Friday, March 13, 2026
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लखनऊ में मातम: खामेनेई की मौत पर महिलाओं का प्रदर्शन

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर के बाद राजधानी लखनऊ में शोक और विरोध का माहौल देखने को मिला। मुस्लिम समुदाय, खासकर महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर गहरा दुख जताया और अमेरिका-इजराइल के खिलाफ नारेबाजी की।

“मेरे खामेनेई को धोखे से मारा”

प्रदर्शन के दौरान कई महिलाएं फफक-फफक कर रोती नजर आईं। एक महिला ने आरोप लगाया कि “मेरे खामेनेई को धोखे से मारा गया।” उन्होंने कहा कि खामेनेई “कल भी शेर थे, आज भी शेर हैं और कयामत तक शेर रहेंगे।”

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नाराजगी जताई और इसे अन्यायपूर्ण कार्रवाई बताया।

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घंटाघर और बड़ा इमामबाड़ा पर जुटी भीड़

घंटाघर और बड़ा इमामबाड़ा के पास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी प्रदर्शन में शामिल रहे।
प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजराइल विरोधी नारे लगाए और खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त किया।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन हालात पर नजर रखी जा रही है।

व्यापक प्रतिक्रिया

खामेनेई की मौत की खबर के बाद कई स्थानों पर विरोध और शोक सभाएं आयोजित की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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Ayatollah Ali Khamenei Death: मीटिंग के दौरान सटीक हमला, कैसे हुई मौत?

Ayatollah Ali Khamenei Death: ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत की आधिकारिक पुष्टि के बाद मध्य-पूर्व और वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में 86 वर्षीय खामेनेई की मौत हुई।

गुप्त बैठक के दौरान हुआ हमला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमला उस समय हुआ जब खामेनेई एक सुरक्षित और गुप्त स्थान पर उच्च स्तरीय बैठक कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार, वे ईरान की सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ सलाहकार अली शमखानी और Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) प्रमुख मोहम्मद पाकपूर के साथ महत्वपूर्ण रणनीतिक चर्चा में शामिल थे।

बताया जा रहा है कि खुफिया एजेंसियां लंबे समय से बैठक से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं। जैसे ही बैठक शुरू हुई, उसी स्थान को सटीक हवाई हमले में निशाना बनाया गया। हमला बेहद तेज और टारगेटेड बताया जा रहा है।

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संयुक्त सैन्य ऑपरेशन

सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई United States और Israel का संयुक्त सैन्य अभियान था। हालांकि ऑपरेशन की तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। हमले के तुरंत बाद पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया और बचाव व जांच दल मौके पर पहुंचे।
बाद में ईरानी सरकारी मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की।

ईरान में शोक और हाई अलर्ट

मौत की पुष्टि के बाद पूरे Iran में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। प्रमुख सरकारी भवनों, सैन्य ठिकानों और संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। देशभर में शोक की लहर है और शीर्ष नेतृत्व लगातार आपात बैठकों में जुटा है।

1989 से सर्वोच्च नेतृत्व

अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। उनके पास सेना की कमान, न्यायपालिका और प्रमुख पदों पर नियुक्ति का अंतिम अधिकार था। उनकी मौत से ईरान की आंतरिक राजनीति, उत्तराधिकार की प्रक्रिया और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर गहरा असर पड़ सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईरान की सत्ता संरचना और मध्य-पूर्व की भू-राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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Jammu Kashmir News: खामेनेई की मौत पर उबाल, श्रीनगर के लाल चौक में गूंजा—‘रहबर तेरे खून से इंकलाब आएगा’

Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद शिया समुदाय के लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। शहर के विभिन्न इलाकों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और अमेरिका तथा इजराइल के खिलाफ नारेबाजी की।

लाल चौक पर जुटी भीड़

लाल चौक पर बड़ी संख्या में पुरुष और युवा पोस्टर-बैनर और खामेनेई की तस्वीरें लेकर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने “रहबर तेरे खून से इंकलाब आएगा” और “एक से बढ़कर एक जलील, अमेरिका-इजराइल” जैसे नारे लगाए।

कई इलाकों में जुलूस निकाले गए और इमामबाड़ों के बाहर भी लोगों की भीड़ देखी गई।

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शांतिपूर्ण मार्च, बढ़ी सुरक्षा

अधिकारियों के अनुसार, शिया बहुल क्षेत्रों में सैकड़ों लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च किया। प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। फिलहाल हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताए जा रहे हैं।

हमले की पृष्ठभूमि

ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल के हमले में खामेनेई की मौत हुई। बताया जा रहा है कि हालिया सैन्य कार्रवाई के दौरान तेहरान में हमले हुए, जिसके बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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1 मार्च को हुए निधन: इतिहास के पन्नों में दर्ज महान व्यक्तित्वों की पुण्यतिथि

1 मार्च को हुए निधन: इतिहास में दर्ज महत्वपूर्ण व्यक्तित्व
1 मार्च को हुए निधन भारतीय और विश्व इतिहास के लिए विशेष महत्व रखते हैं। इस दिन कई ऐसी महान विभूतियों ने अंतिम सांस ली, जिन्होंने राजनीति, साहित्य, न्याय और स्वतंत्रता आंदोलन में अमिट छाप छोड़ी। 1 मार्च निधन इतिहास हमें उन हस्तियों को याद करने का अवसर देता है जिनकी विचारधारा और योगदान आज भी प्रासंगिक हैं।
नीचे प्रस्तुत है 1 मार्च को हुए निधन से जुड़ी प्रमुख हस्तियों का विस्तृत विवरण।

लॉर्ड मिंटो द्वितीय (निधन: 1 मार्च 1914)

लॉर्ड मिंटो द्वितीय का वास्तविक नाम गिल्बर्ट जॉन इलियट था। वे 1905 से 1910 तक भारत के वायसराय रहे। उनके कार्यकाल में 1909 का भारतीय परिषद अधिनियम (मॉर्ले-मिंटो सुधार) लागू हुआ, जिसने भारतीय राजनीति में पृथक निर्वाचक मंडल की शुरुआत की।
1 मार्च को हुए निधन में उनका नाम विशेष महत्व रखता है क्योंकि उनके निर्णयों ने भारत की राजनीतिक दिशा को प्रभावित किया।

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कोतारो तनाका (निधन: 1 मार्च 1974)

कोतारो तनाका जापान के प्रसिद्ध न्यायविद और शिक्षाविद थे। वे जापान के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रहे। अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
1 मार्च निधन इतिहास में उनका स्थान न्याय व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने वाले विद्वान के रूप में है।

जयरामदास दौलतराम (निधन: 1 मार्च 1979)

जयरामदास दौलतराम भारत के स्वतंत्रता सेनानी और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता थे। वे बिहार और असम के राज्यपाल भी रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले इस नेता का योगदान भारतीय राजनीति में दीर्घकाल तक स्मरणीय रहेगा।
1 मार्च को हुए निधन में उनका नाम स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों से जुड़ा है।

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वसंतदादा पाटिल (निधन: 1 मार्च 1989)

वसंतदादा पाटिल महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने सहकारिता आंदोलन को मजबूती प्रदान की।
1 मार्च पुण्यतिथि पर उन्हें विशेष रूप से महाराष्ट्र की राजनीति में उनके योगदान के लिए याद किया जाता है।

सोहन लाल द्विवेदी (निधन: 1 मार्च 1988)

सोहन लाल द्विवेदी हिन्दी साहित्य के राष्ट्रवादी कवि थे। उनकी कविताओं में देशभक्ति और जनजागरण की भावना स्पष्ट दिखाई देती है।
1 मार्च निधन इतिहास में उनका उल्लेख साहित्यिक योगदान के कारण महत्वपूर्ण है।

बंगारू लक्ष्मण (निधन: 1 मार्च 2014)

बंगारू लक्ष्मण वर्ष 2000 से 2001 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। उन्होंने दलित समुदाय से आने वाले पहले भाजपा अध्यक्ष के रूप में इतिहास रचा।
1 मार्च को हुए निधन में उनका नाम समकालीन भारतीय राजनीति से जुड़ा हुआ है।

तारक मेहता (निधन: 1 मार्च 2017)

तारक मेहता प्रसिद्ध गुजराती साहित्यकार और व्यंग्यकार थे। उनके लेखन पर आधारित लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
1 मार्च पुण्यतिथि पर साहित्य और हास्य जगत में उनके योगदान को याद किया जाता है।
1 मार्च निधन इतिहास का महत्व
1 मार्च को हुए निधन केवल तारीख भर नहीं है, बल्कि यह उन महान आत्माओं की स्मृति का दिन है जिन्होंने समाज, राजनीति, साहित्य और न्याय के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया।
1 मार्च निधन इतिहास हमें प्रेरणा देता है कि हम उनके आदर्शों और सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं।

महराजगंज में सात माह से मानदेय बंद, रोजगार सेवकों में रोष

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज जिले के ग्राम रोजगार सेवक पिछले सात माह से मानदेय न मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। होली जैसे प्रमुख त्योहार से पहले भुगतान न होने से उनकी उम्मीदें टूट गई हैं। परिवारों के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना, बच्चों की फीस भरना और इलाज कराना मुश्किल हो गया है।

त्योहार पर भी नहीं मिला भुगतान

रोजगार सेवकों का कहना है कि उनका मानदेय पहले से ही कम है, ऊपर से महीनों की देरी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। त्योहार के समय भी भुगतान न होना मनोबल तोड़ने वाला है। कई कर्मियों को कर्ज लेकर घर चलाना पड़ रहा है।

652 रोजगार सेवक प्रभावित

जिले में करीब 652 ग्राम रोजगार सेवक कार्यरत हैं, जिनकी नियुक्ति दिसंबर 2007 में मनरेगा के तहत की गई थी।

• शुरुआत में मानदेय: ₹2000 प्रतिमाह
• 2011 में बढ़कर: ₹3000
• 2016 में तय: ₹6000
• अक्टूबर 2021 से: ₹10,000 (12% ईपीएफ कटौती के बाद ₹7788 प्राप्त)

रोजगार सेवकों का कहना है कि समय पर भुगतान शायद ही कभी हुआ हो, लेकिन सात माह का बकाया अभूतपूर्व है।

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आंदोलन की चेतावनी

आक्रोशित कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र बकाया जारी नहीं किया गया तो वे सामूहिक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना की रीढ़ माने जाने वाले कर्मियों की अनदेखी से विकास कार्य प्रभावित होंगे।

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कपास जैसा प्रेम: त्याग, निष्ठा और साथ निभाने का आदर्श

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✍️ नवनीत मिश्र

“प्रीत करो तो ऐसी करो जैसी करे कपास।
जीते जी तन ढके, मरे न छोड़े साथ॥”

यह दोहा संत परंपरा के अमर कवि कबीर की वाणी का सार है। यह केवल प्रेम का वर्णन नहीं करता, बल्कि प्रेम की सच्ची परिभाषा प्रस्तुत करता है। कपास के उदाहरण के माध्यम से कबीर ने ऐसा आदर्श रखा है, जो त्याग, उपयोगिता और जीवनपर्यंत निष्ठा पर आधारित है।

जीवन और मृत्यु तक साथ

कपास जब तक खेत में रहती है, तब तक सौंदर्य बढ़ाती है। उससे धागा बनता है, वस्त्र बनते हैं और वह मनुष्य के तन को ढकती है। पर उसकी उपयोगिता यहीं समाप्त नहीं होती—मृत्यु के बाद वही कपास कफन बनकर अंतिम यात्रा में भी साथ देती है।
कबीर का संदेश स्पष्ट है—सच्चा प्रेम वही है जो स्वार्थरहित हो और जीवन के हर चरण में साथ निभाए।

संबंधों की बदलती परिभाषा

आज के दौर में कई रिश्ते सुविधा और लाभ-हानि के आधार पर टिके दिखाई देते हैं। सुख में निकटता और दुख में दूरी—यह प्रवृत्ति समाज में बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में ‘कपास’ जैसा प्रेम हमें स्थिरता और समर्पण का पाठ पढ़ाता है।
प्रेम केवल उत्सवों का साथी नहीं, बल्कि संघर्षों का सहारा भी होना चाहिए।

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कोमलता में शक्ति

कपास कोमल होती है, पर अत्यंत उपयोगी भी। ठीक वैसे ही प्रेम में कोमलता के साथ धैर्य, सहनशीलता और सेवा का भाव आवश्यक है। अहंकार, कठोरता और अपेक्षाओं का बोझ प्रेम को कमजोर कर देता है।
कबीर का संदेश है—प्रेम आचरण में दिखे, त्याग में झलके और निष्ठा में स्थिर रहे।

हर संबंध में लागू

यह दोहा पारिवारिक जीवन, मित्रता, दांपत्य और सामाजिक संबंधों पर समान रूप से लागू होता है। माता-पिता का स्नेह, सच्चे मित्र का साथ या जीवनसाथी का समर्पण—इन सभी में ‘कपास’ जैसा गुण होना चाहिए।
ऐसा प्रेम जो सहारा भी दे, संरक्षण भी करे और अंतिम क्षण तक साथ निभाए।

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बलिया में होली से पहले वेतन-पेंशन जारी, कर्मचारियों में खुशी

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। रंगों के महापर्व से पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बलिया जिले में कार्यरत सभी सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनरों के खातों में होली से पहले ही वेतन और पेंशन की राशि भेज दी गई है। इससे हजारों परिवारों को त्योहार से पहले आर्थिक संबल मिला है।

28 फरवरी तक भुगतान के निर्देश

वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद दुबे ने बताया कि शासन की ओर से स्पष्ट निर्देश थे कि 28 फरवरी तक हर हाल में वेतन और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। कोषागार विभाग ने समयबद्ध प्रक्रिया पूरी करते हुए सभी लाभार्थियों के खातों में धनराशि हस्तांतरित कर दी।

24 हजार पेंशनरों को 76 करोड़

जिले के करीब 24 हजार पेंशनभोगियों के खातों में लगभग 76 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। इसके अलावा लगभग 40 हजार सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी इस निर्णय से लाभान्वित हुए हैं।
कुल मिलाकर करीब 200 करोड़ रुपये सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए, जिससे किसी प्रकार की देरी या असुविधा की स्थिति नहीं बनी।

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सभी विभागों को मिला लाभ

वेतन पाने वालों में जिला प्रशासन के अधिकारी—डीएम, एसपी, सीडीओ, डीएफओ—के साथ स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर-कर्मचारी, शिक्षा विभाग के शिक्षक, पुलिस जवान, पीआरडी जवान और नगर निकायों के सफाईकर्मी शामिल हैं।

बाजारों में बढ़ेगी रौनक

त्योहार से पहले वेतन-पेंशन मिलने से स्थानीय बाजारों में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। व्यापारियों का मानना है कि समय से धनराशि मिलने से बाजार में रौनक आएगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
वरिष्ठ कोषाधिकारी ने होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि सभी नागरिक प्रसन्नचित रहें और सुरक्षित तरीके से पर्व मनाएं।

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मध्य पूर्व तनाव से बलिया के परिवार चिंतित, उड़ानें प्रभावित

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और अस्थिर हालात के बीच खाड़ी देशों में काम कर रहे पूर्वांचल के लोगों के परिवारों की चिंता गहराने लगी है। दुबई समेत कई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर उड़ानों के प्रभावित होने की खबरों ने यहां के परिजनों की बेचैनी बढ़ा दी है। गांव-गांव में लोग अपने रिश्तेदारों की कुशलक्षेम जानने के लिए लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।

उड़ानें प्रभावित, बढ़ी परेशानी

सूत्रों के अनुसार दुबई और आसपास के कई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन आंशिक रूप से बाधित है। अचानक टिकट रद्द होने, ट्रांजिट में यात्रियों के फंसने और वीज़ा अवधि समाप्त होने की आशंका ने प्रवासी श्रमिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

मऊ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत पूर्वांचल के कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय हालात की खबरों से स्थानीय स्तर पर चिंता का माहौल है।

गांवों में बढ़ी बेचैनी

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवारों के सदस्य दुबई, सऊदी अरब, कतर और ओमान में कार्यरत हैं। मोबाइल नेटवर्क की दिक्कत, समय अंतराल और उड़ानों में बाधा के कारण बात न हो पाने से परिजन व्याकुल हैं।
कुछ परिवारों ने प्रशासन से अपील की है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो सरकार सुरक्षित वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित करे।

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मानवीय पहल की जरूरत

ऐसे समय में स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से अपेक्षा की जा रही है कि वे प्रभावित परिवारों की मदद के लिए आगे आएं।
फंसे लोगों की सूची तैयार की जाए।
विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों से समन्वय स्थापित किया जाए।
जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन या सहायता शिविर शुरू किए जाएं।

अफवाहों से बचने की अपील

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों की जानकारी पर भरोसा करें। यदि किसी व्यक्ति से संपर्क नहीं हो पा रहा है, तो इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दें।
स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।

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रंगों में रची समरसता की संस्कृति: होली का व्यापक संदेश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। फाल्गुन की बयार के साथ जब रंगों की छटा बिखरती है, तो केवल चेहरे ही नहीं, मन भी रंगों में भीग उठते हैं। होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दृष्टि, सामाजिक समरसता और आस्था का प्रतीक है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हम पहले मनुष्य हैं—फिर जाति, वर्ग या विचारधारा से जुड़े।

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

धार्मिक परिप्रेक्ष्य में होली, होलिका दहन की परंपरा से जुड़ी है। पौराणिक कथा के अनुसार प्रह्लाद की अटूट भक्ति और सत्य के प्रति समर्पण ने अहंकार और अत्याचार का अंत किया। यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है—अन्याय के विरुद्ध सत्य की विजय शाश्वत है।

सामाजिक समरसता का संदेश

जब समाज में विभाजन की रेखाएं गहरी होती दिखती हैं, तब रंगों का यह पर्व विविधता में एकता का पाठ पढ़ाता है। अलग-अलग रंग मिलकर ही इंद्रधनुष बनाते हैं—ठीक वैसे ही समाज के विभिन्न वर्ग मिलकर ही समरसता की सुंदर तस्वीर गढ़ते हैं।
होली रिश्तों की बर्फ पिघलाने, मन के मैल धोने और संवाद के पुल बनाने का अवसर है।

आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व

होली का सामाजिक-आर्थिक पक्ष भी अहम है। बाजारों की रौनक, कारीगरों की बढ़ती आय और पारंपरिक मिठाइयों की तैयारी स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है। यह पर्व ग्रामीण और शहरी जीवन के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करता है।

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जिम्मेदारी और संवेदनशीलता जरूरी

उल्लास के बीच संयम भी आवश्यक है। रासायनिक रंगों के दुष्प्रभाव, जल की बर्बादी और पर्यावरण पर असर जैसी चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्राकृतिक रंगों का प्रयोग, जल संरक्षण और स्वच्छता का संकल्प ही आधुनिक और जिम्मेदार होली का प्रतीक होगा।

प्रेम और एकता का संकल्प

होली का मूल संदेश प्रेम, विश्वास और भाईचारा है। यदि हम नफरत की आग बुझाकर संवाद और सहयोग के रंग भरें, तो समाज की कई समस्याएं स्वतः हल हो सकती हैं।
रंगों का यह पर्व हमें जोड़ने आया है—आइए इसे केवल खेलें नहीं, बल्कि आत्मसात करें।

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महराजगंज के घुघली के लाल डॉ. अनोज यादव को पीएचडी, क्षेत्र में जश्न

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। नगर पंचायत घुघली के वार्ड नं. 8 श्याम नगर निवासी छोटेलाल यादव के पुत्र अनोज कुमार यादव ने शिक्षा जगत में बड़ी उपलब्धि हासिल कर जनपद का मान बढ़ाया है। उन्हें शारीरिक शिक्षा विषय में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उपलब्धि की खबर मिलते ही क्षेत्र में बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया।

योग और जीवनशैली पर अहम शोध

डॉ. अनोज कुमार यादव ने “सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के पेशेवरों के तनाव और जीवनशैली पर योगिक अभ्यासों का तुलनात्मक प्रभाव” विषय पर शोधकार्य पूरा किया। यह शोध प्रो. विजय चहल के निर्देशन में संपन्न हुआ।

अपने अध्ययन में उन्होंने पाया कि नियमित योगाभ्यास मानसिक तनाव कम करने, कार्यक्षमता बढ़ाने और संतुलित जीवनशैली विकसित करने में प्रभावी भूमिका निभाता है। उनका शोध आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों के बीच योग की उपयोगिता को वैज्ञानिक आधार देता है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित शोध

डॉ. यादव के दो शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल में तथा चार शोध पत्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि उनका शोध केवल डिग्री तक सीमित नहीं, बल्कि अकादमिक गुणवत्ता और गंभीर अध्ययन का प्रमाण है।

क्षेत्र में खुशी की लहर

उनकी सफलता पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि साधारण परिवार से निकलकर यह उपलब्धि हासिल करना युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
डॉ. अनोज यादव की यह सफलता न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे महराजगंज जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है।

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यूपी: ईरान हमले के बाद दुबई एयरस्पेस बंद, लखनऊ से 17 उड़ानें निरस्त

ईरान हमले के बाद दुबई का एयरस्पेस सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया, जिसका सीधा असर उत्तर प्रदेश की राजधानी के हवाई संचालन पर पड़ा। Chaudhary Charan Singh International Airport से खाड़ी देशों के लिए संचालित 17 उड़ानें शनिवार को निरस्त कर दी गईं।
सबसे अधिक प्रभावित उड़ानें IndiGo की रहीं, जबकि Air India और Star Air की सेवाओं पर भी असर पड़ा।

खाड़ी देशों की उड़ानें ठप

एयरस्पेस बंद होने के कारण दम्माम, मस्कट, रसअलखैमा, शारजाह और रियाद समेत सात गंतव्यों के लिए आने-जाने वाली उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
इंडिगो की कई सीधी और कनेक्टिंग फ्लाइट्स निरस्त रहीं, जिनमें दम्माम, रियाद, मस्कट और शारजाह रूट प्रमुख रहे। एयर इंडिया की एआई-2250 भी शनिवार को रद्द रही।

एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार स्थिति सामान्य होने तक खाड़ी रूट पर उड़ानों का संचालन प्रभावित रह सकता है।

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स्टार एयर की घरेलू उड़ानें भी रद्द

शनिवार को अमौसी एयरपोर्ट से किशनगढ़ और झारसुगड़ा के बीच संचालित Star Air की चार उड़ानें भी निरस्त कर दी गईं। हालांकि इन्हें परिचालन कारणों से रद्द बताया गया।

बंगलुरु-काठमांडू फ्लाइट लखनऊ डायवर्ट

खराब मौसम के चलते Air India Express की फ्लाइट आईएक्स-872, जो बंगलुरु से काठमांडू जा रही थी, उसे लखनऊ डायवर्ट किया गया। विमान में 180 यात्री सवार थे।

फ्लाइट काठमांडू में लैंड नहीं कर पाई और कई चक्कर लगाने के बाद उसे लखनऊ उतारा गया। इससे पहले भी यही विमान खराब मौसम के कारण वाराणसी डायवर्ट किया गया था।
यात्रियों और उनके परिजनों ने सुविधाओं की कमी को लेकर नाराजगी जताई और बंगलुरु एयरपोर्ट पर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रशासन अलर्ट मोड में

एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को अपनी-अपनी एयरलाइंस से संपर्क कर ताजा अपडेट लेने की सलाह दी है। अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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सर्वाइकल कैंसर से बचाव की दिशा में बड़ा कदम, देवरिया में एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l सर्वाइकल (गर्भाशय) कैंसर की रोकथाम की दिशा में प्रदेश में शनिवार से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई। देवरिया में महर्षि देवरहवा बाबा मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े और इस महत्वपूर्ण पहल में सहभागिता की।

सदर विधायक डॉ शलभ मणि त्रिपाठी ने बताया कि देवरिया एचपीवी टीकाकरण अभियान 2026 के अंतर्गत 14–15 वर्ष की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन की एकल डोज दी जाएगी। उन्होंने इसे महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में अहम पहल बताया और अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को इस अभियान का लाभ अवश्य दिलाएं।

प्रदेशव्यापी अभियान का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के अजमेर से किया, जबकि लखनऊ में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। देवरिया में स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने वर्चुअल रूप से इस राज्यव्यापी अभियान से जुड़कर सहभागिता की।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ अनिल कुमार गुप्ता ने जानकारी दी कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है और कुल महिला कैंसर मामलों में इसका प्रतिशत लगभग 22.86 है। उन्होंने कहा कि नए मामलों और मृत्यु दर में बढ़ोतरी चिंताजनक है, लेकिन राहत की बात यह है कि यह उन चुनिंदा कैंसरों में शामिल है जिनकी रोकथाम टीकाकरण से संभव है। एचपीवी वैक्सीन संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है और भविष्य में कैंसर की संभावना घटाती है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार 14 वर्ष की किशोरियों को गार्डासिल-4 टीके की एकल डोज दी जाएगी। देवरिया एचपीवी टीकाकरण अभियान 2026 के तहत यह वैक्सीन तीन माह तक प्रतिदिन उपलब्ध रहेगी, इसके बाद इसे नियमित टीकाकरण सत्रों में शामिल किया जाएगा। आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में यह टीका निःशुल्क लगाया जाएगा। टीकाकरण के लिए अभिभावकों की सहमति अनिवार्य होगी।

मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ रजनी ने इसे महिला स्वास्थ्य सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ एसके सिन्हा, सीएमएस डॉ एचके मिश्रा, डिप्टी सीएमओ डॉ अश्वनी, डॉ आरपी यादव, डीसीपीएम राजेश गुप्ता सहित कई चिकित्सक और स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि एचपीवी एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्यतः यौन संपर्क से फैलता है और लंबे समय तक शरीर में रहने पर सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है। किशोरावस्था में दी गई वैक्सीन अधिक प्रभावी होती है और संक्रमण के प्रसार को भी कम करती है। अभियान के तहत विद्यालयों और समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे, ताकि भ्रांतियों को दूर कर अधिक से अधिक किशोरियों को लाभान्वित किया जा सके।

देवरिया एचपीवी टीकाकरण अभियान 2026 को महिला स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि लक्षित वर्ग का व्यापक टीकाकरण सुनिश्चित हुआ, तो आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।

श्रीअन्न से पोषण और समृद्धि की ओर बढ़ता मऊ, मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम 2026 को मिल रहा जनसमर्थन

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश में पोषण सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम 2026 तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस पहल के तहत श्रीअन्न—जैसे बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो और सावा—को सुपर फूड के रूप में स्थापित करने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जा रहा है।

उप कृषि निदेशक ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा विशेष रूप से तैयार एलईडी वैन के माध्यम से शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को श्रीअन्न के पोषण, स्वास्थ्य लाभ और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य किसानों और आमजन को श्रीअन्न की खेती एवं उपभोग के लिए प्रेरित करना है, ताकि यह अनाज एक बार फिर दैनिक आहार का हिस्सा बन सके।

विशेषज्ञों के अनुसार बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य मिलेट्स कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये अनाज मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप और पाचन संबंधी समस्याओं से बचाव में सहायक माने जाते हैं। उच्च फाइबर रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जबकि आयरन और कैल्शियम शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं। बदलती जीवनशैली और बढ़ती गैर-संचारी बीमारियों के बीच श्रीअन्न का नियमित सेवन स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य किसानों को कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करना भी है। श्रीअन्न की फसलें कम पानी में आसानी से उगाई जा सकती हैं और विपरीत जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देती हैं। इनकी खेती में उर्वरकों और कीटनाशकों की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे लागत घटती है और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जलवायु परिवर्तन के दौर में ये फसलें किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बन रही हैं।

मऊ जनपद में तीन प्रमुख स्थानों पर एलईडी वाहन के माध्यम से लघु फिल्में, लोकगीत, विज्ञापन और डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गईं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों ने मिलेट्स से जुड़े संदेशों को रुचिपूर्वक देखा और समझा। इस आधुनिक प्रचार पद्धति से युवाओं और महिलाओं में विशेष जागरूकता देखने को मिली है।

कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक संपूर्ण सहयोग प्रदान किया जा रहा है। मिलेट्स बीज मिनीकिट का निःशुल्क वितरण, प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर अनुदान, मोबाइल आउटलेट के लिए वित्तीय सहायता, मिलेट्स स्टोर स्थापना पर अनुदान, प्रेरणा कैंटीन के लिए सहायता तथा प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को श्रीअन्न की खेती से अधिक आय अर्जित करने के लिए सक्षम बनाना है।

विश्व स्तर पर मिलेट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और जैविक खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता ने श्रीअन्न को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाई है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के किसान इस बढ़ती मांग का लाभ उठाएं और निर्यात के अवसरों का भी उपयोग करें, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

विशेषज्ञों का मानना है कि मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम 2026 केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भोजन कार्यक्रमों में श्रीअन्न को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बच्चों और महिलाओं को संतुलित आहार मिल सके।

उप कृषि निदेशक ने अपील की है कि किसान और आमजन श्रीअन्न को अपने दैनिक आहार में शामिल करें तथा इसकी खेती को बढ़ावा दें। जनभागीदारी से ही यह अभियान सफल होगा और प्रदेश को पोषण, पर्यावरण तथा आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने का लक्ष्य साकार हो सकेगा।

तरकुलवा में अवैध कच्ची शराब पर बड़ी कार्रवाई, 7 गिरफ्तार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना तरकुलवा पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम कोन्हवलिया में छापेमारी कर 45 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की। कार्रवाई के दौरान 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया तथा लगभग 600 किलोग्राम लहन मौके पर नष्ट किया गया।

यह अभियान पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में संचालित किया गया। अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) की निगरानी और क्षेत्राधिकारी नगर के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

मुखबिर की सूचना पर की गई दबिश में 9 प्लास्टिक पिपियों में भरी 45 लीटर अवैध शराब बरामद हुई। चार महिलाओं को 20 लीटर और तीन पुरुष अभियुक्तों को 25 लीटर अवैध शराब के साथ गिरफ्तार किया गया। सभी अभियुक्त ग्राम कोन्हवलिया, थाना तरकुलवा के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने मु0अ0सं0 56/2026 एवं 57/2026 के तहत धारा 60 आबकारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्यवाही शुरू कर दी है।

छापेमारी के दौरान शराब निर्माण में प्रयुक्त लगभग 600 किलोग्राम लहन भी बरामद हुआ, जिसे मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार इससे अवैध शराब निर्माण की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है।

अभियान में थाना प्रभारी तरकुलवा भूपेन्द्र सिंह सहित पुलिस बल और आबकारी विभाग की टीम शामिल रही। संयुक्त टीम ने गांव में घेराबंदी कर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की, जिससे किसी भी अभियुक्त को फरार होने का अवसर नहीं मिला।

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब के निष्कर्षण, भंडारण और बिक्री में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि अवैध गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दें, उनकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

आयुष्मान भारत योजना में शत-प्रतिशत लक्ष्य का निर्देश, 15 मार्च तक कार्ड निर्माण पूरा करने की समयसीमा

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और योजनाओं की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकास भवन सभागार में स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव ने की। विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा के दौरान लंबित कार्यों पर असंतोष व्यक्त करते हुए समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए गए।

बैठक में आयुष्मान भारत योजना की प्रगति की विशेष समीक्षा की गई। पात्र लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड निर्माण की स्थिति अपेक्षित स्तर पर न मिलने पर 15 मार्च तक शत-प्रतिशत कार्ड तैयार करने के निर्देश दिए गए। समीक्षा में लगभग 6 लाख पात्र लाभार्थियों के कार्ड लंबित पाए गए, जिस पर कड़ी नाराजगी जताई गई। ब्लॉक स्तर पर विशेष अभियान चलाकर ग्राम पंचायतों में कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जन औषधि केंद्रों की स्थापना की धीमी प्रगति पर भी नाराजगी व्यक्त की गई और दो दिन में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। सस्ती दवाओं की उपलब्धता को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए इसमें देरी न करने के निर्देश दिए गए।

संस्थागत प्रसव, गर्भवती महिलाओं के समयबद्ध पंजीकरण और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया। मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की समीक्षा कर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए लंबित भुगतान तत्काल जारी करने को कहा गया।

राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने, छूटे हुए बच्चों की पहचान कर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। विशेष परिवार नियोजन अभियान की उपलब्धियों की समीक्षा कर नसबंदी, अंतरा इंजेक्शन सहित अन्य उपायों की उपलब्धता और जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया गया।

एईएस/जेई नियंत्रण कार्यक्रम, टीबी मुक्त भारत अभियान तथा कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति पर भी चर्चा हुई। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता और व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े निर्माण कार्यों को समयसीमा में पूर्ण करने और रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए। रेफर मरीजों, डेथ ऑडिट रिपोर्ट और प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

बैठक के अंत में मुख्य विकास अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।