उत्तर प्रदेश में जाति सम्मेलन पर रोक के बाद राजनीतिक दल बदल रहे हैं आयोजन का नाम, सामाजिक क्रांति की ओर बढ़ रहा फोकस

सपा, बसपा और कांग्रेस समेत छोटे दल कर रहे हैं रणनीति, पासी, गुर्जर और अन्य जातियों के लिए अब नए नाम से कार्यक्रम होंगे

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश में जाति सम्मेलन पर रोक लगने के बाद राजनीतिक दल अब आयोजन के नाम बदलकर कार्यक्रम आयोजित करने की रणनीति अपना रहे हैं। समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस के साथ-साथ राज्य के छोटे राजनीतिक दल भी अब नए नामों के तहत जातियों को जोड़ने की योजना बना रहे हैं।

सपा ने पहले अलग-अलग समुदायों के सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई थी। इसी योजना का एक हिस्सा गुर्जर चौपाल आयोजित करना भी था। लेकिन सरकार द्वारा जाति सम्मेलन पर रोक लगाते ही यह योजना प्रभावित हुई।

सपा 25 दिसंबर को बड़े पैमाने पर पासियों का सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी कर रही थी। कार्यक्रम के संयोजक सचिन रावत के अनुसार, अब यह आयोजन “सामाजिक क्रांति सम्मेलन” के नाम से होगा। सचिन ने बताया कि यह कार्यक्रम महाराजा बिजली पासी की जयंती के अवसर पर आयोजित किया जाएगा।

इस आदेश के बाद छोटे राजनीतिक दल जैसे अपना दल, सोनेलाल निषाद पार्टी, सुभाष की पार्टी और अन्य दल भी अपने आयोजनों के नाम बदलने की योजना में हैं। राष्ट्रीय लोक दल जैसे दल अभी भी इस तरह की जातिगत बैठकों से दूर रहते हैं और जाट समुदाय के लिए बड़े सम्मेलन आयोजित नहीं करते।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बदलाव दलों को समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और अपने राजनीतिक संदेश को फैलाने का मौका देंगे, जबकि सरकार की रोक के कारण सार्वजनिक विवाद से बचा जा सकेगा।

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Editor CP pandey

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