बलिया(राष्ट्र की परम्परा)पंदह ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले पंदह, खेजुरी और पूर—इन तीनों पशु चिकित्सा केंद्रों की हालत पिछले चार वर्षों से लगातार दयनीय बनी हुई है। कोरोना काल में तैनात पशु चिकित्सकों के स्थानांतरण के बाद आज तक किसी स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो सकी है। नतीजतन ये अस्पताल नाम मात्र के रह गए हैं और ग्रामीण क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को उपचार व योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। एक ही डॉक्टर के भरोसे पूरा ब्लॉक
वर्तमान में तीनों अस्पतालों का संचालन एक ही पशु चिकित्सक के सहारे हो रहा है।
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कार्यभार संभाल रहे चिकित्सक डॉ. सुनील कुमार के अनुसार कर्मचारियों की भारी कमी के कारण सप्ताह के अलग-अलग दिनों में तीनों केंद्रों पर बैठना पड़ रहा है। ऐसे में प्रत्येक अस्पताल पर नियमित सेवाएं संभव नहीं हो पातीं। पूर पशु अस्पताल सप्ताह में केवल एक दिन खुलता है, और वह भी अधिकांश पशुपालकों को जानकारी न होने से
खाली ही गुजर जाता है।
मूलभूत सेवाएं ठप, बीमार पशुओं पर संकट
पशुपालकों का कहना है कि अस्पतालों में डॉक्टर न होने की वजह से टीकाकरण, डीवर्मिंग, मल्टी-विटामिन और रोगों की पहचान जैसी बुनियादी सेवाएं बंद हैं। बरसात के मौसम में फुट एंड माउथ, ब्लैक क्वॉर्टर और गलघोटू जैसी संक्रामक बीमारियों से कई पशुओं की मौत हो चुकी है। इलाज के अभाव में बीमारी फैलने का खतरा और बढ़ गया है।
गर्भाधान योजना पूरी तरह प्रभावित
सरकार द्वारा संचालित उन्नतिशील गर्भाधान योजना भी बाधित है। पशुपालकों का कहना है कि योग्य चिकित्सक और तकनीशियन न होने के कारण कई वर्षों से कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा लगभग बंद पड़ी है। इससे दूध उत्पादन, पशुधन संवर्धन और पशुपालकों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
शिकायतों के बाद भी हालात जस के तस
स्थानीय लोगों ने कई बार संबंधित अधिकारियों, जिलाधिकारी तथा मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकारी फाइलों में दर्ज शिकायतें वास्तविक सुधार में तब्दील नहीं हो पा रही हैं। पशुपालकों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। एंबुलेंस ही एकमात्र सहारा
चिकित्सक डॉ. सुनील कुमार बताते हैं कि आपात स्थिति में केवल 1962 पशु एंबुलेंस ही सहारा बनती है, लेकिन यह सेवा भी कभी-कभी उपलब्ध न होने के कारण पशुपालकों को निजी चिकित्सकों के पास महंगे इलाज के लिए जाना पड़ता है।
निष्कर्ष कुल मिलाकर पंदह ब्लॉक के सभी पशु चिकित्सा केंद्र भगवान भरोसे चलते दिखाई देते हैं। डॉक्टरों की कमी, अव्यवस्था और उपेक्षा के कारण पशुपालकों की आजीविका और पशुधन सुरक्षा दोनों पर गंभीर संकट मंडरा रहा है
