बलिदान को नमन करता है।
🔸 पीलू मोदी (1983)
पीलू मोदी भारत की स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख नेता और मुक्त अर्थव्यवस्था के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने समाजवाद की आलोचना करते हुए उदार आर्थिक नीतियों की वकालत की।
उनकी राजनीतिक सोच आज भी आर्थिक विमर्श में प्रासंगिक मानी जाती है।
29 जनवरी को हुए निधन में पीलू मोदी का नाम भारतीय संसदीय इतिहास में विशेष स्थान रखता है।

ये भी पढ़ें – नए UGC कानून के विरोध में गोरखपुर में जोरदार प्रदर्शन, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमले का आरोप

🔸 सरला ग्रेवाल (2002)
सरला ग्रेवाल भारतीय प्रशासनिक सेवा की दूसरी महिला अधिकारी थीं। वे मध्य प्रदेश की राज्यपाल भी रहीं।
उन्होंने प्रशासन में महिला नेतृत्व को नई दिशा दी और सामाजिक न्याय, शिक्षा व महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया।
29 जनवरी का इतिहास भारतीय प्रशासन में महिलाओं की मजबूत उपस्थिति को रेखांकित करता है।
🔸 राम निवास मिर्धा (2010)
राम निवास मिर्धा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। उन्होंने शिक्षा, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुधारों के लिए कार्य किया।
उनका राजनीतिक जीवन सादगी और सेवा भाव का उदाहरण रहा।
29 जनवरी को हुए निधन में उनका योगदान जनसेवा के रूप में याद किया जाता है।
🔸 मोहम्मद अल्वी (2018)
मोहम्मद अल्वी उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित शायर और साहित्यकार थे। उनकी शायरी में आम आदमी का दर्द, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाएं स्पष्ट झलकती हैं।
उनकी रचनाएं उर्दू साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।
29 जनवरी का इतिहास साहित्य जगत के इस स्तंभ को श्रद्धांजलि देता है।
🔸 जॉर्ज फ़र्नांडिस (2019)
जॉर्ज फ़र्नांडिस भारतीय राजनीति के एक जुझारू नेता, ट्रेड यूनियन आंदोलन के अग्रदूत और भारत के रक्षा मंत्री रहे।
उन्होंने आपातकाल का विरोध किया और मजदूर अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
29 जनवरी को हुए निधन भारतीय लोकतंत्र के एक मजबूत प्रहरी को याद करता है।
🔸 अरविंद जोशी (2021)
अरविंद जोशी भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के चर्चित अभिनेता थे।
उन्होंने गंभीर भूमिकाओं से अपनी अलग पहचान बनाई और कला सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान दिया।
29 जनवरी का इतिहास अभिनय जगत के इस सशक्त कलाकार को नमन करता है।
🔸 बाबा इकबाल सिंह (2022)
बाबा इकबाल सिंह किंगरा सिख समुदाय के सामाजिक-आध्यात्मिक नेता थे।
उन्होंने शिक्षा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में जीवन समर्पित किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
29 जनवरी को हुए निधन सामाजिक चेतना के एक दीपक के बुझने का दिन है।

ये भी पढ़ें – पीएम आवास योजना शहरी 2.0 के तहत मऊ में 650 महिलाओं को मिले स्वीकृति पत्र

📌 29 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व
29 जनवरी का इतिहास हमें यह सिखाता है कि अलग-अलग क्षेत्रों में किए गए योगदान मिलकर राष्ट्र की नींव मजबूत करते हैं।
चाहे वह युद्धभूमि हो, संसद, साहित्य, सिनेमा या समाजसेवा — इन सभी विभूतियों ने अपने-अपने तरीके से इतिहास रचा।

आज का इतिहास 29 जनवरी: जानिए विश्व को प्रभावित करने वाली घटनाएँ

29 जनवरी का इतिहास: जानिए इस दिन घटीं भारत और दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ

📜 29 जनवरी का इतिहास | महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ
29 जनवरी का इतिहास विश्व और भारत दोनों के लिए कई मायनों में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इस दिन राजनीति, युद्ध, पत्रकारिता, विज्ञान, खेल और संस्कृति से जुड़ी अनेक घटनाएँ घटित हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा को प्रभावित किया।
29 जनवरी की महत्वपूर्ण घटनाएँ न केवल अतीत की झलक देती हैं, बल्कि वर्तमान को समझने में भी सहायक होती हैं।
🏰 16वीं–18वीं शताब्दी की ऐतिहासिक घटनाएँ
1528 में मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक बाबर ने मेवाड़ के शक्तिशाली राजा राणा सांगा को पराजित कर चंदेरी के क़िले पर अधिकार किया। यह विजय उत्तर भारत में मुग़ल सत्ता की मजबूती का संकेत बनी।
1676 में रूस के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा, जब थियोडोर तृतीय रूस के ज़ार बने। उनके शासनकाल ने रूसी राजनीति को नई दिशा दी।
1780 भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में ऐतिहासिक दिन रहा। इसी दिन भारत का पहला अंग्रेज़ी समाचारपत्र हिकीज बंगाल गजट प्रकाशित हुआ। इसके संपादक जेम्स ऑगस्टस हिक्की थे। यह अख़बार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक बना।
🌍 19वीं शताब्दी की प्रमुख घटनाएँ
1889 में ऑस्ट्रिया-हंगरी के युवराज आर्कड्यूक रूडोल्फ़ की आत्महत्या ने यूरोप की राजनीति और राजशाही को झकझोर दिया। यह घटना यूरोपीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिनी जाती है।
⚔️ 20वीं शताब्दी की निर्णायक घटनाएँ
1916 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने फ्रांस पर पहला बड़ा हमला किया।
1919 में चेक सेनाओं ने गैलीसिया में पोलैंड की सेना को पराजित किया।
1939 में रामकृष्ण मिशन सांस्कृतिक संस्थान की स्थापना हुई, जिसने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया।
1947 में अमेरिका ने चीन में मध्यस्थता की भूमिका से खुद को अलग कर लिया।
1949 में ब्रिटेन ने इज़रायल को आधिकारिक मान्यता दी।
1953 में भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के उद्देश्य से संगीत नाटक अकादमी की स्थापना हुई।
1963 में फ्रांस के वीटो के कारण ब्रिटेन को यूरोपीय साझा बाज़ार में प्रवेश नहीं मिल सका।
🚆 विज्ञान, रक्षा और कूटनीति
1973 में अमेरिका, सोवियत संघ और 17 अन्य देशों ने यूरोप में सैन्य बल कटौती पर चर्चा के लिए विएना में बैठक की।
1976 में सोवियत संघ अंगोला में राजनीतिक समाधान पर सहमत हुआ।
1979 में भारत की पहली जंबो ट्रेन (तमिलनाडु एक्सप्रेस) को नई दिल्ली से चेन्नई के लिए रवाना किया गया, जो भारतीय रेल के इतिहास में मील का पत्थर बनी।
🚀 अंतरिक्ष, राजनीति और वैश्विक घटनाएँ
1986 में अमेरिकी अंतरिक्ष शटल चैलेंजर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सभी 7 अंतरिक्ष यात्रियों की मृत्यु हुई।
1989 में सीरिया और ईरान ने लेबनान में संघर्ष रोकने के लिए समझौता किया।
1990 में पूर्वी जर्मनी के अपदस्थ नेता एरिक होनेकर को गिरफ़्तार किया गया।
1992 में भारत आसियान का क्षेत्रीय सहयोगी बना, जिससे एशिया-प्रशांत देशों से संबंध मजबूत हुए।
🏏 खेल, मनोरंजन और सामाजिक घटनाएँ
1993 में क्रिकेटर विनोद कांबली ने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया।
1994 में भारत सरकार ने एयर कॉरपोरेशन एक्ट 1953 को समाप्त कर दिया।
1996 में फ्रांस के राष्ट्रपति जैक्स शिराक ने भविष्य में परमाणु परीक्षण रोकने की घोषणा की।
🗳️ 21वीं शताब्दी की घटनाएँ
2002 में श्रीनगर में दो उग्रवादी मारे गए।
2003 में इज़रायल चुनाव में एरियल शेरोन की लिकुड पार्टी विजयी हुई, वहीं हिमाचल विधानसभा भंग हुई।
2005 में नक्सलवादियों ने गया में पूर्व भाजपा अध्यक्ष वेंकैया नायडू के हेलिकॉप्टर पर हमला किया, हालांकि वे सुरक्षित बच गए।
इसी वर्ष सेरेना विलियम्स ने ऑस्ट्रेलियन ओपन महिला खिताब जीता।
2007 में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने लंदन के रियलिटी शो बिग ब्रदर का खिताब जीता।
2008 में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने तीन सांसदों की सदस्यता समाप्त की।
ऑस्ट्रिया ने इराक से सेना वापस लेने की घोषणा की।
2009 में फिडेलिटी ने सत्यम कंप्यूटर के शेयर खरीदे।
2010 में भारत-रूस की संयुक्त परियोजना के तहत विकसित पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का सफल परीक्षण हुआ।
🔚 निष्कर्ष
29 जनवरी का इतिहास हमें यह सिखाता है कि कैसे एक ही दिन में राजनीति, युद्ध, संस्कृति, खेल और विज्ञान से जुड़े ऐतिहासिक बदलाव हुए।
29 जनवरी की महत्वपूर्ण घटनाएँ न केवल अतीत को जीवंत करती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सीख भी देती हैं।

इतिहास 29 जनवरी: जानिए इस दिन जन्मे दिग्गजों की कहानी

29 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: भारत और उपमहाद्वीप के इतिहास को दिशा देने वाले नाम

🔷 महत्वपूर्ण इतिहास: 29 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व
29 जनवरी को जन्मे व्यक्ति भारतीय और उपमहाद्वीपीय इतिहास में विशेष स्थान रखते हैं। यह दिन आध्यात्म, न्याय, राजनीति और खेल जैसे विविध क्षेत्रों में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों के जन्म के लिए जाना जाता है।
29 जनवरी जन्म इतिहास केवल तिथियों का संकलन नहीं, बल्कि उन जीवन कथाओं का दस्तावेज है, जिन्होंने समाज की दिशा और सोच को बदला।
आज का यह लेख 29 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व के जीवन, योगदान और ऐतिहासिक महत्व को सरल, तथ्यात्मक और शोधपरक तरीके से प्रस्तुत करता है।

ये भी पढ़ें – प्रो. डॉ. लक्ष्मण प्रसाद को डी.लिट. की उपाधि, मऊ गौरवान्वित

🔹 स्वामी प्रणबानंद महाराज (जन्म: 29 जनवरी 1896)
29 जनवरी को जन्मे व्यक्ति की सूची में स्वामी प्रणबानंद महाराज का नाम श्रद्धा और सेवा का प्रतीक है। वे भारत सेवा आश्रम संघ के संस्थापक थे। उनका जीवन मानव सेवा, आध्यात्मिक साधना और समाज सुधार को समर्पित रहा।
स्वामी प्रणबानंद महाराज ने देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी उन्होंने सामाजिक चेतना को मजबूत किया।
29 जनवरी जन्म इतिहास में उनका योगदान सेवा और त्याग की प्रेरणा देता है।
🔹 जोगेंद्र नाथ मंडल (जन्म: 29 जनवरी 1904)
29 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व में जोगेंद्र नाथ मंडल का स्थान राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री बने और दलित अधिकारों के प्रखर समर्थक रहे।
उन्होंने सामाजिक समानता, अल्पसंख्यक अधिकार और न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्ष किया।
29 जनवरी को जन्मे व्यक्ति के रूप में उनका जीवन सामाजिक न्याय और राजनीतिक चेतना का उदाहरण है।
🔹 न्यायमूर्ति अजीत नाथ राय (जन्म: 29 जनवरी 1912)
29 जनवरी जन्म इतिहास में न्यायमूर्ति अजीत नाथ राय का नाम भारतीय न्यायपालिका से जुड़ा है। वे भारत के 14वें मुख्य न्यायाधीश रहे और कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा बने।
उनका कार्यकाल न्यायिक अनुशासन, संवैधानिक व्याख्या और कानून की व्यावहारिक समझ के लिए जाना जाता है।
29 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व के रूप में उन्होंने न्याय प्रणाली को नई दिशा दी।

ये भी पढ़ें – संत के आशीर्वाद से बदली किस्मत, निःसंतान ब्राह्मण को मिला पुत्र प्राप्ति का वरदान

🔹 कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (जन्म: 29 जनवरी 1970)
29 जनवरी को जन्मे व्यक्ति में आधुनिक भारत के खेल इतिहास का चमकता नाम है – राज्यवर्धन सिंह राठौड़। वे एथेंस ओलंपिक 2004 में शूटिंग में रजत पदक जीतने वाले भारत के प्रतिष्ठित निशानेबाज हैं।
सेना अधिकारी से खेल जगत और फिर राजनीति तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
29 जनवरी जन्म इतिहास में उनका योगदान खेल और राष्ट्रसेवा दोनों क्षेत्रों में अमिट है।
🔷 29 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व
आज का इतिहास 29 जनवरी बताता है कि यह दिन विचार, संघर्ष, साधना और उपलब्धियों का संगम है। इस दिन जन्मे व्यक्तित्वों ने समाज को नई दिशा दी और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन प्रस्तुत किया।
29 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व यह साबित करते हैं कि एक तिथि कई युगों को प्रभावित कर सकती है।
🔷 क्यों पढ़ें 29 जनवरी जन्म इतिहास? सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी,स्कूल-कॉलेज प्रोजेक्ट और समाचार लेखन हेतु महत्वपूर्ण,सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंडिंग कंटेंट,इतिहास प्रेमियों के लिए प्रामाणिक संदर्भ

🔷 निष्कर्ष
29 जनवरी को जन्मे व्यक्ति केवल ऐतिहासिक नाम नहीं, बल्कि प्रेरणा के स्रोत हैं। उनके जीवन से हमें सेवा, न्याय, साहस और अनुशासन का संदेश मिलता है।
29 जनवरी जन्म इतिहास हमें यह सिखाता है कि एक व्यक्ति का योगदान समय की सीमाओं से परे होता है।