गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अलकनंदा महिला छात्रावास में नृत्य, गायन एवं स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। कहीं सुरों की मधुर गूंज तो कहीं नृत्य की लयबद्ध झंकार ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।
स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिता में श्वेता सिंह विशेन ने अपनी भावनाओं और विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी (सिद्धार्थ नगर) के पूर्व कुलपति प्रो. रजनीकांत ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रावास जीवन व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण आधार होता है। यहां रहने वाले विद्यार्थी अवसाद से दूर रहते हैं और उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों के अलावा छात्रावास का जीवन भी बहुत कुछ सिखाता है, जो आगे बढ़ने में सहायक होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के सहयोग के बिना देश का विकास संभव नहीं है और आत्मनिर्भर बनने के लिए व्यक्तित्व को निखारना आवश्यक है।
इस अवसर पर छात्रावास की अभिरक्षिका डॉ. मीतू सिंह, अधीक्षिका डॉ. पूर्णिमा मिश्रा, संपत्ति अधिकारी डॉ. अमित उपाध्याय सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। अंत में डॉ. मीतू सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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