नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)ग्लोबल व्यवसाय जगत में चर्चा का विषय बने अडानी समूह ने हाल ही में सामने आई हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के बाद अपनी स्थिति को मज़बूत करते हुए भविष्य की रणनीतियों को स्पष्ट किया है। समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने बुधवार को शेयरधारकों को लिखे पत्र में कहा कि यह रिपोर्ट केवल अडानी समूह पर नहीं, बल्कि पूरे भारतीय उद्यमशीलता पर सवाल उठाने का प्रयास थी।
उन्होंने कहा, “यह हमला हमारे लिए चुनौती के साथ-साथ एक परीक्षण भी था जिसने हमारे शासन, उद्देश्य और भारतीय कंपनियों की वैश्विक महत्वाकांक्षा को परखा। सेबी के स्पष्ट निर्णय से सत्य की जीत हुई है और हमें और मजबूत बनाया गया है।” अडानी ने इसे ‘लक्षित एवं बहुआयामी हमला’ करार दिया और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता की सराहना की।
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इस दौरान भी समूह की बंदरगाह, बिजली संयंत्र, हवाई अड्डे, सीमेंट और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ती रहीं। अडानी ने कर्मचारियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह अवधि ‘अग्निपरीक्षा’ थी, जिसने संकट में काम को अंजाम देने की क्षमता और संकल्पशक्ति को मजबूत किया।
भविष्य की प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए अडानी ने ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में नवाचार, दीर्घकालिक मूल्य निर्माण और कायांतरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “हमें आज की तारीफ के लिए नहीं बल्कि आने वाले दशकों की विरासत के लिए निर्माण करना है।”
