जिस प्रकार छोटी छोटी आंखे सारा
आसमान देखने की ताक़त रखतीं हैं,
वैसे ही जीवन में विषमतायें होने पर,
भी ज़िन्दगी ख़ुशनुमा बन सकती है।
जिसमें जीवन जीने की चाहत होती है,
उसके सारे ग़म ख़ुशी में बदल जाते हैं,
जिसमें मुस्कुराने की आदत होती है, उसकी सारी दुनिया जन्नत होती है।
जीवन ख़ूबसूरत एहसास होता है,
किसी की ख़ुशी का कारण बन जाना,
अपनी ज़िन्दगी को ख़ुशहाल रखना,
औरों का जीवन भी खुशहाल बनाना।
जीवन के उपरांत मायने ये रखता है
मैंने क्या किया है,न कि क्या पाया है,
हमारी प्रवीणता नहीं, हमारा चरित्र,
हमारी सफलता नहीं, हमारा महत्व।
ढेरों फूल मिलकर पुष्पहार बनाते हैं,
दीपक, बाती मिल आरती सजाते हैं,
कई नदियों के जल से सागर बनता है,
स्त्री के समर्पण से घर स्वर्ग बनता है।
मानव जीवन में उसके आचार
एवं व्यवहार वह दर्पण होते हैं,
जिनके द्वारा उसकी खुद की छवि
का प्रदर्शन उसे स्वयं होता रहता है।
विचारों की अच्छाइयाँ कहीं से मिलें
उन्हें स्वीकार करना अच्छा होता है,
क्योंकि शारीरिक ख़ूबसूरती उम्र के
साथ ही बदलती व घटती रहती है।
विचारों की ख़ूबसूरती तो हमेशा
लोगों के हृदय में घर कर जाती है,
जीवन पर्यंत ही नहीं आदित्य जीवन
के उपरांत भी क़ायम यह रहती है।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
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