Tuesday, May 5, 2026
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लगातार भूकंप: क्या बड़ा झटका आने वाला है?

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उत्तर बंगाल–सिक्किम में लगातार भूकंप: 4 दिनों में 39 झटके, बड़े खतरे की चेतावनी


कोलकाता/सिलीगुड़ी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।पश्चिम बंगाल और सिक्किम में पिछले चार दिनों से लगातार भूकंप के झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार से मंगलवार सुबह तक कुल 39 बार भूकंप महसूस किए गए। इन झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3 से 4 के बीच दर्ज की गई है। भले ही तीव्रता कम रही हो, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार भूकंपीय गतिविधि किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकती है।
भूकंप का केंद्र भले ही सिक्किम रहा हो, लेकिन इसका असर उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों में भी साफ तौर पर महसूस किया गया। खासकर सिलीगुड़ी में लोगों का कहना है कि शुक्रवार देर रात पहला झटका आने के बाद महज चार घंटे 12 मिनट के भीतर 12 बार धरती कांपी। मंगलवार सुबह भी नामची और मंगान क्षेत्रों में झटके महसूस किए गए।

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विशेषज्ञों की चेतावनी: ‘फोरशॉक’ हो सकते हैं संकेत
भूगर्भ विशेषज्ञ डॉ. संदीप बनर्जी के अनुसार, यह गतिविधि तथाकथित ‘चौथे झटके’ (Foreshock Sequence) का संकेत हो सकती है, जो कभी-कभी बड़े भूकंप से पहले देखी जाती है। उन्होंने बताया कि ये झटके टिड्डियों के झुंड की तरह एक साथ आते हैं, जो भूगर्भीय तनाव के बढ़ने का संकेत देते हैं।
विशेषज्ञ इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि कहीं इन झटकों के पीछे जलाशयों का निर्माण, पहाड़ी सड़कों का विस्तार, रेलवे सुरंगों के लिए डायनामाइट का उपयोग या अन्य मानवीय गतिविधियां तो जिम्मेदार नहीं हैं। हिमालयी क्षेत्र पहले से ही भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।

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सिक्किम सरकार अलर्ट, बंगाल में भी डर
लगातार झटकों के बाद सिक्किम आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को सतर्क रहने, खुले और सुरक्षित स्थानों की पहचान करने तथा आपात स्थिति में घबराने से बचने की सलाह दी है। चूंकि सिक्किम और उत्तर बंगाल की सीमा आपस में जुड़ी हुई है, इसलिए अगर वहां कोई बड़ा भूकंप आता है, तो उसका असर बंगाल में भी पड़ना तय माना जा रहा है।

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पर्यटन क्षेत्र पर भी असर
उत्तर बंगाल और सिक्किम पर्यटन के बड़े केंद्र हैं, जहां साल भर देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में लगातार भूकंप की खबरों से पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों में डर का माहौल है।

बिहार विधानसभा में गूंजी अस्पतालों की बदहाली, मैथिली ठाकुर का तीखा सवाल

बिहार (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई। इस बार यह मुद्दा युवा विधायक और प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने पूरे जोर-शोर से उठाया। प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के सरकारी अस्पताल की जर्जर हालत को लेकर सरकार के लिखित जवाब पर गंभीर सवाल खड़े किए।

मैथिली ठाकुर ने कहा कि कागजों पर हालात भले ही बेहतर दिखाए जा रहे हों, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने सदन को बताया कि अस्पताल की इमारत बेहद जर्जर अवस्था में है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। छत से प्लास्टर गिरना, दीवारों में गहरी दरारें और बरसात के मौसम में वार्डों में पानी टपकना आम बात हो चुकी है।

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इसी खतरनाक इमारत में मरीजों का इलाज किया जा रहा है, गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया जाता है और छोटे बच्चों को भी रखा जाता है, जो लोगों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।
सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब पर असंतोष जताते हुए विधायक ने कहा, “मैं इस जवाब से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हूं। इसमें कहा गया है कि इमारत सिर्फ मरम्मत योग्य है, लेकिन मैंने खुद मौके पर जाकर हालात देखे हैं।”

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मैथिली ठाकुर ने यह भी बताया कि अस्पताल में फिलहाल एक छोटे से कमरे में स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जा रही हैं और वहां एक भी एमबीबीएस डॉक्टर तैनात नहीं है। पहले दो डॉक्टर थे, लेकिन अब दोनों पद खाली हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब हर साल स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी हो रही है, तो फिर अस्पतालों की स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा। डॉक्टरों और दवाओं की कमी के साथ-साथ जर्जर भवनों को उन्होंने सबसे बड़ा खतरा बताया।

स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है। कई अस्पतालों के लिए नई इमारतों को मंजूरी दी जा चुकी है और कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य भी चल रहा है। साथ ही अत्यधिक जर्जर भवनों की पहचान कर मरम्मत की योजना बनाई गई है।
हालांकि, इस जवाब से मैथिली ठाकुर संतुष्ट नजर नहीं आईं। उन्होंने कहा कि उनका अस्पताल कई वर्षों से सूची में है, लेकिन अब तक न मरम्मत शुरू हुई और न ही नई इमारत का निर्माण हुआ।

इस मुद्दे पर बार-बार सवाल उठने से सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया। विपक्षी विधायकों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया, जबकि सत्ताधारी पक्ष असहज नजर आया। पहली बार विधानसभा में बोल रहीं मैथिली ठाकुर की इस मुखरता ने सत्र में अलग पहचान बना दी।

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शिव भक्ति साहित्य में नया आयाम: आदित्य–शिव स्तुति

आदित्य–शिव स्तुति: महादेव की दिव्य आराधना में ओतप्रोत काव्य
लेखक: डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

🔱 भूमिका
आदित्य–शिव स्तुति भगवान शिव के सगुण-निर्गुण स्वरूप, उनके महाकाल रूप, औंकार तत्व और कैलासवासी भोलेनाथ की महिमा का काव्यात्मक वर्णन है। यह रचना शिव-भक्ति, वेदांत और शैव दर्शन को समाहित करती हुई पाठक को आध्यात्मिक शांति और चेतना के उच्च स्तर तक ले जाती है।
🕉️ आदित्य–शिव स्तुति
शिव ॐकार, शिव चंद्रभाल,
शिव महादेव, शिव व्याघ्रछाल।
शिव महाकाल, शिव नीलकंठ,
शिव त्रिशूलधर, शिव भोकराल।
स्वरूप सुंदर सत्य शिव ॐ का,
जटा जूट घटा सुव्योम की।
किरीट शीश सोम चंद्रभाल का,
बहती रहे सुधारधार श्रीगंग की।
त्रिनेत्र नेत्र तीसरा ललाटभाल,
प्रदीप्त अग्नि दग्ध शिखा।
गले भुजंगमाल शेषनाग की,
फुफकार मार गले झुलते दिखा।
अक्षमाल, नरमुण्डमाल संग,
त्रिशूल-डमरु शोभित हाथ में।
गौरी गणेश कार्तिकेय संग,
शंभु विराजें विश्वनाथ में।
सुरेश महेश भवेश भस्म अंग,
तांडव लपेटे व्याघ्र चर्म।
काल भी डोले, कामदेव थर,
अकाल काल शंभु परम।
सोमनाथ, ॐकारनाथ, अमरनाथ,
केदारनाथ, तुंगनाथ।
महाकाल भोले भुआल आप,
नाममि ईश, हे भोलेनाथ।
चिदानंद, सच्चिदानंद रूप,
तुषाराद्रि गौर काया।
गंगाधर, सुर-नर-मुनि वंदित,
महेश हृदय सुखदाया।
गवेंद्राधिरूढ़ शिव भूषणांग,
दिव्यांबर, मन्दारमाल।
नमस्ते ओंकारनाथ प्रभु,
भुजविशाल, करुणाल।
प्रातः स्मरामि भवभयहर,
विश्वविजित, सर्वलोकेश।
संसार रोगहर महाऔषध,
अद्वितीय, महेश।
निराकार ॐकार निशीथनाथ,
कैलाशपति, गिरीश।
आदि-अंत, आदित्यनाथ आप,
कलातीत, कल्याण ईश।

मथुरा में सामूहिक आत्महत्या: पति-पत्नी और 3 बच्चों की मौत

मथुरा/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक ही परिवार के पांच लोगों ने एक साथ आत्महत्या कर ली। पति-पत्नी और उनके तीन मासूम बच्चों के शव घर के अंदर मिले हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सभी ने जहर खाकर अपनी जान दी।

घटना की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।

दूध में जहर मिलाकर पीने की आशंका

अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार रात (9 फरवरी) की बताई जा रही है। आशंका है कि परिवार के सभी सदस्यों ने दूध में जहर मिलाकर सेवन किया। मंगलवार सुबह जब काफी देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई।

दरवाजा खटखटाने के बावजूद अंदर से कोई जवाब नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। जब पुलिस ने घर में प्रवेश किया, तो वहां का दृश्य देखकर सभी सन्न रह गए।

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पहले बच्चों को, फिर खुद दी जान

स्थानीय लोगों के अनुसार, किसी गंभीर परेशानी से जूझ रहे पति-पत्नी ने पहले अपने तीनों बच्चों को जहर दिया और उसके बाद खुद भी आत्महत्या कर ली। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

आत्महत्या की वजह की जांच में जुटी पुलिस

यह मामला थाना महावन क्षेत्र के गांव खप्परपुर का है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दंपती ने इतना बड़ा और खौफनाक कदम क्यों उठाया। आर्थिक तंगी, कर्ज, पारिवारिक कलह या किसी अन्य दबाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

पुलिस परिवार के रिश्तेदारों और गांव के लोगों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।

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संत कबीर नगर: गौ रक्षा के लिए बलिदान देने वाले वीरों की स्मृति, उपेक्षा का शिकार बीरा बाबा समाधि स्थल

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नगर पंचायत धर्मसिंहवा क्षेत्र के मेंहदूपार गांव में स्थित बीरा बाबा समाधि स्थल को लेकर संरक्षण की मांग एक बार फिर उठी है। यह स्थल न केवल जनआस्था का केंद्र है, बल्कि गौ रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीरों के बलिदान का ऐतिहासिक प्रतीक भी है। इस संबंध में सेवानिवृत्त जज आरपी पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर समाधि स्थल के संरक्षण और अनुरक्षण की मांग की है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि ब्रिटिश शासन काल के दौरान गौ रक्षा के संघर्ष में बीरा सहित चार भाइयों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। मान्यता है कि बीरा बाबा आज भी जागृत ब्रह्मस्थान के रूप में प्रतिष्ठित हैं और यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इसके बावजूद यह ऐतिहासिक स्थल आज भी सरकारी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।

आरपी पांडेय ने पत्र में बताया कि वर्ष 1850 से 1857 के बीच अंग्रेजों द्वारा कारतूसों में चर्बी के प्रयोग और गोवंश वध के दबाव को लेकर व्यापक असंतोष फैला हुआ था। उसी दौर में तत्कालीन बस्ती जिले के मेंहदूपार गांव निवासी चक्रपाणि शुक्ला के पुत्र बीरा, मोहन, रामा और टीकाराम ने गोवंश की रक्षा को सर्वोपरि मानते हुए संघर्ष का मार्ग चुना।

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चारों भाइयों ने गांव के पास बिरवा स्थान पर गौशाला की स्थापना कर गोवंशीय पशुओं का संरक्षण शुरू किया। इसकी जानकारी मिलते ही अंग्रेजी हुकूमत ने सैन्य टुकड़ी भेजी। संघर्ष के दौरान चारों भाइयों ने वीरगति प्राप्त की। उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार ग्रामीणों ने उन्हें गांव में ही भू-समाधि दी, जो आज बीरा बाबा समाधि स्थल के रूप में जानी जाती है।

पूर्व जज ने चिंता जताई कि इस ऐतिहासिक बलिदान को अब तक इतिहासकारों द्वारा उचित स्थान नहीं मिल सका, जिससे यह घटना इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि यदि पर्यटन विभाग द्वारा बीरा बाबा समाधि स्थल का संरक्षण कराया जाए तो यह सामाजिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक गौरव को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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लोकतंत्र, जनस्वास्थ्य और फेक न्यूज: 2026 की निर्णायक जंग

डिजिटल युग में अफवाहें, पेड प्रमोशन और डर आधारित मार्केटिंग: लोकतंत्र,

गोंदिया
इक्कीसवीं सदी का डिजिटल युग सूचना की अभूतपूर्व शक्ति लेकर आया है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स ने दुनिया को जोड़ा है, लेकिन इसके साथ ही अफवाहों और फेक न्यूज का संकट भी तेजी से बढ़ा है। आज यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र, जनस्वास्थ्य, सामाजिक सौहार्द और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।
मैं, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी (गोंदिया, महाराष्ट्र), यह मानता हूँ कि अफवाहों का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि वे सच का रूप धारण कर लेती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल सामग्री डर, नफरत और पूर्वाग्रह को बढ़ाती है, जिससे समाज का ताना-बाना कमजोर होता है।

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डिजिटल युग में अफवाहें: समाज और लोकतंत्र पर सीधा हमला
भारत जैसे विविधता-पूर्ण देश में भाषा, धर्म, जाति और राजनीतिक मतभेद पहले से मौजूद हैं। ऐसे में अफवाहें सामाजिक तनाव, सांप्रदायिक हिंसा और अविश्वास को जन्म देती हैं।
बीते वर्षों में व्हाट्सएप संदेशों और सोशल मीडिया पोस्ट के कारण भीड़ हिंसा, लिंचिंग और दंगे हुए, जो यह सिद्ध करता है कि फेक न्यूज अब केवल सूचना की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का संकट बन चुकी है।
वैश्विक स्तर पर भी अफवाहों ने नस्लीय तनाव, युद्ध जैसी स्थितियों और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित किया है।

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डिजिटल युग में मिसिंग पर्सन्स की अफवाहें: भय बनाम तथ्य
हाल के समय में मुंबई और दिल्ली में मिसिंग पर्सन्स को लेकर फैली अफवाहें इसका बड़ा उदाहरण हैं।
दिल्ली में 2026 के शुरुआती दिनों में 800 से अधिक लोगों के लापता होने का दावा किया गया, जो सुनने में भयावह लगा।

लेकिन जब आँकड़ों का विश्लेषण किया गया तो सामने आया कि:
अधिकांश मामले पारिवारिक विवाद, स्वेच्छा से घर छोड़ने, परीक्षा या करियर तनाव, प्रेम संबंध या गलत रिपोर्टिंग से जुड़े थे
दिल्ली में रिकवरी रेट लगभग 77% है
यह आँकड़ा अंतरराष्ट्रीय महानगरों की तुलना में बेहतर है
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मौजूदा आँकड़े पिछले वर्षों के औसत से भिन्न नहीं हैं। अफवाहों पर कानूनी सख्ती की चेतावनी के बाद ही माहौल शांत हुआ।
यह दर्शाता है कि अफवाहें वास्तविक संकट से अधिक डिजिटल रूप से निर्मित सामाजिक भय पैदा करती हैं।

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लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर फेक न्यूज का खतरा
चुनावों के दौरान फेक न्यूज मतदाताओं की सोच को प्रभावित करती है, उम्मीदवारों की छवि बिगाड़ती है और निष्पक्ष चुनाव पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
भारत सहित कई देशों में चुनावों के समय संगठित फेक न्यूज अभियानों और विदेशी हस्तक्षेप के प्रमाण सामने आए हैं।
यदि लोकतंत्र को सुरक्षित रखना है, तो फेक न्यूज को केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अनदेखा नहीं किया जा सकता।
जनस्वास्थ्य और अफवाहें: जानलेवा परिणाम

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कोविड-19 महामारी के दौरान पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे झूठी सूचनाओं ने:
वैक्सीन को लेकर डर फैलाया
खतरनाक घरेलू नुस्खों को बढ़ावा दिया
स्वास्थ्य प्रणालियों पर अविश्वास पैदा किया
भारत सहित कई देशों में अफवाहों के कारण लोगों ने समय पर इलाज नहीं कराया, जिससे जान-माल की भारी क्षति हुई। जब अफवाहें जीवन और मृत्यु का प्रश्न बन जाएँ, तब उन्हें रोकना कानूनी आवश्यकता बन जाती है।

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पेड प्रमोशन और डर आधारित मार्केटिंग स्ट्रेटेजी
आज अफवाहों के पीछे केवल अज्ञानता नहीं, बल्कि व्यावसायिक हित भी काम कर रहे हैं।
कई सोशल मीडिया पेज, चैनल और इन्फ्लुएंसर्स जानबूझकर डरावनी सामग्री फैलाते हैं क्योंकि:व्यूज और एंगेजमेंट बढ़ता है।पेड प्रमोशन और ब्रांड डील्स मिलती हैं।डर को उत्पाद की तरह बेचा जाता है।यह एक नई डर आधारित मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है, जो समाज की असुरक्षा का व्यावसायिक दोहन करती है।
मौजूदा कानून क्यों अपर्याप्त हैं?
भारत में आईटी एक्ट, भारतीय न्याय संहिता और अन्य कानूनों में कुछ प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन वे:विशिष्ट नहीं हैं,डिजिटल प्लेटफॉर्म की गति और पैमाने को ध्यान में रखकर नहीं बने,एल्गोरिदम आधारित कंटेंट प्रमोशन को नियंत्रित नहीं करते,इसीलिए एक विशेष और सख्त कानून की आवश्यकता है।

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फेक न्यूज एक्ट 2026: समय की मांग– फेक न्यूज एक्ट 2026 में यह स्पष्ट होना चाहिए कि:अफवाह, फेक न्यूज और भ्रामक सूचना की परिभाषा क्या है।जानबूझकर झूठी सूचना फैलाने पर सख्त दंड। डिजिटल प्लेटफॉर्म की कानूनी जिम्मेदारी तय हो। फॉरवर्ड लिमिट और कंटेंट मॉडरेशन बाध्यकारी बने।डिजिटल और मीडिया साक्षरता: सबसे मजबूत ढाल।केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है।स्कूल, कॉलेज और सामुदायिक स्तर पर यह सिखाना जरूरी है कि:खबर की सत्यता कैसे जाँची जाए
स्रोत की विश्वसनीयता कैसे परखी जाए।भावनात्मक और डर फैलाने वाली सामग्री से कैसे बचा जाए।जागरूक नागरिक ही अफवाहों के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता
फेक न्यूज की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती।संयुक्त राष्ट्र, जी-20 जैसे मंचों पर साझा मानक, सूचना साझाकरण और संयुक्त नियामक ढाँचे की आवश्यकता है, ताकि वैश्विक स्तर पर इस संकट से निपटा जा सके।
निष्कर्ष
अफवाहें आज एक मौन लेकिन शक्तिशाली हथियार बन चुकी हैं, जो लोकतंत्र, जनस्वास्थ्य और सामाजिक सौहार्द को कमजोर कर रही हैं।
भारत सहित पूरी दुनिया को स्वीकार करना होगा कि मौजूदा कानूनी ढाँचे अपर्याप्त हैं।
फेक न्यूज एक्ट 2026, मजबूत प्लेटफॉर्म नियमन और व्यापक जन-जागरूकता—इन तीनों के समन्वय से ही इस संकट पर नियंत्रण संभव है।
यदि आज निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो सूचना की आज़ादी का यह युग समाज के लिए सबसे बड़ा संकट बन सकता है।

संकलनकर्ता / लेखक
कर विशेषज्ञ स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि, संगीत माध्यमा, सीए (एटीसी)
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया, महाराष्ट्र

रात के अंधेरे में सक्रिय चोर, सलेमपुर स्टेशन से दो बाइक चोरी

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जनपद के सलेमपुर रेलवे स्टेशन परिसर में रविवार रात चोरों ने बेखौफ होकर दो अलग-अलग मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया। महज एक घंटे के भीतर हुई इन वारदातों से स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों व स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

पहली चोरी की घटना शाम करीब 7 बजे की है। ग्राम धुरिहट (पोस्ट कसीली) निवासी रवि ठाकुर पुत्र विजय बहादुर ठाकुर अपनी स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल स्टेशन परिसर में खड़ी कर कुछ देर के लिए हटे थे। लौटने पर बाइक मौके से गायब मिली।

इसके कुछ समय बाद रात करीब 8:15 बजे दूसरी चोरी की घटना सामने आई। भठवा तिवारी निवासी इरसाद अंसारी पुत्र सरताज अंसारी की सुपर स्प्लेंडर मोटरसाइकिल भी स्टेशन परिसर से चोरी हो गई। लगातार दो घटनाओं से स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में हड़कंप मच गया।

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दोनों पीड़ितों ने सलेमपुर कोतवाली में लिखित तहरीर देकर अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्रवाई और चोरी गई मोटरसाइकिलों की शीघ्र बरामदगी की मांग की है।

रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थल से एक ही रात में दो मोटरसाइकिलों की चोरी ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेशन क्षेत्र में चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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UGC अधिसूचना पर घमासान: नौतनवां तहसील में सवर्ण समाज का उग्र प्रदर्शन

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। UGC की हालिया अधिसूचना को लेकर जिले में विरोध तेज हो गया है। सोमवार को सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने संयुक्त रूप से नौतनवां तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अधिसूचना को तत्काल वापस लेने की मांग की और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार करण सिंह को सौंपा।

प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में तहसील पहुंचे और उपजिलाधिकारी कार्यालय के बाहर सभा का आयोजन किया। सभा को संबोधित करते हुए अखिल क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री रणवीर सिंह, अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के जिला उपाध्यक्ष श्रीनाथ धर दुबे और गोरखपुर मंडल संरक्षक शंभू सिंह श्रीनेत ने कहा कि 13 जनवरी 2026 को लागू की गई यूजीसी अधिसूचना शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन पैदा कर सकती है।

वक्ताओं का आरोप था कि यह अधिसूचना सवर्ण वर्ग के छात्रों के भविष्य को प्रभावित करेगी और समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है। नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिसूचना पर लगाई गई अंतरिम रोक का स्वागत करते हुए कहा कि यह न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, लेकिन जब तक अधिसूचना पूरी तरह वापस नहीं ली जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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आंदोलन तेज करने की चेतावनी

सवर्ण समाज के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो जिला, मंडल और राष्ट्रीय स्तर पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। इसी क्रम में 8 मार्च 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया गया।

प्रदर्शन में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे। अंत में प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर उसे उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

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Epstein Files: मार्क जुकरबर्ग और एलन मस्क की डिनर पार्टी फोटो से मचा बवाल

Epstein Files: एपस्टीन फाइल्स से जुड़े ताज़ा खुलासों ने एक बार फिर दुनिया भर में घमासान मचा दिया है। जेफरी एपस्टीन से संबंधित नई फाइलों में सामने आई एक तस्वीर ने वैश्विक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। इस फोटो में मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और टेस्ला प्रमुख एलन मस्क को यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ कैलिफोर्निया में आयोजित एक भव्य डिनर पार्टी में साथ देखा गया है।

एपस्टीन ने वर्ष 2015 में इस डिनर पार्टी से जुड़ी तस्वीर को खुद ई-मेल के जरिए साझा किया था। तस्वीर में एक डाइनिंग टेबल पर एलन मस्क और मार्क जुकरबर्ग आमने-सामने बैठे नजर आ रहे हैं। एपस्टीन ने इस पार्टी को अपने ई-मेल में “शानदार” और “बेहद रोमांचक” बताया था।

कई बड़ी हस्तियों के नाम सामने

ई-मेल्स के अनुसार, इस कथित डिनर पार्टी में लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन और पेपैल के को-फाउंडर पीटर थिएल के शामिल होने का भी जिक्र किया गया है। एपस्टीन ने 2 अगस्त को सीबीएस न्यूज के कर्मचारी पीटर एटिया को भेजे एक मेल में लिखा था,
“आज रात मस्क, थील और ज़करबर्ग के साथ डिनर है।”
बता दें कि पीटर एटिया का नाम भी अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी नए दस्तावेजों में सामने आया है।

एलन मस्क का बयान

एलन मस्क ने कुछ सप्ताह पहले स्पष्ट किया था कि वह कभी भी एपस्टीन की किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए। उन्होंने यह भी कहा था कि एपस्टीन के साथ जघन्य अपराध करने वालों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

31 जनवरी को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मस्क ने लिखा,
“न्याय की कसौटी फाइलें जारी करना नहीं, बल्कि एपस्टीन के साथ अपराध करने वालों पर मुकदमा चलाना है।”

दोषी ठहराए जाने के बाद भी संपर्क

एपस्टीन फाइल्स के ताजा दस्तावेजों से यह भी सामने आया है कि 2008 में नाबालिगों की वेश्यावृत्ति से जुड़े तस्करी मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद भी एपस्टीन के कई बड़ी हस्तियों से संबंध बने रहे। हालांकि, इन दस्तावेजों में यह साबित नहीं होता कि ये हस्तियां उसके यौन अपराधों या तस्करी में शामिल थीं।

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ई-मेल में पार्टी का बखान

20 अगस्त 2015 को एपस्टीन ने इलिनोइस के गवर्नर जेबी प्रिट्ज़कर के चचेरे भाई टॉम प्रिट्ज़कर को भेजे एक ई-मेल में इस डिनर पार्टी का जिक्र किया था। मेल में उसने लिखा,
“मैंने Zuckerberg, Musk, Thiel, Hoffman के साथ डिनर किया, जो बेहद रोमांचक था।”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस डिनर पार्टी की जानकारी सबसे पहले वैनिटी फेयर ने वर्ष 2019 में प्रकाशित की थी।

रीड हॉफमैन ने रखा अपना पक्ष

लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन ने एपस्टीन और उसके अपराधों में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। हालांकि उन्होंने एपस्टीन से मुलाकात की बात स्वीकार की और इस पर खेद जताया।
हॉफमैन ने कहा कि ये मुलाकातें केवल एमआईटी के साथ फंड जुटाने से संबंधित थीं।

उन्होंने ट्वीट में लिखा,
“मैं जेफरी एपस्टीन को केवल एमआईटी के लिए फंड जुटाने के संबंध में जानता था, जिसका मुझे बहुत अफसोस है। एपस्टीन के घृणित कृत्यों के पीड़ितों को पूरी सच्चाई जानने का अधिकार है।”

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भारत के दोस्त ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, दवाओं पर पूरी तरह लगाई रोक

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। पाकिस्तान को आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। अफगानिस्तान में सत्ता संभाल रहे तालिबान शासन ने पाकिस्तान से दवाओं के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। अफगानिस्तान के वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करते हुए व्यापारियों को पाकिस्तान के बजाय अन्य देशों से वैकल्पिक व्यापारिक रास्ते तलाशने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले को क्षेत्रीय राजनीति में भारत के लिए फायदेमंद कदम के रूप में देखा जा रहा है।

पाकिस्तान से दवाओं पर क्यों लगी रोक?

अफगान मीडिया रिपोर्ट टोलो न्यूज के मुताबिक, अफगानिस्तान के वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में दवाओं की तस्करी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। तस्करी के जरिए लाई गई दवाओं को जब्त कर नष्ट किया जाएगा और अवैध मार्गों से होने वाली सप्लाई पर पूरी तरह रोक लगेगी।

अफगानिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इन्वेस्टमेंट का मानना है कि इस फैसले से कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। इनमें घरेलू दवा उद्योग को बढ़ावा, बाजार में घटिया क्वालिटी की दवाओं की जगह बेहतर विकल्प और नए आयात मार्गों की खोज शामिल है।

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पाकिस्तान से बेहतर हैं अफगान दवाएं?

काबुल की एक फार्मेसी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हिकमतुल्लाह ने टोलो न्यूज से बातचीत में कहा कि कई मामलों में अफगानिस्तान में बनी दवाएं पाकिस्तान से आयात होने वाली दवाओं से बेहतर गुणवत्ता की हैं। उन्होंने बताया कि लोगों में जागरूकता की कमी के कारण वे अब भी पाकिस्तानी दवाओं की मांग करते हैं, जबकि स्थानीय दवाएं अधिक प्रभावी और सुरक्षित हैं।

भारत को कैसे होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान से आयात बंद होने के बाद अफगानिस्तान के लिए भारत एक बड़ा वैकल्पिक दवा आपूर्तिकर्ता बन सकता है। भारत पहले से ही अफगानिस्तान को मानवीय सहायता और दवाओं की सप्लाई करता रहा है। ऐसे में यह फैसला भारत-अफगान व्यापारिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है, जबकि पाकिस्तान को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

गौरतलब है कि 12 नवंबर 2025 को अफगानिस्तान के आर्थिक मामलों के उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने वित्त मंत्रालय को निर्देश दिया था कि तीन महीने के भीतर पाकिस्तान से दवाओं का आयात पूरी तरह बंद किया जाए। अब इस आदेश के लागू होने के साथ पाकिस्तान की दवा इंडस्ट्री को करारा झटका लगा है।

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T20 World Cup 2026: यू-टर्न के बाद भारत-पाक मैच तय, जानें तारीख, वेन्यू और लाइव प्रसारण

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। पाकिस्तान को अपने फैसले से आखिरकार यू-टर्न लेना पड़ा है। 1 फरवरी को पाकिस्तान सरकार ने ऐलान किया था कि उनकी टीम T20 World Cup 2026 में भारत के खिलाफ मुकाबला नहीं खेलेगी। हालांकि कुछ दिनों तक चले सियासी और खेली ड्रामे के बाद पाकिस्तान ने मैच खेलने की सहमति दी, लेकिन इसके साथ तीन शर्तें भी रखीं। आईसीसी द्वारा इन शर्तों को खारिज किए जाने के बाद पाकिस्तान को झुकना पड़ा और अब भारत बनाम पाकिस्तान का महामुकाबला तय हो गया है।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान एक ही ग्रुप में शामिल हैं। दोनों टीमें ग्रुप-ए का हिस्सा हैं। भारत ने अपने पहले मुकाबले में यूएसए को हराया, जबकि पाकिस्तान ने नीदरलैंड के खिलाफ जीत दर्ज की। भारत अपना दूसरा मैच नामीबिया के खिलाफ खेलेगा, जबकि पाकिस्तान अमेरिका से भिड़ेगा। इसके बाद दोनों टीमें एक-दूसरे के आमने-सामने होंगी।

भारत बनाम पाकिस्तान मैच कब होगा?

भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबला टी20 वर्ल्ड कप 2026 का 27वां मैच होगा। यह हाई-वोल्टेज मुकाबला
रविवार, 15 फरवरी 2026 को खेला जाएगा।

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भारत बनाम पाकिस्तान मैच कहां खेला जाएगा?

आईसीसी इवेंट्स में भारत-पाकिस्तान मैच न्यूट्रल वेन्यू पर कराने के समझौते के तहत यह मुकाबला
कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम (श्रीलंका) में आयोजित होगा। श्रीलंका इस टूर्नामेंट का सह-मेजबान है।

भारत बनाम पाकिस्तान मैच की टाइमिंग

• मैच शुरू: शाम 7:00 बजे

• टॉस: शाम 6:30 बजे

भारत बनाम पाकिस्तान मैच का लाइव प्रसारण

इस मुकाबले का लाइव टेलीकास्ट स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनलों पर किया जाएगा।

भारत बनाम पाकिस्तान मैच की लाइव स्ट्रीमिंग

फैंस JioHotstar ऐप और वेबसाइट पर इस महामुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग देख सकेंगे।
भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर क्रिकेट फैंस में जबरदस्त उत्साह है और यह मुकाबला टूर्नामेंट का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है।

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आज का सामाजिक परिदृश्य: प्रगति के बीच बढ़ती सामाजिक पीड़ा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज का समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां एक ओर तकनीकी, शैक्षिक और आर्थिक क्षेत्रों में तेज़ प्रगति दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक पीड़ा, मानसिक तनाव और नैतिक मूल्यों के ह्रास की चिंताजनक तस्वीर भी सामने आ रही है। आधुनिक सुविधाओं और डिजिटल क्रांति ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक समरसता पर इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ा है।

डिजिटल युग में सूचना और संचार के साधनों ने दुनिया को करीब ला दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर खुले हैं। युवा वर्ग आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और समाज में नवाचार व आधुनिक सोच को बढ़ावा मिल रहा है। यह प्रगति निश्चित रूप से समाज के लिए आशाजनक संकेत है।

लेकिन इसी विकास की आड़ में सामाजिक समस्याएं भी गहराती जा रही हैं। परिवारों में संवाद की कमी, रिश्तों में भावनात्मक दूरी, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उपभोक्तावादी सोच ने मानसिक अवसाद और तनाव को जन्म दिया है। आर्थिक असमानता बढ़ने से समाज दो वर्गों में बंटता नजर आ रहा है—एक संपन्न और दूसरा संघर्षरत।

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सबसे बड़ी चिंता सामाजिक संवेदनशीलता में आई गिरावट को लेकर है। लोगों में दूसरों के दुःख-दर्द के प्रति उदासीनता बढ़ रही है। अपराध, भ्रष्टाचार, नशाखोरी और नैतिक पतन समाज की जड़ों को कमजोर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ी है, लेकिन वास्तविक जीवन में सामाजिक जिम्मेदारी और सहयोग की भावना सीमित होती जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समाज की सच्ची प्रगति तभी संभव है जब भौतिक विकास के साथ-साथ मानवीय मूल्य, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी को भी समान महत्व दिया जाए। शिक्षा, परिवार और समाज को मिलकर ऐसे नागरिक तैयार करने होंगे जो न केवल सफल हों, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार भी हों।

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किराये के जर्जर भवन से मिलेगी मुक्ति, बनेगा आधुनिक दुबहड़ थाना

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद बलिया के दुबहड़ क्षेत्र के लिए यह खबर राहत और उम्मीद दोनों लेकर आई है। वर्षों से किराये के जर्जर भवन में संचालित हो रहा दुबहड़ थाना अब अपनी स्थायी पहचान की ओर बढ़ चुका है। जिला प्रशासन ने थाना भवन निर्माण के लिए सार्वजनिक भूमि चिन्हित कर ली है। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होते ही नया दुबहड़ थाना भवन बनने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।
दुबहड़ थाना दशकों पहले राष्ट्रीय राजमार्ग–31 के किनारे स्थित एक निजी भवन में स्थापित किया गया था। तब से अब तक थाना उसी किराये के भवन में संचालित होता रहा। समय के साथ भवन की हालत अत्यंत खराब हो गई। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकना आम बात है, वहीं बाढ़ के दौरान लगभग हर साल थाना खाली करने की नौबत आ जाती है। ऐसी स्थिति में पुलिसकर्मियों को आसपास के आवासीय भवनों में शरण लेनी पड़ती है, जिससे पुलिस कार्यप्रणाली प्रभावित होती रही है।
भवन स्वामी द्वारा कई बार थाना खाली कराने के प्रयास किए गए, मामला न्यायालय तक पहुंचा और अंततः न्यायालय के आदेश के बाद थाना खाली करने का निर्देश भी जारी हुआ। हालांकि प्रशासनिक अनुरोध के आधार पर अभी तक थाना उसी पुराने भवन में किसी तरह संचालित किया जा रहा है। जगह की कमी के कारण पुलिसकर्मियों का मेस राष्ट्रीय राजमार्ग के दूसरी ओर संचालित करना पड़ता है, जो सुरक्षा और सुविधा दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहा है।

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पुलिस अधिकारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद जिला प्रशासन ने हाल ही में दुबहड़ गांव में ही सार्वजनिक भूमि को चिन्हित किया। सोमवार को मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) त्रिभुवन ने मौके पर पहुंचकर चिन्हित भूमि का निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान दुबहड़ थाना भवन का भी जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई बेहतर रखने, अभिलेखों को अद्यतन रखने और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। समाधान दिवस रजिस्टर, महिला शिकायत रजिस्टर और दैनिक शिकायत रजिस्टर का भी अवलोकन किया गया।
गौरतलब है कि जनपद बलिया में कुल 23 थाने हैं। बीते वर्षों में दुबहड़ थाना को छोड़कर लगभग सभी थानों का आधुनिकीकरण हो चुका है। आधुनिक कार्यालय, पुलिसकर्मियों के लिए बैरक, भोजनालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। अब नया दुबहड़ थाना भवन भी इसी श्रेणी में शामिल होने जा रहा है।
नए थाना भवन के निर्माण से न केवल पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय जनता को भी सुरक्षित और सशक्त पुलिस व्यवस्था का लाभ मिलेगा। दशकों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होने से दुबहड़ क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

निजी स्कूल बस की लापरवाही ने छीनी मासूम की मुस्कान

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) देवरिया जिले के सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां निजी स्कूल बस की लापरवाही के चलते 6 वर्षीय मासूम छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई। यह घटना एक बार फिर स्कूल बस सुरक्षा व्यवस्था और चालकों की जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े करती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सलेमपुर क्षेत्र के ग्राम बरसीपार निवासी रामबदन की 6 वर्षीय पुत्री अंशिका एक निजी विद्यालय में अध्ययनरत है। रोज की तरह वह स्कूल बस से पढ़ाई कर घर लौट रही थी। बताया जा रहा है कि बस चालक ने लापरवाही बरतते हुए बच्ची को सड़क किनारे उतार दिया और यह सुनिश्चित किए बिना कि छात्रा सुरक्षित दूरी पर पहुंच गई है, बस को आगे बढ़ा दिया।

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इसी दौरान मासूम अंशिका बस के पिछले चक्के की चपेट में आ गई, जिससे उसके दोनों पैर बुरी तरह कुचल गए। हादसा होते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से परिजनों को सूचना दी गई और बच्ची को तत्काल सलेमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
हालत गंभीर, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर
सीएचसी सलेमपुर में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बच्ची की हालत गंभीर बताते हुए उसे देवरिया मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां भी स्थिति नाजुक बनी रही, जिसके बाद डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। फिलहाल बच्ची का इलाज जारी है और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी में रखे हुए है।

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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद बच्ची के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि यदि बस चालक थोड़ी भी सावधानी बरतता, तो यह हादसा टल सकता था। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में भी घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

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स्कूल बस सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि निजी स्कूल बस लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है। नियमों के अनुसार बच्चों को बस से उतारते समय वाहन पूरी तरह रोकना, सहायक की मौजूदगी और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसके बावजूद ऐसी घटनाएं होना प्रशासनिक लापरवाही और स्कूल प्रबंधन की उदासीनता को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी बस चालक और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

संत कबीर नगर सड़क हादसा: कार-टेंपो की आमने-सामने भिड़ंत में महिला की मौत, छह घायल

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संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)।उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। धनघटा थाना क्षेत्र के कौलही गांव के पास कार और टेंपो की आमने-सामने हुई जोरदार टक्कर में एक महिला की मौत हो गई, जबकि टेंपो सवार करीब छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह संत कबीर नगर सड़क हादसा मंगलवार को उस वक्त हुआ, जब तेज रफ्तार कार ने सामने से आ रहे टेंपो को टक्कर मार दी।

मृतका का

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मिली जानकारी के अनुसार, बेलौरा गांव निवासी सावित्री देवी (55) टेंपो से यात्रा कर रही थीं। जैसे ही टेंपो कौलही गांव स्थित टावर के पास पहुंचा, सामने से आ रही तेज रफ्तार स्विफ्ट डिजायर कार ने सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार सड़क किनारे खेत में जा गिरी और टेंपो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस कार-टेंपो भिड़ंत के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने मानवीय पहल दिखाते हुए घायलों की मदद की। सभी घायलों को 108 एंबुलेंस सेवा के जरिए सीएचसी हैंसर बाजार ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद सावित्री देवी की हालत नाजुक देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया। दुर्भाग्यवश, इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। यह खबर सामने आते ही परिजनों में कोहराम मच गया।

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सूचना मिलने पर धनघटा पुलिस मौके पर पहुंची और कार व टेंपो को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मृतका के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हादसे के बाद कार चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया था, जिसकी तलाश की जा रही है। तहरीर मिलने के बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मार्ग पर स्पीड कंट्रोल, चेतावनी बोर्ड और नियमित पुलिस गश्त की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोका जा सके।
यह संत कबीर नगर सड़क हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की गंभीर जरूरत को रेखांकित करता है। समय पर सहायता और सतर्कता से जहां कई जिंदगियां बच सकती हैं, वहीं लापरवाही एक परिवार को उजाड़ देती है।