परसिया भगवती में भागवत कथा का आयोजन:महराज ने कृष्ण की मृद भक्षण लीला का किया वर्णन

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)मगहरा के परसिया भगवती में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन परमपूज्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल चरित्र का मनोहारी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब भी भगवान धरती पर अवतरित होते हैं, प्रकृति स्वयं अद्भुत रूप से सज जाती है। नदियां, आकाश, अग्नि, भूमि और वायु सभी निर्मल हो जाते हैं, जिससे ब्रजवासियों को परम आनंद की अनुभूति होती है।

श्री ब्रजेश मणि ने बताया कि भगवान के जन्म के बाद छह दिनों तक उत्सव मनाया गया। इसके उपरांत पूतना, शकटासुर और छह महीने की अवस्था में तृणावर्त जैसे विघ्नों का उद्धार कर भगवान श्रीकृष्ण ने यह संदेश दिया कि दिव्य शक्ति अपने आरंभिक जीवन से ही धर्म की स्थापना में संलग्न हो जाती है।
इस अवसर पर उन्होंने श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध ‘मृद भक्षण लीला’ का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के अनुसार, एक दिन बालकृष्ण अपने सखाओं और बलराम के साथ खेलते हुए मिट्टी खा लेते हैं। सखाओं की शिकायत पर माता यशोदा उन्हें डांटती हैं। कृष्ण मासूमियत से इनकार करते हुए अपना मुख खोलने को कहते हैं।

जब माता यशोदा ने उनका मुख देखा, तो उसमें संपूर्ण ब्रह्मांड—सप्त द्वीप, सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्र, आकाश और स्वयं को भी देखकर स्तब्ध रह गईं। इस अद्भुत दृश्य से यशोदा मैया भयभीत हो गईं, लेकिन भगवान ने अपनी वैष्णवी माया से उन्हें पुनः सब कुछ भुला दिया, जिससे वे उन्हें अपने पुत्र रूप में ही स्नेह करती रहीं।

कथावाचक परमपूज्य ब्रजेश मणि ने इस लीला के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रसंग दर्शाता है कि परमात्मा, जो पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हैं, वे भक्तों के प्रेम के वशीभूत होकर एक साधारण बालक का रूप धारण कर लेते हैं।

उन्होंने जोर दिया कि मिट्टी खाने जैसी साधारण घटना के भीतर ब्रह्मांड का दर्शन यह संदेश देता है कि सृष्टि का कण-कण ईश्वर का ही स्वरूप है। अंत में, आचार्य त्रिपाठी ने कहा कि सच्ची भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि स्वयं ब्रह्मांड नायक भी भक्त के प्रेम में बंध जाते हैं।
इस अवसर पर यजमान इंद्रावती देवी, गौरीशंकर पाण्डेय, माधुरी देवी, रविप्रताप पाण्डेय,राजेश दूबे,चंदन पाण्डेय, राकेश सिंह, ग्राम प्रधान बसंत कुमार आदि मौजूद रहे।

rkpnews@somnath

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