देश भर से आए संतों ने कराया मानस रसपान
बरहज/देवरिया(राष्ट्र क़ी परम्परा)
नगर के श्रीकृष्ण इण्टर कॉलेज आश्रम बरहज, के प्रांगण में आयोजित पूज्य पाद योगीराज अनंत महाप्रभु के 250वीं जयंती महोत्सव के प्रथम दिन के सायंकालीन सभा में देश के कोने-कोने से आए मूर्धन्य मनीषियों और कथावाचकों द्वारा दिव्य कथा की सरिता बहाई गई। संपूर्ण परिसर देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के जयकारों और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया।मंगलाचरण और कथा का शुभारंभ मुख्य उद्घोषक पं. परशुराम पाण्डेय द्वारा वैदिक मंगलाचरण से हुआ, उसके बाद पांडाल में उपस्थित भक्तजन भक्ति के सागर मदमस्त हो गए।
कथा का विधिवत आरंभ आजमगढ़ से पधारे कथा वाचक उमेश सिंह ने किया, जिन्होंने अपनी सुमुधुर वाणी से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात बलिया से आए कथा के प्रख्यात विद्वान अरविन्द तिवारी ने ब्यास पीठ से प्रभु महिमा का सुंदर
व्याख्यान प्रस्तुत किये जिसे सुनकर श्रोतागण भक्ति के सागर मे लीन हो गए।
कथा को आगे बढ़ाते हुए आजमगढ़ से आये सुरेश मिश्र ने रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई—”चातक कोकिल कीर चकोरा। कूजत बिहग नटत कल मोरा॥” पर अपना अत्यंत सरस और मार्मिक व्याख्यान प्रस्तुत किया। वहीं कथा व्यास श्यामनारायण शाही ने “हरि अनंत हरि कथा अनंता” प्रसंग पर बोलते हुए ईश्वर की असीम सत्ता और उनकी लीलाओं की अनंतता को रेखांकित किया।बक्सर धाम (बिहार) से पधारे अनिल शास्त्री ने संतों की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि—”आग लगी आकाश में झरी झरी पावै संत, संत न होते जगत में तो जल मरता संसार।” उनके इस ओजस्वी वक्तव्य को सुनकर पूरा पंडाल करतल ध्वनि से गूंज उठा। देश के कोने-कोने से जुटे कथा महोत्सव के इस प्रथम दिन की पावन अवसर पर मऊ से पं. हरिओम शाण्डिल्य, छपरा से विद्याभूषण महाराज, आंबेडकरनगर से रामशरणदास, बलिया से बालानन्द शास्त्री, मीरजापुर से श्यामल मिश्र, सासाराम (बिहार) से जयप्रकाश शास्त्री एवं अंगद द्विवेदी ने ब्यास पीठ से भक्तों को कथा श्रवण कराया ।
महिला कथावाचिकाओं क़ी सभा में मातृशक्ति का भी अद्भुत प्रभाव देखने को मिला। मुंबई (महाराष्ट्र) से पधारीं कात्यायनी तिवारी एवं बड़हलगंज से आईं मानस कोकिला विजयलक्ष्मी शुक्ल ने मानस की चौपाइयों का ऐसा सुन्दर पाठ और व्याख्या की, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने लगे।इस दिव्य समागम में आश्रम बरहज के पीठाधीश्वर पूज्य गुरुदेव आञ्जनेय दास महाराज की गरिमामयी उपस्थिति और आशीर्वाद सभी भक्तों को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन विनय मिश्रा एवं पं. परशुराम पाण्डेय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। यह महोत्सव आगामी दो दिनों तक चलता रहेगा।
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