Monday, May 4, 2026
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औरैया में फार्मर रजिस्ट्री अभियान तेज, जिलाधिकारी ने किया ग्रामों का निरीक्षण

औरैया,(राष्ट्र की परम्परा)जनपद में किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित औरैया फार्मर रजिस्ट्री योजना को गति देने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने सोमवार को ग्राम पंचायत सचिवालय सहायल, ग्राम भरका और ग्राम अवावर का निरीक्षण कर योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य में तेजी लाई जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान फार्मर रजिस्ट्री से जुड़े लेखपालों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि सरकार की यह योजना किसानों के हितों से सीधे जुड़ी हुई है, इसलिए इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शाम तक लक्ष्य के अनुरूप संतोषजनक प्रगति नहीं पाई गई तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कैंप लगाकर किसानों का रजिस्ट्रेशन कराने पर जोर
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सभी लेखपालों को निर्देशित किया कि वे ग्राम पंचायतों के ऐसे मजरों को चिन्हित करें, जहां फार्मर रजिस्ट्री का कार्य तेजी से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चिन्हित स्थानों पर विशेष कैंप आयोजित किए जाएं, जिससे अधिक से अधिक किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सके।
जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि कैंपों की सफलता के लिए ग्राम प्रधान और कोटेदार की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की जाए। उनके माध्यम से किसानों को सूचना देकर कैंप में बुलाया जाए ताकि किसी भी पात्र किसान का पंजीकरण छूट न सके। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर समन्वय बनाकर कार्य करने से योजना का लाभ अधिक किसानों तक पहुंचाया जा सकता है।
खतौनी और आधार कार्ड में त्रुटियों को सुधारने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने फार्मर रजिस्ट्री प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी और दस्तावेजी समस्याओं पर भी विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि कई बार किसानों के नाम खतौनी या आधार कार्ड में त्रुटिपूर्ण पाए जाते हैं, जिससे पंजीकरण में बाधा आती है।
उन्होंने लेखपालों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की अलग सूची तैयार की जाए, जिसमें आधार कार्ड और खतौनी में मौजूद त्रुटियों का विवरण दर्ज हो। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों के माध्यम से इन त्रुटियों का शीघ्र संशोधन कराया जाए और संशोधन के बाद किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि दस्तावेजी त्रुटियों के कारण किसी भी किसान को योजना से वंचित नहीं किया जाएगा।
किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने में फार्मर रजिस्ट्री की भूमिका अहम
जिला प्रशासन के अनुसार, फार्मर रजिस्ट्री योजना का उद्देश्य किसानों का डिजिटल डाटा तैयार करना है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके। इस योजना के तहत किसानों की भूमि, फसल और व्यक्तिगत जानकारी का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है।
फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों को कृषि अनुदान, बीमा, सब्सिडी और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में आसानी होगी। इसके अलावा भविष्य में कृषि से संबंधित नई योजनाओं के क्रियान्वयन में भी यह डाटा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर परखी व्यवस्थाएं
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्य प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने किसानों से संवाद कर यह भी जाना कि उन्हें फार्मर रजिस्ट्री प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या तो नहीं आ रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार भी किया जाए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसान अभी भी योजना के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखते हैं, इसलिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से किसानों को योजना के महत्व के बारे में जानकारी देने और उन्हें पंजीकरण के लिए प्रेरित करने को कहा।
ग्रामीणों और किसानों की रही सक्रिय भागीदारी
निरीक्षण के दौरान संबंधित ग्रामों के प्रधान, लेखपाल और किसान बड़ी संख्या में मौजूद रहे। किसानों ने प्रशासन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि फार्मर रजिस्ट्री योजना से उन्हें भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सहूलियत होगी।
किसानों ने यह भी बताया कि प्रशासन द्वारा लगाए जा रहे कैंप से उन्हें पंजीकरण कराने में आसानी हो रही है। कई किसानों ने मौके पर ही अपने दस्तावेजों की जांच कराकर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कराई।
समयबद्ध लक्ष्य पूरा करने पर प्रशासन का फोकस
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फार्मर रजिस्ट्री योजना सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि योजना की सफलता के लिए टीमवर्क और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या आने पर तत्काल समाधान निकाला जाए और कार्य में बाधा न आने दी जाए। साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए ताकि प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।
प्रशासन की सख्ती से कार्य में तेजी आने की उम्मीद
जिलाधिकारी द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के बाद प्रशासनिक तंत्र में सक्रियता बढ़ गई है। अधिकारियों का मानना है कि सख्ती और नियमित समीक्षा से योजना का कार्य तेजी से पूरा किया जा सकेगा।
जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जनपद के सभी पात्र किसानों का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी विधूना गरिमा सोनकिया, संबंधित लेखपाल, ग्राम प्रधान और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

जिले में धारा 163 लागू, 31 मार्च तक पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक


त्योहार और बोर्ड परीक्षा को देखते हुए प्रशासन सख्त, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
जनपद में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से अपर जिला मजिस्ट्रेट अनिल कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 163 (पूर्व में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144) के अंतर्गत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह आदेश 13 फरवरी से 31 मार्च तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने यह निर्णय आगामी त्योहारों एवं बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए संभावित अव्यवस्था और शांति भंग की आशंका के मद्देनजर लिया है।जनपद में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज द्वारा आयोजित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक संपन्न होंगी। साथ ही महाशिवरात्रि, होली, ईद, रामनवमी और महावीर जयंती जैसे प्रमुख पर्व भी इसी अवधि में पड़ रहे हैं। ऐसे में शांति व्यवस्था एवं जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।जारी आदेश के अनुसार जनपद की सीमा में किसी भी सार्वजनिक स्थान पर पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, धरना-प्रदर्शन करने अथवा बिना अनुमति सभा आयोजित करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। विशेष परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। परंपरागत धार्मिक आयोजनों एवं जुमे की नमाज को इस आदेश से छूट प्रदान की गई है।बिना अनुमति किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र, आग्नेयास्त्र, लाठी-डंडा, धारदार हथियार अथवा विस्फोटक पदार्थ लेकर चलना प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि सिख समुदाय को पारंपरिक कृपाण रखने तथा ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को छूट दी गई है। साम्प्रदायिक भावना भड़काने वाले पोस्टर, बैनर, पर्चे या नारे लगाने एवं वितरित करने पर भी रोक रहेगी। सड़क, रेलमार्ग, जलमार्ग, सरकारी कार्यालयों, पेट्रोल पंपों आदि का घेराव, यातायात अवरोध, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना तथा पुतला दहन जैसे कृत्य पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगे।बोर्ड परीक्षाओं को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों के आसपास ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग पर रोक रहेगी। परीक्षा परिसर में मोबाइल फोन, ब्लूटूथ या अन्य संचार उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। परीक्षा केंद्र से एक किलोमीटर की परिधि में फोटो कॉपी एवं स्कैनर मशीनों का संचालन बंद रहेगा। वहीं केंद्र से 200 मीटर की परिधि में किसी भी व्यक्ति को अस्त्र-शस्त्र लेकर जाने की अनुमति नहीं होगी, सिवाय तैनात सुरक्षा कर्मियों के।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 223 (पूर्व में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188) के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

21को कांग्रेसियों द्वारा होगा रेलवे चक्का जाम

धरना कर उपजिलाधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौपा

बरहज/देवरिया(राष्ट्र क़ी परम्परा)
कांग्रेसियों ने रेलवे क़ी दुर्दशा को लेकर बरहज स्थित लाजपत भवन पर कांग्रेस प्रवक्ता रविप्रताप सिंह के नेतृत्व मे धरना प्रदर्शन कर, उपजिलाधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार बरहज एवं महाप्रबंधक वाराणसी रेल मंडल को सम्बोधित ज्ञापन रेलवे पदाधिकारी को सौपा।
बताते चले कि सोमवार को बरहज रेलवे स्टेशन पर शौचालय, एवं पेयजल तथा सुरक्षा को लेकर, कांग्रेस प्रवक्ता रविप्रताप सिंह के नेतृत्व मे आमजनमानस एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने बरहज स्थित कांग्रेस कार्यालय लाजपत भवन पर धरना प्रदर्शन कर उपजिलाधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को तथा महाप्रबंधक वाराणसी रेल मंडल को सम्बोधित पत्रक बरहज रेल पदाधिकारी को सौपा।
इस दौरान कांग्रेस प्रवक्ता रविप्रताप सिंह ने कहा कि, बरहज रेलवे स्टेशन कि बदहाली को लेकर कई बार रेलवे प्रशासन को लिखित एवं दूर संचार के माध्यम से अवगत कराया गया है, कि रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए न शौचालय, न पेय जल की कोई व्यवस्था नहीं है जिसको लेकर संबन्धित विभाग को बार बार सूचित किया गया लेकिन रेलवे प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने रेलवे की बदहाली को लेकर कहा की हम सभी कांग्रेसी कार्यकर्ता व बरहज की सम्मानित जनता द्वारा 18/02/2026 से रेलवे स्टेशन पर अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन गांधीवादी तरिके किया जाएगा, अगर तीन दिन के भीतर रेलवे प्रशासन द्वारा कोई निराकरण नहीं निकाला गया तो रेल चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी रेल प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन की होंगी। इस दौरान
नगर अध्यक्ष जितेंद्र जायसवाल, जिला महामंत्री व्यास दुबे, चंद्रभूषण पाण्डेय, भोला तिवारी, राधारमण पाण्डेय, सूर्यप्रताप सिंह, समर बहादुर सिंह, मुन्ना सिंह, हरिप्रताप सिंह, भानु प्रताप सिंह, डॉ शेलेन्द्र जायसवाल, डॉ अभिषेक, दिनेश तिवारी, धर्मेंद्र पाण्डेय सहित आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

उद्योग बंधु बैठक में उद्यमियों की समस्याओं पर सख्त निर्देश, सड़क और बिजली सुधार कार्य होंगे तेज

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)।कुशीनगर में आयोजित जिला उद्योग बंधु, व्यापार बंधु और श्रम बंधु की संयुक्त बैठक में उद्यमियों और व्यापारियों की समस्याओं के समाधान पर प्रशासन ने गंभीरता दिखाई। अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में आयोजित बैठक में औद्योगिक इकाइयों तक संपर्क मार्ग और विद्युत व्यवस्था सुधार को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए गए।बैठक के दौरान मेसर्स विशाल ट्रेडिंग कंपनी, जंगल बेलवा, पडरौना स्थित इकाई तक सड़क निर्माण और चौड़ीकरण कार्य की समीक्षा की गई। नगर पालिका प्रशासन ने जानकारी दी कि मार्ग निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। वहीं सठियांव स्थित यूपी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड तक संपर्क मार्ग निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य जल्द शुरू होने की बात कही गई।भैसहां स्थित बुद्धा वाटर पार्क एवं रिजॉर्ट तक सड़क चौड़ीकरण और मरम्मत कार्य को भी मंजूरी मिल चुकी है। लोक निर्माण विभाग ने भरोसा दिलाया कि यह कार्य जल्द पूरा किया जाएगा। मिनी औद्योगिक आस्थान दुदही में विद्युत आपूर्ति सुधार के लिए बिजली विभाग को दस दिनों के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए गए।बैठक में मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, ओडीओपी और सीएम युवा योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रशासन ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया सहित सभी बैंकों को उद्यमियों को ऋण स्वीकृति में सहयोग बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही जीबीसी-5 योजना के तहत 1200 करोड़ रुपये निवेश लक्ष्य पूरा करने के लिए विभिन्न विभागों को विशेष प्रयास करने को कहा गया।निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित आवेदनों के निस्तारण को लेकर अधिकारियों को समयबद्ध और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। श्रम विभाग ने श्रमिकों को योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया, जबकि व्यापार बंधु बैठक में व्यापारियों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया गया।

अखिलेश यादव ने फॉर्म-7 को लेकर चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

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लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और सत्ताधारी दल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फॉर्म-7 के माध्यम से सुनियोजित तरीके से वोट कटवाने की कोशिश की जा रही है, जिससे विपक्ष को नुकसान पहुंचाया जा सके।

सकलडीहा और बाबागंज का मामला

अखिलेश यादव के अनुसार सकलडीहा विधानसभा में फॉर्म-7 के 16 आवेदन जमा किए गए। वहीं बाबागंज विधानसभा के बूथ नंबर 365 पर फर्जी हस्ताक्षर कर लगभग 100 वोट कटवा दिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके एक बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) का भी नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। इसे उन्होंने “सीधी साजिश” करार दिया।

‘बीजेपी की सीक्रेट बैठक’ का दावा

सपा प्रमुख ने दावा किया कि बीजेपी की एक गुप्त बैठक में हर विधानसभा में वोट कटवाने की रणनीति बनाई गई। उन्होंने कन्नौज का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के एक नेता का बयान भी इस ओर इशारा करता है।
अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि यह गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर वोट हटाने की योजना है।

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नेताओं और परिवारों के नाम कटने का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि औरैया नगर अध्यक्ष का नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया। साथ ही बलिया के सिकंदरपुर से सपा विधायक की पत्नी का नाम भी काटे जाने की बात कही।
उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं और उनके समर्थकों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

अयोध्या में फॉर्म-7 के आंकड़े

अखिलेश यादव ने अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि एक बूथ पर 181 नोटिस जारी हुए, जिनमें से 76 प्रतिशत पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज को मिले।
उन्होंने दावा किया कि 46 प्रतिशत नोटिस यादव और मुस्लिम समुदाय को दिए गए।

उनके अनुसार अयोध्या में सपा ने 47 फॉर्म-7 भरे, जबकि बीजेपी की ओर से लगभग एक हजार आवेदन दिए गए। एक लाख से अधिक आवेदन “अज्ञात लोगों” द्वारा भरे जाने का भी आरोप लगाया गया।

‘हार के डर’ का आरोप

अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी चुनाव हारने के डर से इस तरह की रणनीति अपना रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जमीनी हकीकत कुछ और है।

इटावा में मारपीट का आरोप

इटावा में शिकायत करने पर एक सपा समर्थक प्रधान के साथ मारपीट का आरोप भी लगाया गया। अखिलेश यादव ने कहा कि यदि कोई मतदाता अपना नाम बचाने की कोशिश करता है तो उस पर दबाव बनाया जाता है।

तीखा राजनीतिक हमला

अखिलेश यादव ने बयान देते हुए कहा, “गद्दी विरासत में मिल सकती है, लेकिन बुद्धि नहीं।” उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के जरिए पीडीए समाज के वोटों को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब चुनाव आयोग से इस संबंध में सवाल किए जाते हैं तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता।

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‘स्वच्छता ही सेवा’ शिविर: संत कबीर नगर में NSS की जागरूकता रैली और सफाई अभियान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानीय प्रभादेवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तहत ‘स्वच्छता ही सेवा’ विषय पर एकदिवसीय शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करना और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना रहा।

जागरूकता रैली से हुई शुरुआत

शिविर की शुरुआत स्वच्छता जागरूकता रैली से हुई। NSS स्वयंसेवकों ने महाविद्यालय परिसर से आसपास के क्षेत्रों तक रैली निकालकर स्वच्छता का संदेश घर-घर पहुंचाया।

हाथों में तख्तियां और बैनर लिए छात्र-छात्राओं ने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।
रैली को महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बननी चाहिए।

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परिसर में चला सफाई अभियान

रैली के बाद स्वयंसेवकों ने महाविद्यालय परिसर में व्यापक सफाई अभियान चलाया। कक्षाओं, प्रांगण और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई कर स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संकल्प लिया गया।

प्राचार्य ने कहा कि जब तक हर व्यक्ति व्यक्तिगत और सामाजिक स्वच्छता की जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक स्वच्छ समाज का लक्ष्य अधूरा रहेगा। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे स्वयं उदाहरण बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।

NSS की भूमिका और संदेश

राष्ट्रीय सेवा योजना के इस शिविर का संचालन कार्यक्रम अधिकारी सीमा ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

‘स्वच्छता ही सेवा’ शिविर के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही सफल हो सकती है।

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लोकसभा में उठा यूपी की चिकित्सा अवसंरचना का मुद्दा

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देवरिया सदर अस्पताल, बलिया मेडिकल कॉलेज और रिक्त पदों पर सरकार का जवाब

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। लोकसभा में उत्तर प्रदेश की चिकित्सा अवसंरचना को लेकर अतारांकित प्रश्न संख्या 2498 के माध्यम से सांसद रमाशंकर विद्यार्थी राजभर ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से विस्तृत जानकारी मांगी। 13 फरवरी 2026 को पूछे गए इस प्रश्न का उत्तर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने सदन में दिया।

प्रश्न में जिला अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के रिक्त पदों तथा देवरिया में सदर अस्पताल और बलिया मेडिकल कॉलेज की स्थिति से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।


दवाओं और संसाधनों की उपलब्धता

मंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल राज्य विषय हैं। डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना संबंधित राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार आवश्यक दवा सूची (EDL) के तहत उपलब्धता इस प्रकार है—

जिला अस्पताल: 394 स्वीकृत दवाओं के सापेक्ष 324 उपलब्ध
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC): 242 के सापेक्ष 214 उपलब्ध
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र/स्वास्थ्य एवं कल्याण पीएचसी: 195 के सापेक्ष 181 उपलब्ध
स्वास्थ्य एवं कल्याण उपकेंद्र: 84 के सापेक्ष 79 उपलब्ध

डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की स्थिति संबंधी विस्तृत जानकारी ‘हेल्थ डायनेमिक्स ऑफ इंडिया (इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड ह्यूमन रिसोर्सेज) 2022-23’ रिपोर्ट में उपलब्ध है।

देवरिया में सदर अस्पताल का प्रस्ताव

सरकार ने बताया कि अस्पतालों की स्थापना और उन्नयन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है तो केंद्र सरकार कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (PIP) के आधार पर कार्यवाही के अभिलेख (ROP) के रूप में स्वीकृति प्रदान करती है।

देवरिया में नए सदर अस्पताल के संबंध में केंद्र स्तर पर पृथक स्वीकृति का उल्लेख नहीं किया गया।

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बलिया मेडिकल कॉलेज की स्थिति

बलिया में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज की प्रगति राज्य सरकार के स्तर पर जारी है। इसके पूर्ण संचालन की समय-सीमा भी राज्य सरकार द्वारा तय की जाएगी।

रिक्त पदों की स्थिति

उत्तर प्रदेश के जिला अस्पतालों में एलोपैथिक चिकित्सा अधिकारियों के कुल 3,123 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 2,002 पद भरे हुए हैं।

देवरिया: 167 स्वीकृत पदों में 135 कार्यरत
बलिया: 277 स्वीकृत पदों में 190 कार्यरत

सरकार ने स्पष्ट किया कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया राज्य सरकार के स्तर पर संचालित होती है।

गुणवत्ता सुधार और पारदर्शिता

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) लागू किया गया है। इसके तहत अस्पताल प्रबंधन, पारदर्शिता और शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है।

लोकसभा में उठे इस प्रश्न से उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में संसाधनों की उपलब्धता, रिक्त पदों और अवसंरचना विकास की स्थिति स्पष्ट हुई है। हालांकि कई महत्वपूर्ण निर्णय और उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर ही निर्भर है।

मीडिया प्रभारी जितेश कुमार वर्मा ने बताया कि इस प्रश्न के माध्यम से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जमीनी मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता मिली है।

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लखनऊ समेत यूपी की 18 जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी, कचहरी परिसरों में सघन चेकिंग

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लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी लखनऊ में कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया और कचहरी परिसर में सघन चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया।

कचहरी परिसर में चला सघन तलाशी अभियान

थाना वजीरगंज पुलिस के नेतृत्व में इंस्पेक्टर राजेश कुमार त्रिपाठी ने बीडीएस (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वॉड टीम के साथ मिलकर कचहरी परिसर की गहन जांच की।

कोर्ट परिसर, मुख्य भवन, प्रवेश द्वार और पार्किंग स्थल पर विशेष रूप से तलाशी अभियान चलाया गया। संदिग्ध वस्तुओं की जांच के लिए बम निरोधक दस्ता भी मौके पर मौजूद रहा।

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18 जिला न्यायालयों को मिली धमकी

अपडेट के अनुसार, अयोध्या, वाराणसी सहित उत्तर प्रदेश के 18 जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है।

धमकी मिलने के बाद संबंधित जिलों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। न्यायालय परिसरों में प्रवेश से पहले सघन जांच की जा रही है और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

पुलिस अधिकारियों के अनुसार फिलहाल जांच जारी है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं।
जनता से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

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Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana: 25 लाख महिलाओं को 10-10 हजार ट्रांसफर, अब 2 लाख की प्रक्रिया शुरू

बिहार (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार में Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार को मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने राज्य की 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के समय शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत एक परिवार की एक महिला को पहले 10,000 रुपये और छह महीने बाद 2 लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया था।

अब तक 18,100 करोड़ रुपये ट्रांसफर

सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब तक महिला लाभार्थियों के खातों में 18,100 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। जिन महिलाओं को पहले 10 हजार रुपये मिल चुके हैं, अब वे 2 लाख रुपये की अगली राशि का इंतजार कर रही हैं।

पटना में लगा पोस्टर: ‘बढ़ेगी महिला, बढ़ेगा बिहार’

पटना के वीरचंद पटेल पथ पर जनता दल (यू) की ओर से बड़ा पोस्टर लगाया गया है। पोस्टर में लिखा है, “जो कहा वह किया, मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत हर परिवार की एक महिला को दो लाख दिए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ।”

नीचे स्लोगन दिया गया है—“बढ़ेगी महिला, बढ़ेगा बिहार।” पोस्टर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बड़ी तस्वीर भी लगाई गई है।

पटना में दो लाख रुपये को लेकर लगा पोस्टर

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2 लाख रुपये कैसे मिलेंगे? जानें पूरी प्रक्रिया

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 2 लाख रुपये एकमुश्त नहीं दिए जाएंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह राशि चार चरणों में दी जाएगी।

पहला चरण:
सरकार 20,000 रुपये देगी, लाभार्थी को 5,000 रुपये स्वयं लगाने होंगे।

दूसरा चरण:
सरकार 40,000 रुपये देगी, महिला को 10,000 रुपये का अंशदान करना होगा।

तीसरा चरण:
सरकार 80,000 रुपये देगी, लाभार्थी को 20,000 रुपये स्वयं देने होंगे।

चौथा चरण:
60,000 रुपये मार्केटिंग, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए दिए जाएंगे।

इस प्रकार मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत कुल 2 लाख रुपये की सहायता चरणबद्ध तरीके से मिलेगी।

योजना की शर्तें भी जान लें

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत कुछ आवश्यक शर्तें भी रखी गई हैं:

• समूह की बैठकों में नियमित भागीदारी अनिवार्य
• आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा रखना होगा
• हर महीने छोटी राशि की एफडी या आरडी करना जरूरी
• स्वरोजगार गतिविधि में सक्रिय भागीदारी

इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना की राशि का सही उपयोग हो और महिलाएं दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बिहार में महिला सशक्तिकरण की बड़ी पहल मानी जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे लाखों महिलाएं छोटे व्यवसाय, स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर बढ़ेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का सही क्रियान्वयन हुआ, तो यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती है।

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‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान: चिकित्सकों व NSS स्वयंसेवकों ने किया पौधारोपण

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सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। पर्यावरण संरक्षण और मातृ सम्मान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत रविवार को पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) प्रकोष्ठ और सरदार वल्लभ भाई पटेल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

अभियान के अंतर्गत सिकंदरपुर क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर पौधे लगाए गए और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बरगद के पौधे रोपे

कार्यक्रम का पहला चरण सिकंदरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर परिसर में आयोजित हुआ। यहां चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिग्विजय कुमार, डॉ. रूबी, डॉ. रामकिशुन और डॉ. संदीप गौतम ने बरगद के दो पौधे लगाए।

चिकित्सकों ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है। बरगद का वृक्ष दीर्घायु और छायादार होता है, जो आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध वायु और हरियाली प्रदान करेगा। पौधों की सुरक्षा के लिए ट्रीगार्ड भी लगाए गए, ताकि वे सुरक्षित रूप से विकसित हो सकें।

इस अवसर पर डॉ. कृष्ण कुमार सिंह, उर्मिला सिंह, शैलेश शर्मा, राजेश यादव, आनंद शर्मा और सुधीर कुमार सहित कई लोग उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली।

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ग्राम सभा कासमापुर में NSS स्वयंसेवकों का उत्साह

कार्यक्रम के दूसरे चरण में ग्राम सभा कासमापुर में पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कृष्ण कुमार सिंह और चंद्रमा प्रसाद के नेतृत्व में NSS स्वयंसेवकों ने शरीफा का पौधा लगाया।

स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को वृक्षारोपण के महत्व के बारे में जागरूक किया और अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के माध्यम से आयोजकों ने यह संदेश दिया कि जैसे मां जीवनदायिनी होती है, वैसे ही वृक्ष भी मानव जीवन के लिए अनमोल हैं।

कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे, ताकि हरित वातावरण का निर्माण हो और समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।

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ग्रामीण महिलाओं के लिए वरदान बनेगा सिकंदरपुर महिला चिकित्सालय

🔴 सिकंदरपुर विधानसभा में महिला चिकित्सालय की मांग तेज, विधायक मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी ने विधानसभा में उठाई सशक्त आवाज


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।सिकंदरपुर विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही महिला चिकित्सालय की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। क्षेत्र के विधायक मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी ने यह अहम मुद्दा उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाते हुए सरकार से शीघ्र निर्णय और ठोस कार्रवाई की मांग की है। विधायक ने कहा कि सिकंदरपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आज भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला मुख्यालय या निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो समय, धन और सुरक्षा—तीनों दृष्टि से कठिन है।
🔹 क्यों जरूरी है सिकंदरपुर में महिला चिकित्सालय?
विधानसभा में चर्चा के दौरान विधायक रिजवी ने बताया कि क्षेत्र की महिलाओं को प्रसव सेवाएं, स्त्री रोग उपचार, एनीमिया, कुपोषण और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए दूर जाना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह व्यवस्था अक्सर असंभव साबित होती है। कई मामलों में आपात स्थिति में समय पर इलाज न मिलने से मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर का जोखिम बढ़ जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सिकंदरपुर विधानसभा क्षेत्र की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य अवसंरचना उसी अनुपात में विकसित नहीं हो सकी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, सीमित संसाधन और आधुनिक उपकरणों का अभाव है, जिससे महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण इलाज नहीं मिल पाता।

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🔹 प्रस्तावित महिला चिकित्सालय में क्या-क्या हों सुविधाएं?
विधायक ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि प्रस्तावित महिला चिकित्सालय में निम्नलिखित सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं—
अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ।
24×7 प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ।
आधुनिक प्रसव कक्ष (लेबर रूम) और ऑपरेशन थियेटर।
अल्ट्रासाउंड, लैब जांच, आयरन-फोलिक एसिड सपोर्ट जैसी जांच सुविधाएं।
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी और नवजात शिशुओं के लिए विशेष देखभाल यूनिट
इन सुविधाओं से न केवल स्थानीय महिलाओं को राहत मिलेगी, बल्कि आसपास के गांवों की गर्भवती महिलाओं को भी सुरक्षित और समय पर चिकित्सा मिल सकेगी।
🔹 जनता और सामाजिक संगठनों का समर्थन
विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद क्षेत्र में आशा की नई किरण जगी है। स्थानीय नागरिकों, महिला समूहों और सामाजिक संगठनों ने सिकंदरपुर में महिला चिकित्सालय की मांग का खुलकर समर्थन किया है। लोगों का कहना है कि यह मांग किसी एक क्षेत्र या वर्ग की नहीं, बल्कि माताओं और बहनों के स्वास्थ्य व सम्मान से जुड़ा सवाल है।
🔹 सरकार के निर्णय पर टिकी निगाहें
अब सबकी निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हैं। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो सिकंदरपुर विधानसभा क्षेत्र में महिला स्वास्थ्य सेवाओं का नया अध्याय शुरू होगा। यह कदम ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करेगा और भविष्य में मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाएगा।

सूर्य ग्रहण 2026 का वैज्ञानिक और ज्योतिषीय सच

सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026: समय, राशियों पर प्रभाव, दान-उपाय

सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 सनातन धर्म, ज्योतिष और विज्ञान—तीनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ग्रहण कुंभ राशि (शनि की राशि) में घटित हो रहा है, इसलिए इसका प्रभाव व्यक्तिगत जीवन से लेकर सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों तक देखने को मिलेगा। इस लेख में आपको ग्रहण का समय, समापन, कौन-सी राशियों के लिए शुभ-अशुभ, रोजगार-स्वास्थ्य पर प्रभाव, दान-उपाय, और वैज्ञानिक व शास्त्रोक्त व्याख्या—सब कुछ एक ही जगह, सरल और विश्वसनीय भाषा में मिलेगा।
सूर्य ग्रहण का समय (भारत में अनुमानित)
ग्रहण आरंभ: सुबह लगभग 09:30 बजे
ग्रहण का मध्य: सुबह 11:00 बजे के आसपास
ग्रहण समापन: दोपहर 12:35 बजे
(नोट: अलग-अलग स्थानों पर मिनटों का अंतर संभव है।)
👉 सूतक काल: ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले प्रारंभ माना जाता है।
👉 समापन के बाद ही स्नान, पूजा और दान को शुभ माना जाता है।
कुंभ राशि में सूर्य ग्रहण का महत्व
कुंभ राशि शनि की है—अनुशासन, कर्म, समाज और तकनीक का प्रतीक। इस कारण सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 का प्रभाव प्रशासन, रोजगार, तकनीकी क्षेत्र, सामूहिक निर्णय और सामाजिक संरचनाओं पर अधिक रहेगा। व्यक्तिगत कुंडली में शनि-सूर्य की स्थिति के अनुसार फल अलग-अलग मिल सकता है।
राशियों पर प्रभाव: किसे शुभ, किसे सावधानी
शुभ फल देने वाली राशियाँ
मिथुन, तुला, धनु
करियर में नई दिशा
अटके कार्यों में गति
नेटवर्किंग व बौद्धिक कार्यों में लाभ
मिश्रित प्रभाव वाली राशियाँ
वृषभ, कन्या, मकर
मेहनत अधिक, परिणाम धीरे
स्वास्थ्य व तनाव प्रबंधन जरूरी
सावधानी बरतने वाली राशियाँ
मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, कुंभ, मीन
निर्णयों में जल्दबाज़ी से बचें
स्वास्थ्य, मान-सम्मान व रिश्तों में संयम रखें
रोजगार और करियर पर प्रभाव
सरकारी, प्रशासनिक, तकनीकी और शनि-संबंधित क्षेत्रों में संरचनात्मक बदलाव।
नौकरी बदलने या नई जिम्मेदारी का योग—पर धैर्य जरूरी।
फ्रीलांस/स्टार्टअप में री-प्लानिंग फायदेमंद।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
आंखों, सिरदर्द, रक्तचाप, हृदय और तनाव से जुड़ी समस्याओं में सावधानी।
ग्रहण के दिन हल्का, सात्विक भोजन और पर्याप्त जल ग्रहण करें।
ध्यान, प्राणायाम और मौन लाभकारी।
दान-उपाय (ग्रहण के बाद करें)
सनातन मान्यता के अनुसार ग्रहण के समय पूजा-पाठ वर्जित है, पर समापन के बाद दान अत्यंत फलदायी होता है।
सात अनाज दान: गेहूं, चावल, दालें, तिल, बाजरा आदि—सुख-समृद्धि हेतु।
गुड़ का दान: सूर्य दुर्बल हो तो आत्मविश्वास व करियर उन्नति के लिए।
तांबे के बर्तन: सूर्य की कृपा और कुंडली में मजबूती।
लाल वस्त्र: स्वास्थ्य लाभ और मंगल शांति।
काले तिल (कुंभ राशि में ग्रहण): शनि दोष शांति हेतु विशेष फलदायी।
👉 दान स्नान के बाद, श्रद्धा और विनम्रता से करें।
शास्त्रोक्त मान्यताएँ

मान्यता है कि ग्रहण में राहु-केतु सूर्य को ढक लेते हैं, जिससे वातावरण में नकारात्मकता बढ़ती है। दान-पुण्य से यह प्रभाव कम होता है, पितृ दोष और ग्रह दोष में शांति मिलती है।
वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण
विज्ञान के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को आंशिक/पूर्ण रूप से ढक लेता है। यह एक खगोलीय घटना है—नकारात्मक ऊर्जा का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं। फिर भी, परंपराएँ मानसिक अनुशासन, संयम और समाजोपयोगी दान को बढ़ावा देती हैं—जो सकारात्मक सामाजिक प्रभाव डालते हैं।
क्या करें, क्या न करें करें:
मानसिक साधना, ध्यान, जप
ग्रहण समापन के बाद स्नान व दान
न करें:
ग्रहण काल में भोजन पकाना/खाना
पूजा-पाठ और नए कार्यों की शुरुआत
समापन
सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 आत्मचिंतन, संयम और पुनर्संतुलन का अवसर है। वैज्ञानिक तथ्य हमें घटना को समझाते हैं, जबकि शास्त्रीय परंपराएँ हमें अनुशासन और परोपकार सिखाती हैं। सही उपायों और सावधानियों के साथ यह ग्रहण जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

मुंबई से दिल्ली तक: भारत-फ्रांस रिश्तों का पावरफुल रोडमैप

भारत-फ्रांस दोस्ती का नया अध्याय: मुंबई में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन और AI इम्पैक्ट समिट 2026 की भव्य शुरुआत


मुंबई/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)मुंबई की सजी-संवरी सड़कें और कड़े सुरक्षा इंतज़ाम इस वक्त एक बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के गवाह बन रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और फर्स्ट लेडी ब्रिजिट मैक्रों 16 से 19 फरवरी तक भारत दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा यह दौरा भारत-फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है। यह मैक्रों की चौथी भारत यात्रा है और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार
भारत और फ्रांस के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि गहरी रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। 26 जनवरी 1998 को दोनों देशों के बीच पहली स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बनी थी। तब से डिफेंस, स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी, क्लाइमेट एक्शन और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।
इस बार का भारत दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि 2026 को पहले ही ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन’ घोषित किया जा चुका है। अब इसकी आधिकारिक शुरुआत मुंबई से होने जा रही है।
मुंबई में मोदी-मैक्रों की हाई-लेवल मीटिंग
17 फरवरी को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक होगी। इस बैठक में ‘होराइजन 2047’ रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
होराइजन 2047 के तहत अगले 25 वर्षों में भारत-फ्रांस सहयोग को किन क्षेत्रों में और गहराई दी जाए, इस पर रणनीति बनेगी। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी, साइबर सिक्योरिटी और क्लीन एनर्जी इस चर्चा के प्रमुख मुद्दे होंगे।

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इंडो-पैसिफिक और ग्लोबल मुद्दों पर साझा सोच
भारत और फ्रांस दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था के समर्थक हैं। इस दौरे के दौरान दोनों नेता वैश्विक सुरक्षा, यूक्रेन संकट, मिडिल ईस्ट, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी यूरोप और एशिया के बीच संतुलन बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
दिल्ली में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026
मुंबई के बाद मोदी और मैक्रों दिल्ली के भारत मंडपम पहुंचेंगे। यहां 16 से 20 फरवरी तक ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ का आयोजन होगा। यह ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों में होने वाला अपनी तरह का पहला बड़ा AI समिट है।
इससे पहले फरवरी 2025 में पेरिस में हुए AI एक्शन समिट में भी मोदी और मैक्रों एक साथ मंच साझा कर चुके हैं। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए यह समिट भारत में हो रहा है।

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समिट के तीन सूत्र: पीपल, प्लैनेट, प्रोग्रेस
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का फोकस तीन अहम स्तंभों पर आधारित है—पीपल: AI को आम लोगों के जीवन से जोड़ना
प्लैनेट: पर्यावरण और क्लाइमेट सॉल्यूशंस में AI का इस्तेमाल
प्रोग्रेस: आर्थिक विकास और इनोवेशन को तेज़ करना
इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो: टेक्नोलॉजी जनता के लिए
समिट के साथ-साथ एक विशाल ‘इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो’ भी आयोजित किया जाएगा।
इस एक्सपो में 30 देशों के 300 से ज्यादा एग्जीबिटर्स हिस्सा लेंगे। 10 अलग-अलग पवेलियन में यह दिखाया जाएगा कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब से निकलकर सीधे आम लोगों की जिंदगी आसान बना रहा है।
पूरा इवेंट ‘इंडिया AI मिशन’ और ‘डिजिटल इंडिया’ विज़न को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि टेक्नोलॉजी का फायदा सीधे समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

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इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन की शुरुआत
2024 के गणतंत्र दिवस पर जब राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत के चीफ गेस्ट थे, तब प्रधानमंत्री मोदी और मैक्रों ने 2026 को ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन’ घोषित किया था।
अब मुंबई में दोनों नेता मिलकर इसकी आधिकारिक शुरुआत करेंगे। इस पहल के तहत स्टार्टअप्स, रिसर्च इंस्टीट्यूट्स, यूनिवर्सिटीज और इंडस्ट्री के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
क्यों खास है यह दौरा
यह दौरा इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि—
भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी
AI, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ेगा
ग्लोबल साउथ को AI में मजबूत आवाज़ मिलेगी
इंडो-पैसिफिक में भारत की भूमिका और सशक्त होगी

सूर्य ग्रहण 2026 और कुंभ राशि: शनि दोष शांति के विशेष उपाय

सूर्य ग्रहण 2026: वैज्ञानिक रहस्य, शास्त्रोक्त मान्यताएं और ग्रहण के बाद दान का महत्व


🟠 सूर्य ग्रहण 2026 में 17 फरवरी को घटित होने जा रहा है। यह ग्रहण धार्मिक, शास्त्रीय और वैज्ञानिक—तीनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सनातन धर्म में सूर्य ग्रहण को एक विशेष कालखंड माना गया है, जिसमें बाह्य कर्मों की बजाय आत्मचिंतन, मानसिक साधना और दान-पुण्य को श्रेष्ठ बताया गया है। वहीं विज्ञान सूर्य ग्रहण को एक खगोलीय घटना के रूप में देखता है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं।
यह लेख सूर्य ग्रहण 2026 पर वैज्ञानिक तथ्यों, शास्त्रोक्त मान्यताओं, दान-पुण्य के महत्व, कुंभ राशि में ग्रहण के प्रभाव और ग्रहण के बाद किए जाने वाले शुभ उपायों पर को जाने।
🔴 सूर्य ग्रहण 2026 क्या है? (वैज्ञानिक दृष्टि)
विज्ञान के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पूरी तरह या आंशिक रूप से नहीं पहुंच पाता।
सूर्य ग्रहण 2026 एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जिसका सीधा संबंध किसी शुभ-अशुभ से नहीं बल्कि ग्रहों की कक्षीय गति से है।
वैज्ञानिक तथ्य:सूर्य ग्रहण पूर्ण, आंशिक या वलयाकार हो सकता है
यह घटना पूर्णतः पूर्वानुमेय होती है।
इससे पृथ्वी या मानव जीवन पर कोई प्रत्यक्ष भौतिक हानि नहीं होती
विज्ञान इसे एक Astronomical Event मानता है, जबकि धर्म इसे Spiritual Period के रूप में देखता है।

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🕉️ सूर्य ग्रहण 2026: शास्त्रोक्त और धार्मिक दृष्टि
सनातन शास्त्रों में सूर्य को आत्मा, तेज, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास का कारक माना गया है।
मान्यता है कि सूर्य ग्रहण 2026 के दौरान राहु-केतु सूर्य देव को आच्छादित कर लेते हैं, जिससे वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है।
शास्त्रों में मान्य बातें: ग्रहण काल में पूजा-पाठ वर्जित
मंदिरों के पट बंद रखे जाते हैं
भोजन, जल और पकाए गए पदार्थ ग्रहण से प्रभावित माने जाते हैं
मानसिक जप, ध्यान और दान को श्रेष्ठ कहा गया है
🟡 कुंभ राशि में सूर्य ग्रहण 2026 का प्रभाव
सूर्य ग्रहण 2026 कुंभ राशि में लग रहा है, जो शनि की राशि मानी जाती है। इस कारण शनि, सूर्य और राहु-केतु से जुड़े दोषों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक माना गया है।
कुंभ राशि में ग्रहण का संकेत:सामाजिक जीवन में परिवर्तन
कर्म, सेवा और दायित्व से जुड़े विषय सक्रिय
शनि दोष, पितृ दोष और सूर्य दोष के शमन का अवसर

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🟢 ग्रहण के बाद दान का महत्व (शास्त्रीय कारण)
सनातन धर्म के अनुसार, ग्रहण के दौरान नहीं बल्कि ग्रहण समाप्ति के बाद दान करना सर्वाधिक फलदायी होता है।
सूर्य ग्रहण 2026 के बाद किया गया दान ग्रह दोष, पितृ दोष और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को कम करता है।
🟠 सूर्य ग्रहण 2026 के बाद किए जाने वाले श्रेष्ठ दान
🔸 1. सात प्रकार के अनाज का दान
गेहूं, चावल, दालें, तिल, बाजरा आदि का दान
➡️ इससे दरिद्रता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है
🔸 2. गुड़ का दान
सूर्य देव को गुड़ अत्यंत प्रिय है
➡️ सूर्य कमजोर होने पर आत्मविश्वास और करियर में उन्नति
🔸 3. तांबे के बर्तन का दान
तांबा सूर्य का प्रतिनिधि धातु माना जाता है
➡️ कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है
🔸 4. लाल वस्त्र का दान
सूर्य का प्रिय रंग लाल
➡️ स्वास्थ्य लाभ और मंगल दोष में शांति
🔸 5. काले तिल का दान (विशेष)
कुंभ राशि व शनि से संबंध
➡️ शनि दोष और नकारात्मक प्रभाव कम
🔵 ग्रहण, राहु-केतु और नकारात्मक ऊर्जा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के समय राहु-केतु सूर्य को ढक लेते हैं।
इसी कारण:
वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
मानसिक अशांति और अस्थिरता हो सकती है
सूर्य ग्रहण 2026 के बाद दान, स्नान और जप से यह प्रभाव कम होता है।
🟣 वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि का संतुलन
जहां विज्ञान सूर्य ग्रहण 2026 को एक प्राकृतिक खगोलीय घटना मानता है,
वहीं धर्म इसे आत्मशुद्धि और संयम का अवसर मानता है।
👉 दोनों दृष्टियों में विरोध नहीं, बल्कि दृष्टिकोण का अंतर है।
👉 विज्ञान शरीर की रक्षा सिखाता है, धर्म मन और चेतना की।
🟤 ग्रहण के बाद क्या करें?
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
दान-पुण्य करें
सूर्य मंत्र या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
घर की शुद्धि करें
🔶 सूर्य ग्रहण 2026 केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण, दान और सकारात्मक ऊर्जा का अवसर है।
ग्रहण के बाद किया गया सही दान जीवन में संतुलन, शांति और उन्नति का मार्ग खोल सकता है। वैज्ञानिक समझ और शास्त्रीय परंपरा—दोनों का संतुलन ही विवेकपूर्ण दृष्टिकोण है।

🔥 कटवा रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन में आग: हादसा या साजिश? CCTV फुटेज से बढ़ा शक

बर्द्धमान (राष्ट्र की परम्परा)पश्चिम बंगाल के कटवा रेलवे स्टेशन पर तड़के एक पैसेंजर ट्रेन के कोच में लगी भीषण आग ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट मानी जा रही इस घटना में अब नया और गंभीर मोड़ सामने आया है। CCTV फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां दिखने के बाद रेलवे प्रशासन इस घटना को सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि संभावित साजिश के एंगल से भी जांच रहा है।
🚆 कैसे लगी आग?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह करीब 4:30 बजे प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर खड़ी कटवा–अजीमगंज पैसेंजर ट्रेन के एक कोच से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। उस वक्त यात्री अपने सफर की तैयारी कर रहे थे। कुछ ही मिनटों में धुआं आग की तेज लपटों में बदल गया और पूरा कोच जलकर खाक हो गया। सौभाग्य से, समय रहते यात्रियों को हटा लिया गया, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ।
🚒 दमकल और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही Government Railway Police और Railway Protection Force मौके पर पहुंची। दमकल विभाग की दो गाड़ियों ने करीब 1 घंटा 20 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान कुछ समय के लिए ट्रेन सेवाएं प्रभावित रहीं, हालांकि बाद में परिचालन सामान्य कर दिया गया।
🎥 CCTV फुटेज से खुला ‘नया ट्विस्ट’
पहले इस घटना को तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब रेलवे जांच टीम के हाथ CCTV फुटेज लगे हैं, जिनमें आग लगने से ठीक पहले कुछ संदिग्ध हरकतें कैद हुई हैं।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि आग बाहर से जान-बूझकर भी लगाई जा सकती है। अधिकारी इस संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि जांच का दायरा अब और बड़ा कर दिया गया है।
🧪 फॉरेंसिक जांच से खुलेगा राज
सोमवार को फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंचकर जले हुए कोच, प्लेटफॉर्म और आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य जुटा रही है। आग लगने में किसी ज्वलनशील पदार्थ के इस्तेमाल, टाइमिंग और संदिग्ध मूवमेंट की बारीकी से जांच की जा रही है।
रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवराम माझी ने स्पष्ट कहा कि इस घटना को सामान्य दुर्घटना मानकर नहीं देखा जा रहा, बल्कि ‘संदिग्ध एंगल’ से उच्चस्तरीय जांच जारी है।
🚨 सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद कटवा रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन के कोच में आग कैसे लगी?
क्या स्टेशन पर निगरानी और गश्त पर्याप्त थी?
संदिग्ध गतिविधियां समय रहते क्यों नहीं पकड़ी गईं?
इन सभी सवालों के जवाब अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर करेंगे।
📌 कटवा रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन में लगी आग अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि संभावित साजिश के रूप में देखी जा रही है। CCTV फुटेज, फॉरेंसिक जांच और रेलवे की उच्चस्तरीय पड़ताल इस मामले की सच्चाई सामने लाएगी। फिलहाल, रेलवे प्रशासन अलर्ट मोड पर है और स्टेशन की सुरक्षा को और मजबूत किए जाने की बात कही जा रही है।