Friday, March 13, 2026
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BJP Rajya Sabha Candidate List 2026: बीजेपी ने जारी की 9 उम्मीदवारों की पहली सूची, नितिन नवीन और राहुल सिन्हा को टिकट

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। देशभर में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच Bharatiya Janata Party (बीजेपी) ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए अपने 9 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। बिहार, असम और ओडिशा से दो-दो नाम घोषित किए गए हैं, जबकि छत्तीसगढ़, हरियाणा और पश्चिम बंगाल से एक-एक प्रत्याशी को मैदान में उतारा गया है।

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की ओर से जारी इस सूची को आगामी राज्यसभा समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

बिहार से नितिन नवीन और शिवेश कुमार

बीजेपी ने बिहार से पार्टी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। इसे बिहार की राजनीति में पार्टी की रणनीतिक चाल के तौर पर देखा जा रहा है। उनके साथ ही शिवेश कुमार को भी बिहार से टिकट दिया गया है।

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असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से ये नाम

असम से पार्टी ने तेराश गोवाला और जोगेन मोहन को उम्मीदवार बनाया है।
ओडिशा से प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को मौका मिला है।
वहीं पश्चिम बंगाल से बीजेपी ने राहुल सिन्हा को राज्यसभा का टिकट दिया है।

छत्तीसगढ़ और हरियाणा से एक-एक उम्मीदवार

छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा और हरियाणा से संजय भाटिया को उम्मीदवार घोषित किया गया है।

37 सीटों पर होगा चुनाव, 16 मार्च को मतदान

देश के विभिन्न राज्यों से राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव होना है। मतदान 16 मार्च को कराया जाएगा। होली अवकाश के कारण 5 मार्च तक ही नामांकन दाखिल किया जा सकता है। बिहार से 5 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें राज्यसभा उपसभापति Harivansh Narayan Singh समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं।

राज्यसभा चुनाव से पहले बीजेपी की यह सूची राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गई है।

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Manama में फंसे तेलुगु परिवार, युद्ध के बीच बढ़ी चिंता

US–Israel–Iran War के बीच बहरीन की राजधानी Manama में घूमने गए तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के 100 से अधिक तेलुगु परिवार फंस गए हैं। 24 फरवरी को पर्यटक वीजा पर चार दिन के टूर के लिए पहुंचे ये लोग अब होटल और अपार्टमेंट में रुके हुए हैं। अचानक हालात बिगड़ने के बाद फ्लाइट्स रद्द हो गईं, एयरस्पेस बंद कर दिया गया और एयरपोर्ट पर मिसाइल अलर्ट के चलते चेक-इन काउंटर तक बंद कर दिए गए।

हैदराबाद निवासी सॉल्मन राज की अपील

हैदराबाद के रहने वाले सॉल्मन राज ने वीडियो जारी कर केंद्र सरकार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu से तत्काल मदद की गुहार लगाई है।
वीडियो में उन्होंने बताया कि जब वे वापसी के लिए एयरपोर्ट पहुंचे तो आसपास बम और मिसाइलों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। कई यात्रियों को बोर्डिंग पास लेने से पहले ही वापस भेज दिया गया।

उन्होंने कहा:
“हम होटल में रुके हैं, लेकिन पैसे कम पड़ रहे हैं और बुजुर्गों को दवाइयों की जरूरत है। भारत सरकार हमें जल्द सुरक्षित निकाले।”

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दूतावास पर अधूरी जानकारी का आरोप

फंसे हुए पर्यटकों का कहना है कि भारतीय दूतावास से स्पष्ट और विस्तृत जानकारी नहीं मिल पा रही है। उन्हें फिलहाल होटल में रुकने की सलाह दी गई है, लेकिन आगे की निकासी योजना पर कोई ठोस जानकारी साझा नहीं की गई।
पैसे और दवाइयों की कमी से बुजुर्ग और बीमार लोग ज्यादा परेशान हैं।

भारत में भी असर, हैदराबाद से उड़ानें रद्द

मिडिल ईस्ट में एयरस्पेस बंद होने का असर भारत पर भी पड़ा है। Rajiv Gandhi International Airport से कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। इससे यात्रियों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।

तेलंगाना सरकार ने गल्फ देशों में फंसे लोगों के लिए कंट्रोल रूम बनाया है, जबकि आंध्र प्रदेश सरकार एपीएनआरटीएस के जरिए सहायता दे रही है। दोनों राज्य सरकारें केंद्र और विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं।

फिलहाल सुरक्षित, लेकिन वापसी अनिश्चित

हालांकि सभी पर्यटक फिलहाल होटल में सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन हालात सामान्य होने तक उनकी वापसी मुश्किल लग रही है। भारत में बैठे उनके परिवार लगातार चिंता में हैं और जल्द सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे।

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रंग-बिंबों की होली

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  • • नवनीत मिश्र

फागुन आया तो लगा
जैसे सरसों के खेतों ने
पीली धूप ओढ़ ली हो।

आम की बौरों से टपकती
मंद-मंद गंध,
जैसे किसी ने
हवा में चुपके से
मधुर गीत घोल दिया हो।

टेसू के फूल
धधकते अंगारों से लगें,
धरती की हथेली पर
रखे हुए छोटे-छोटे सूरज।

गुलाल उड़ा तो लगा
आकाश ने भी
लालिमा का तिलक लगा लिया हो।

यमुना-सा बहता अबीर,
लहरों-सा हँसता रंग,
पिचकारी जैसे
इंद्रधनुष की पतली धारा।

राधा की चुनरी
भोर की लाली जैसी,
कान्हा की हँसी
कोयल की पहली कूक।

बरसाने की गलियों में
ढोल की थाप,
मानो धरती का हृदय
धड़क रहा हो।

हर चेहरा
खिलता पलाश बन जाए,
हर मन
भीगी मिट्टी की खुशबू-सा महके।

हँसी के छींटे
चाँदी-सी चमकें,
पलकों पर ठहरे रंग
ओस की बूँद जैसे दमकें।

जब शाम ढले
तो लगे,
दिन भर का उत्सव
सिंदूरी सूर्यास्त बन
क्षितिज पर ठहर गया है।

और रात की चाँदनी
रंगों को धीरे-धीरे
सपनों में बदल रही है।

ऐसी हो होली, जहाँ हर बिंब
प्रेम की रेखा से खिंचा हो,
और हर रंग मन के कैनवास पर
एक अमिट चित्र बन जाए।

रंगोंत्सव के इन जीवंत बिंबों संग शुभ होली।

Rajouri Encounter: एलओसी पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम, भारतीय सेना की कार्रवाई

Rajouri Encounter: Indian Army ने मंगलवार तड़के Rajouri district में Line of Control (एलओसी) पर घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। अधिकारियों के अनुसार संदिग्ध आतंकवादी सीमा पार करने का प्रयास कर रहे थे, जिस पर सेना ने जवाबी गोलीबारी की।

सुबह 4:15 बजे दिखे संदिग्ध

अधिकारियों ने बताया कि तड़के करीब 4:15 बजे तुरकंडी अग्रिम क्षेत्र से कुछ संदिग्धों को एलओसी पार करने की कोशिश करते देखा गया।
एलओसी पर तैनात जवानों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गोलीबारी की, जिससे घुसपैठ की कोशिश विफल हो गई।

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इलाके में तलाशी अभियान जारी

घटना के बाद:

• अतिरिक्त बलों को मौके पर भेजा गया
• पूरे इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है
• संदिग्धों की तलाश के लिए घेराबंदी की गई है

अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

पहले भी नाकाम हुई थी घुसपैठ

19-20 फरवरी को भी सेना ने Sunderbani sector में घुसपैठ की कोशिश को विफल किया था। उस कार्रवाई में कुछ हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए थे।

सीमा पर हाई अलर्ट

लगातार हो रही घुसपैठ की कोशिशों के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। एलओसी पर निगरानी बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त तैनाती की गई है।

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Rupee Falls to Record Low: ईरान संकट के बीच रुपया 92.18 पर, कच्चे तेल में उछाल से बाजार दबाव में

पश्चिम एशिया में United States–Iran तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय बाजारों को झटका दिया। बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 69 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.18 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।

रुपया 92.18 पर, 69 पैसे की बड़ी गिरावट

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.05 पर खुला और जल्द ही गिरकर 92.18 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर 91.49 के मुकाबले 69 पैसे की गिरावट दर्शाता है।
मंगलवार को होली के कारण फॉरेक्स बाजार बंद था।

ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर पार

फॉरेक्स कारोबारियों के अनुसार, ईरान संकट के बाद वैश्विक तेल बेंचमार्क Brent Crude की कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। वायदा कारोबार में यह 1.01% बढ़कर 82.22 डॉलर प्रति बैरल पर था।

तेल की कीमतों में तेजी से:

• भारत के आयात बिल पर दबाव
• व्यापार घाटे में बढ़ोतरी की आशंका
• रुपये पर अतिरिक्त दबाव

बढ़ा है। भारत अपनी लगभग 85% ईंधन जरूरत आयात से पूरी करता है।

डॉलर इंडेक्स में मजबूती

छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला U.S. Dollar Index 0.03% बढ़कर 99.08 पर कारोबार कर रहा था, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव और बढ़ा।

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शेयर बाजार भी लुढ़का

घरेलू इक्विटी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई:

• BSE Sensex 1,671.39 अंक (2.08%) टूटकर 78,567.46 पर

• Nifty 50 502.35 अंक (2.02%) गिरकर 24,363.35 पर

एक्सचेंज आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 3,295.64 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो:

• महंगाई बढ़ सकती है
• चालू खाते का घाटा (CAD) बढ़ सकता है
• रुपये में और कमजोरी संभव है

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर फिलहाल भारतीय मुद्रा और शेयर बाजार दोनों पर साफ दिख रहा है।

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ईरान में सत्ता का वारिस? मोजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर, वंशवाद पर उठे सवाल

पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच Iran से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। तेहरान की Assembly of Experts ने 56 वर्षीय Mojtaba Khamenei को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना है।
मोजतबा, पूर्व सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei के सबसे बड़े बेटे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका चयन Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के प्रभाव और समर्थन के बीच हुआ।

फैसले पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

मोजतबा खामेनेई का चयन कई राजनीतिक और धार्मिक बहसों को जन्म दे रहा है:

• ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक ने हमेशा वंशानुगत शासन (Hereditary Rule) की आलोचना की है।
• देश खुद को एक “धार्मिक लेकिन निर्वाचित संरचना” के रूप में प्रस्तुत करता रहा है।
• शिया धार्मिक परंपरा में पिता से बेटे को सीधे सर्वोच्च सत्ता सौंपना सामान्य परंपरा नहीं मानी जाती।
• बताया गया है कि पिछले वर्ष अली खामेनेई ने जिन संभावित उत्तराधिकारियों की सूची बनाई थी, उसमें मोजतबा का नाम शामिल नहीं था।

इन कारणों से यह फैसला देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की भूमिका

ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि धार्मिक विद्वानों की संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करती है। यह संस्था देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक पद पर नियुक्ति का अधिकार रखती है।
हालांकि, इस बार चयन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और स्वतंत्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, खासकर IRGC के संभावित दबाव की खबरों के कारण।

क्षेत्रीय और वैश्विक असर

पश्चिम एशिया में पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच नेतृत्व परिवर्तन का असर:

• ईरान की आंतरिक राजनीति पर
• क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर
• अमेरिका और इजराइल के साथ संबंधों पर
• खाड़ी देशों की रणनीति पर
पड़ सकता है।

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Israel-US Iran War: तेहरान और उर्मिया में फंसे भारतीय छात्र, हर पल दुआ कर रहे परिवार

Israel-US Iran War: Israel-United States और Iran के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने भारत में कई परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर वे अभिभावक जिनके बच्चे तेहरान, कोम और उर्मिया जैसे शहरों में पढ़ाई कर रहे हैं, लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।

सोशल मीडिया, टीवी और अखबारों के जरिए हालात पर नजर रखी जा रही है। बमबारी की खबरों से परिजन व्याकुल हैं, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें भारत सरकार पर पूरा भरोसा है कि जरूरत पड़ने पर उनके बच्चों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जाएगा।

कोम में पढ़ रहे सलमान रजा, परिवार की बढ़ी चिंता

जामिया नगर निवासी कमर अब्बास ने बताया कि उनका बेटा सलमान रजा (28) वर्ष 2019 से ईरान के कोम शहर में पढ़ाई कर रहा है। शनिवार को जब हमलों की खबर आई तो परिवार घबरा गया।

शुरुआत में संपर्क नहीं हो पाया क्योंकि इंटरनेट सेवा बाधित थी। बाद में सलमान ने बताया कि शहर में बमबारी की आवाजें सुनाई दे रही हैं, लोग सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं और प्रशासन ने छात्रों को हॉस्टल के अंदर रहने की सलाह दी है।

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संचार व्यवस्था प्रभावित, लेकिन हौसला बरकरार

ओखला विहार के मौलाना कमर हुसैन का बेटा मुर्तुजा (25) भी कोम में इस्लामिक पढ़ाई कर रहा है। जंग के बीच कई बार संपर्क की कोशिश नाकाम रही। मंगलवार को बातचीत होने पर बेटे ने परिवार को भरोसा दिलाया कि स्थानीय लोग मदद कर रहे हैं और हालात पर नजर रखी जा रही है।

उर्मिया में मेडिकल की छात्रा मरियम

त्रिलोकपुरी निवासी हुस्ना खान की बेटी मरियम 12वीं के बाद ईरान के उर्मिया शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। हालात को लेकर मां की चिंता बढ़ी हुई है।
बेटी से संपर्क होने पर वह उसे हिम्मत देती हैं और दुआ करती हैं कि सब कुछ जल्द सामान्य हो जाए। उन्हें भरोसा है कि भारत सरकार जरूरत पड़ने पर छात्रों को सुरक्षित वापस लाएगी।

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तेहरान में फंसे मोहम्मद आसिफ

नाला सोपारा, मुंबई के डॉक्टर अली के बेटे मोहम्मद आसिफ अली डॉक्टर बनने का सपना लेकर तेहरान गए हैं। परीक्षा के कारण वह रमजान में घर नहीं आ सके।
युद्ध की खबर के बाद परिवार बेचैन हो गया। 24 घंटे बाद जब संपर्क हुआ तो राहत मिली। परिवार ने ईरान स्थित भारतीय दूतावास से भी संपर्क कर सहायता की गुहार लगाई है।

सरकार पर भरोसा

इन सभी परिवारों का कहना है कि भले ही हालात गंभीर हों, लेकिन उन्हें भारत सरकार पर भरोसा है कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी (evacuation) की व्यवस्था की जाएगी।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय परिवार अपने बच्चों की सलामती की दुआ कर रहे हैं और हर पल संपर्क बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

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US-Iran युद्ध: Donald Trump का बचाव — “अगर हमने पहले कार्रवाई नहीं की होती, तो वे हमला कर देते”

वॉशिगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने Iran पर हालिया अमेरिकी सैन्य हमलों का जोरदार बचाव किया है। ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई “रक्षा के लिए जरूरी” थी, क्योंकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से संकेत मिले थे कि तेहरान पहले हमला करने की तैयारी कर रहा था।

उनके मुताबिक, यदि अमेरिका ने पहले कदम नहीं उठाया होता तो हालात परमाणु युद्ध तक पहुंच सकते थे।

पश्चिम एशिया में चौथे दिन भी तनाव बरकरार

28 फरवरी को अमेरिका और Israel की ओर से किए गए हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबर सामने आई।
इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ गई है।

‘एक महीने में परमाणु हथियार’ का दावा

व्हाइट हाउस में जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि बातचीत जारी थी, लेकिन उन्हें आशंका थी कि ईरान अचानक हमला कर सकता है।

ट्रंप ने दावा किया कि:

• ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में पहुंच सकता था।
• ईरान की सरकार “खतरनाक और चरमपंथी विचारधारा” से प्रेरित है।
• पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama का परमाणु समझौता “सबसे खराब डील” था, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में समाप्त कर दिया।

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‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और सैन्य प्रभाव

ट्रंप ने सैन्य अभियान का नाम ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ बताया। उनके अनुसार इस कार्रवाई से:

• ईरान की मिसाइल क्षमता को बड़ा झटका लगा

• एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर हुआ

• सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा

ट्रंप ने दावा किया कि अब ईरान की ताकत काफी कमजोर हो चुकी है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दावे पर बहस जारी है।

खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता

ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद निम्न देशों में भी हालात तनावपूर्ण हैं:

• Bahrain
• Qatar
• Saudi Arabia
• United Arab Emirates

इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने से आम नागरिकों और प्रवासी कामगारों में चिंता बढ़ गई है।

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अगया मौन नाले में मिला अज्ञात शव, दहशत में ग्रामीण

पहचान बनी पहेली, हर पहलू से जांच में जुटी पुलिस

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के अगया नहर में मंगलवार दोपहर एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना भिटौली थाना क्षेत्र के मौन बहाव नाले की बताई जा रही है। दोपहर बाद कुछ ग्रामीण जब नहर किनारे पहुंचे तो पानी में एक शव उतराता दिखाई दिया। यह दृश्य देखते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और कुछ ही देर में मौके पर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शव कई घंटों से पानी में बह रहा प्रतीत हो रहा था। ग्रामीणों ने तुरंत गांव के चौकीदार भभूती को सूचना दी, जिन्होंने तत्परता दिखाते हुए पुलिस को अवगत कराया। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष मदन मोहन मिश्रा व चौकी प्रभारी अवधेश सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से शव को मौन नाले से बाहर निकलवाया। इसके बाद विधिवत पंचनामा भरकर शव को कब्जे में लिया गया, और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल स्थित मर्चरी हाउस भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर आस-पास के क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया, ताकि किसी प्रकार के संघर्ष या संदिग्ध गतिविधि के संकेत मिल सकें।
समाचार लिखे जाने तक मृतक की पहचान नहीं हो सकी थी। मृतक की आयु लगभग 35 से 45 वर्ष के बीच आंकी जा रही है। उसके शरीर पर किसी स्पष्ट बाहरी चोट के निशान की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस आस-पास के थानों से संपर्क कर गुमशुदगी के मामलों का मिलान कर रही है।
घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ लोग इसे दुर्घटना मान रहे हैं तो कुछ अन्य आशंका जता रहे हैं कि मामला संदिग्ध भी हो सकता है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत का राज खुलेगा।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति की गुमशुदगी की जानकारी हो तो तत्काल भिटौली थाना से संपर्क करें। फिलहाल पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है और जल्द ही घटना से जुड़े तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

ज्यूडिशियल काउंसिल ने मानवीय निकासी गलियारे की तत्काल स्थापना की मांग की

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा)
ज्यूडिशियल काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को औपचारिक पत्र लिखकर मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष क्षेत्रों में फंसे नागरिकों को बचाने हेतु सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में मानवीय निकासी गलियारे (ह्यूमैनिटेरियन इवैक्युएशन कॉरिडोर) की तत्काल स्थापना का आग्रह किया है।
अपने अत्यंत महत्वपूर्ण ईमेल द्वारा भेजे गए पत्र में ज्यूडिशियल काउंसिल ने संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी शत्रुता के कारण बिगड़ती मानवीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। काउंसिल ने चेतावनी दी कि लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई के चलते लाखों निर्दोष नागरिक—जिनमें विदेशी नागरिक, प्रवासी श्रमिक, छात्र तथा असहाय परिवार शामिल हैं—तत्काल खतरे में हैं।

पत्र में संयुक्त राष्ट्र से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया गया है

नागरिकों की सुरक्षित निकासी हेतु अस्थायी मानवीय युद्धविराम की घोषणा और उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

ज्यूडिशियल काउंसिल के अध्यक्ष राजीव अग्निहोत्री ने लिखा “ संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक निष्पक्ष निकासी गलियारा स्थापित किया जाए, जिसे किसी भी सैन्य कार्रवाई से संरक्षित रखा जाए।

निकासी की व्यवस्थाओं के समन्वय के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और मानवीय एजेंसियों को तैनात किया जाए।

स्वदेश लौटने के इच्छुक विदेशी नागरिकों के लिए सुरक्षित वायु और समुद्री मार्ग सुनिश्चित किए जाएं।

अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के लिए सभी युद्धरत पक्षों को जवाबदेह ठहराया जाए।“

ज्यूडिशियल काउंसिल ने जोर देकर कहा कि मानवीय सिद्धांतों को भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धाओं से ऊपर रखा जाना चाहिए। काउंसिल ने कहा, “युद्ध को मानवता की आवाज दबाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। राष्ट्रों के रणनीतिक टकराव में नागरिक कभी भी ‘कोलैटरल डैमेज’ नहीं बन सकते।”

काउंसिल को प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार हजारों नागरिक पर्याप्त चिकित्सा सुविधा, खाद्य सामग्री और सुरक्षित आश्रय के बिना फंसे हुए हैं। विशेष रूप से छात्र, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अत्यंत चिंताजनक स्थिति में हैं, जिनके पास सुरक्षित निकासी के स्वतंत्र साधन उपलब्ध नहीं हैं।

काउंसिल ने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सिद्धांतों के तहत सशस्त्र संघर्ष के समय नागरिकों की रक्षा करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है। सुरक्षित निकासी तंत्र स्थापित करने में विफलता नैतिक और कूटनीतिक लापरवाही के समान होगी।

ज्यूडिशियल काउंसिल ने महासचिव से यह भी आग्रह किया कि वे संबंधित संयुक्त राष्ट्र निकायों की आपात बैठक बुलाएं, ताकि राजनीतिक वार्ताओं से स्वतंत्र होकर केवल नागरिक सुरक्षा पर केंद्रित तत्काल मानवीय हस्तक्षेप को अधिकृत किया जा सके।

काउंसिल के वक्तव्य में कहा गया, “अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता संकट के समय निर्णायक कार्रवाई करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करती है। इतिहास वैश्विक नेतृत्व का आकलन चिंता व्यक्त करने वाले बयानों से नहीं, बल्कि जीवन बचाने के लिए उठाए गए ठोस कदमों से करेगा।”

काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से भी अपील की है कि वे इस निकासी पहल का समर्थन करें—जिसमें लॉजिस्टिक सहायता, हवाई क्षेत्र की अनुमति, आवश्यक होने पर नौसैनिक सुरक्षा और विस्थापित व्यक्तियों के लिए आपातकालीन वीजा सुविधा शामिल है।

न्याय, शांति और मानवीय संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए ज्यूडिशियल काउंसिल ने घोषणा की कि वह स्थिति पर लगातार नजर रखेगी और यह सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ संवाद जारी रखेगी कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।

“मानवता को शत्रुता पर विजय प्राप्त करनी ही होगी। निर्दोष जीवन दांव पर लगे

जी.एम. एकेडमी, बरहज को सीबीएसई से 10+2 की मिली मान्यता

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
शिक्षा के क्षेत्र में यह अत्यंत हर्ष और गौरव की बात है कि जी.एम. एकेडमी, बरहज को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), नई दिल्ली द्वारा सीनियर सेकेंडरी (10+2) स्तर की मान्यता प्रदान की गई है। विद्यालय को संबद्धता संख्या 2134628 तथा स्कूल कोड 72441 आवंटित किया गया है।
यह उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र के लिए एक नई क्रांति के रूप में देखी जा रही है। अब यहां के विद्यार्थियों को 10+2 की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त करने के लिए शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे समय, धन और ऊर्जा की बचत होगी तथा अभिभावकों को भी सुविधा मिलेगी।
यह सफलता विद्यालय प्रबंधन, प्रधानाचार्य, शिक्षकों एवं समस्त कर्मचारियों के निरंतर प्रयास, समर्पण और दूरदर्शिता का परिणाम है। साथ ही अभिभावकों एवं क्षेत्रवासियों के सहयोग और विश्वास ने भी इस उपलब्धि को संभव बनाया है।विद्यालय प्रबंधन ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर सभी सहयोगियों, अभिभावकों एवं शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त किया है तथा भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने का संकल्प दोहराया है।

रंगों की फुहार में सराबोर हुआ जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब

होली मिलन समारोह में झलकी एकता, उत्साह और आत्मीयता

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब परिसर में आयोजित होली मिलन समारोह हर्षोल्लास और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। रंगों की बौछार, अबीर-गुलाल की खुशबू और आत्मीय मुस्कानों के बीच पत्रकारों ने एक-दूसरे को गले लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। आयोजन ने औपचारिकता की दीवारों को तोड़ते हुए आत्मीयता और भाई-चारे का सुंदर संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, समरसता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का सजग प्रहरी होता है और ऐसे आयोजन आपसी संवाद व समन्वय को मजबूत करते हैं। उन्होंने सभी पत्रकारों से निष्पक्ष, निर्भीक और जनहित की पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान पारंपरिक फाग गीतों ने माहौल को पूरी तरह रंगीन बना दिया। वरिष्ठ पत्रकार शैलेश पाण्डेय की अगुवाई में जब फाग की तान छिड़ी तो पूरा परिसर तालियों और ठहाकों से गूंज उठा। ढोलक की थाप और गीतों की मधुरता ने सभी को उत्साहित कर दिया। पत्रकारों ने भी सुर में सुर मिलाकर आयोजन को जीवंत बना दिया।
रंगों के उत्सव के बाद सभी ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर होली की बधाई दी। पारंपरिक व्यंजनों और चाय के साथ अनौपचारिक बातचीत का दौर चलता रहा। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे युवा पत्रकारों को मार्गदर्शन और प्रेरणा मिली।
इस अवसर पर क्लब के संरक्षक रविन्द्र यादव, सुनील श्रीवास्तव, जेपी सिंह ,नीरज श्रीवास्तव, आरएन शर्मा, अनिल वर्मा, विपिन श्रीवास्तव, विनोद गुप्ता, नवीन मिश्रा, डॉ. सतीश पाण्डेय, सुनील यादव, रविन्द्र पाण्डेय, संतोष शर्मा, पल्लवी त्रिपाठी, धर्मेंद्र गुप्ता, बीडी यादव, अभिषेक श्रीवास्तव, प्रभात जायसवाल, अजय पाण्डेय,मार्तंड गुप्ता, बृजेन्द्र उर्फ आकाश पाण्डेय, राकेश प्रजापति, परमेश्वर गुप्ता, अंकित पाण्डेय, गुलाम गौस, कमलेश प्रजापति एवं सतेंद्र तिवारी सहित जिले के अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।
होली मिलन समारोह ने यह साबित कर दिया कि रंगों का यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि रिश्तों को सहेजने और संगठन को सशक्त बनाने का माध्यम भी है। आयोजन ने पत्रकारों के बीच आपसी विश्वास, सहयोग और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।

सुखपुरा थाने की फोर्स लेकर क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में बसंतपुर पहुंची पुलिस टीम, लेकिन बैरंग ही वापस लौटना पड़ा – अवैध शराब कारोबारी मौके से फरार

सुखपुरा /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

पिछले दिनों बसंतपुर गांव में शराब के नशे में एक व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी की निर्मम हत्या किए जाने की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। इस दर्दनाक घटना से आक्रोशित होकर गांव की सैकड़ों महिलाओं ने स्वयं आगे बढ़कर अवैध शराब की भट्ठियों पर धावा बोला और शराब बनाने के उपकरणों को तोड़कर नष्ट कर दिया था। इस साहसिक कदम की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया। को होली से एक दिन पूर्व क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में सुखपुरा थाने की पुलिस फोर्स ने बसंतपुर गांव पहुंचकर अवैध शराब कारोबार के संभावित स्थानों पर दबिश दी। हालांकि पुलिस टीम को मौके पर कोई अवैध सामग्री नहीं मिली और कथित शराब कारोबारी पहले ही फरार हो चुके थे। कार्रवाई के दौरान गांव में भारी पुलिस बल की मौजूदगी से आम जनता ने राहत की सांस ली।
गांव की महिलाओं का कहना है कि अवैध शराब के कारोबार के कारण उन्हें और उनके बच्चों को आए दिन शराबियों के उत्पात का सामना करना पड़ता है। घरेलू हिंसा की घटनाएं आम हो गई थीं। बीते कुछ वर्षों में छह-सात लोगों की मौत भी कथित रूप से जहरीली शराब के सेवन से हो चुकी है। इससे त्रस्त होकर महिलाओं ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए शराबबंदी की मुहिम शुरू की। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि शराब कारोबारी खुलेआम कारोबार करते हैं और रोकने पर धमकी देते हैं। यहां तक कि वे प्रशासन को प्रतिमाह रुपये देने की बात कहकर उल्टा फंसाने की चेतावनी भी देते थे। महिलाओं के आंदोलन को देखते हुए गांव के संभ्रांत लोग और ग्राम प्रधान भी उनके समर्थन में सामने आए। ग्राम प्रधान ने पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग से फोन पर शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी।थाना सुखपुरा के प्रभारी निरीक्षक रत्नेश दुबे ने बताया कि अवैध शराब के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी सूरत में इस तरह का कारोबार क्षेत्र में नहीं चलने दिया जाएगा।ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन की सख्ती से गांव में शांति और सुरक्षित माहौल स्थापित होगा, ताकि महिलाएं और बच्चे भयमुक्त जीवन जी सकें।

मंडल रेल प्रबंधक ने रेलवें जुड़े सभी लोगो को होली की शुभकामनाएं दी

वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)
रेलवे का वाराणसी मंडल प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील है। होली त्यौहार को ध्यान में रखते हुए मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन ने जनसामान्य से अपील है कि चलती गाड़ी पर गोबर, कीचड़, पत्थर आदि न फेकें। इससे लोको पायलट/गार्ड, यात्री एवं रेलकर्मी घायल हो सकते है। स्टेशन एवं गाड़ियों में स्वच्छता बनाये रखने में रेल प्रशासन को सहयोग करें। यात्रीगण गाड़ियों की छत, कप्लिंग पर बैठकर अथवा पावदान पर लटक कर यात्रा न करें।
स्टेशन पर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिये पैदल उपरिगामी पुल का उपयोग करें। यात्रा के दौरान विस्फोटक एवं ज्वलनशील पदार्थो के साथ लेकर यात्रा न करें तथा किसी भी अपरिचित व्यक्ति से खाद्य सामग्री स्वीकार न करें, इसमें जहर मिला हो सकता है। अपने यात्रा टिकट हेतु दलालों के चंगुल में न फॅसे, यात्रा टिकट सदैव रेलवे टिकट काउन्टर अथवा आई.आर.सी.टी.सी. के वेबसाइट या आई.आर.सी.टी.सी. के अधिकृत एजेन्ट से प्राप्त करें।
प्रमुख नगरों यथा अम्बाला,वलसाड,बांद्रा,आनंद विहार,पुणे,लोकमान्य तिलक टर्मिनल,गोंदिया एवं मुबई सेन्ट्रल इत्यादि के लिये होली विशेष गाड़ियों का संचलन किया जा रहा है। इन गाड़ियों में बर्थ आरक्षित करा कर अपनी यात्रा को सुखद बनावें। यात्रा के दौरान किसी भी सहायता के लिये हेल्प लाइन नम्बर 139 डायल करें। होली विशेष गाड़ियों की जानकारी वाराणसी मंडल के सोशल मीडिया हैंडल एवं रेल वन एप पर उपलब्ध है।

महराजगंज: 8 महीने से वेतन बंद, सड़क पर उतरे ग्राम रोजगार सेवक

होली से पहले भीख मांगो आंदोलन, प्रशासन की चुप्पी पर फूटा जबरदस्त आक्रोश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में विकास योजनाओं की रीढ़ माने जाने वाले ग्राम रोजगार सेवक अब खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर हो गए हैं। विकासखंड सदर के सैकड़ों ग्राम रोजगार सेवक मंगलवार मंगल को सड़क पर उतर आए और होली से ठीक एक दिन पहले भीख मांगो आंदोलन छेड़ कर प्रशासनिक तंत्र को खुली चुनौती दे डाली।

उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष ब्रह्मानंद द्वारा 03 मार्च 2026 को जारी हस्तलिखित पत्र के बाद यह विरोध खुलकर सामने आया। आरोप है कि पिछले आठ महीनों से मानदेय भुगतान पूरी तरह बंद है। बार-बार गुहार के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो ग्राम रोजगार सेवकों ने विकास खंड सदर से जिला सूचना कार्यालय महराजगंज तक दुकानों पर भिक्षाटन कर अपना विरोध दर्ज कराया।

ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि वे मनरेगा सहित तमाम सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कराते हैं, गांवों में विकास की गाड़ी खींचते हैं, लेकिन उनके अपने घरों में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। होली जैसे पावन पर्व पर बच्चों के लिए अबीर- गुलाल तक खरीदना दूभर हो गया है।

कई ग्राम रोजगार सेवकों ने भावुक होकर कहा कि बच्चों की फीस बकाया है, परिवार के सदस्य दवाईयों के लिए तरस रहे हैं और सामाजिक सम्मान दांव पर लगा है। पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है कि कई बार संबंधित अधिकारियों और जन-प्रतिनिधियों से संपर्क किया गया, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। आरोप है कि फाइलों को जान- बूझकर लंबित रखकर मामला टाला जा रहा है।

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ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि जब मेहनताना ही न मिले तो सम्मान जनक जीवन कैसे जिया जाए? भीख मांगना उनकी मजबूरी है, शौक नहीं।
आंदोलन को नैतिक आधार देते हुए ग्राम रोजगार सेवकों ने घोषणा की है कि भिक्षाटन से जो भी धनराशि एकत्र होगी, उसे प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा किया जाएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करने के लिए है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कर्मचारी आठ महीने से बिना वेतन कार्य कर रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं हो रही? क्या शासन को जमीनी स्तर पर काम कर रहे इन कर्मियों की हालत का अंदाजा नहीं? होली जैसे प्रमुख पर्व से पहले कर्मचारियों का सड़कों पर उतरना प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।

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इस दौरान इंद्रमणि विश्वकर्मा (जिला महासचिव), संतोष कुमार गुप्ता, धर्मेंद्र, ओमप्रकाश आर्य, रमेश सिंह, अरविंद कुमार, ओम प्रकाश सिंह, सर्वेश कुमार, घनश्याम वर्मा, अंबिका प्रसाद, कमलेश कुमार यादव, जितेंद्र चौहान, चिन्नू प्रसाद, सुरेश प्रसाद, अमरनाथ, रविंद्र कुमार गुप्ता, राजेश तिवारी, दयानंद, चंद्रिका, योगेंद्र साहनी, प्रमोद राय, प्रमोद विश्वकर्मा, अनिरुद्ध, बाबूराम सहित भारी संख्या में ग्राम रोजगार सेवकों ने भिक्षाटन कर आक्रोश जताया।

ग्राम रोजगार सेवकों ने साफ कहा है कि यदि शीघ्र मानदेय भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो जिला मुख्यालय पर धरना- प्रदर्शन की रणनीति बनाई जाएगी।अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं—क्या संवेदनशीलता दिखाते हुए लंबित मानदेय जारी किया जाएगा या फिर विकास योजनाओं की धुरी माने जाने वाले कर्मियों को सड़कों पर ही अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ेगी?

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