Thursday, February 19, 2026
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गौआश्रय स्थल मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति, दोषियों पर होगी कार्रवाई

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सक्सेना चौक पर सामने आए गोवंश अस्थि प्रकरण को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। महराजगंज जिला प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के निर्देश पर गठित समिति में अपर जिलाधिकारी (वि/रा), अपर पुलिस अधीक्षक तथा मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को शामिल किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस गोवंश अस्थि प्रकरण को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला मान रहा है।

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क्या है पूरा मामला?
जिला विकास अधिकारी/प्रभारी खंड विकास अधिकारी सदर के अनुसार, गौआश्रय स्थल अहमदपुर हड़हवा में वर्तमान में 123 गोवंश संरक्षित हैं। बुधवार को नगर पालिका परिषद महराजगंज के वाहन से सात निराश्रित गोवंश दोपहर 12:30 बजे आश्रय स्थल लाए गए।
इनमें एक बछड़े की हालत गंभीर बताई गई थी। उपचार के दौरान अपराह्न 1:30 बजे उसकी मृत्यु हो गई। पशु चिकित्सकीय पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण पेट में अत्यधिक प्लास्टिक पाए जाने से उत्पन्न टिम्पेनाइटिस (पेट फूलना) बताया गया है।
प्रशासन का कहना है कि यह प्राकृतिक चिकित्सकीय कारण था, लेकिन इसके बाद कुछ अराजक तत्वों द्वारा स्थिति को भड़काने का प्रयास किया गया।

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प्रदर्शन और आरोप
प्रशासन के अनुसार, घटना के दौरान कुछ लोगों ने गोशाला परिसर में प्रदर्शन किया और मृत गोवंश के शव को जबरन कब्जे में लेने की कोशिश की। आरोप है कि बाद में अन्य स्थान से अस्थियां लाकर उन्हें गोशाला से संबंधित बताकर सड़क पर प्रदर्शन किया गया।
इस घटनाक्रम को ही प्रशासन ने गोवंश अस्थि प्रकरण के रूप में गंभीरता से लिया है। संबंधित सचिव द्वारा इस मामले में तहरीर दी जा रही है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना फैलाने या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौआश्रय स्थलों का निरीक्षण
प्रभारी खंड विकास अधिकारी ने दोनों गौआश्रय स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया।
अहमदपुर हड़हवा गौआश्रय स्थल में—
50 कुंतल भूसा
12 कुंतल चोकर
6 कुंतल पशु आहार
1 एकड़ बरसीम (हरा चारा)
3 कुंतल साइलेज
3.5 कुंतल चूना
पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध पाया गया।
वहीं चेहरी गौआश्रय स्थल में 535 गोवंश संरक्षित मिले। यहां—
880 किलोग्राम चोकर
650 किलोग्राम पशु आहार
100 किलोग्राम साइलेज
3500 किलोग्राम भूसा
उपलब्ध पाया गया।
प्रशासन ने कहा कि गोवंश की सुरक्षा और देखभाल को लेकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

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प्रशासन का स्पष्ट संदेश
महराजगंज जिला प्रशासन ने दोहराया है कि गोवंश अस्थि प्रकरण की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी ताकि तथ्य सामने आ सकें और अफवाहों पर रोक लगे।
प्रशासन ने अपील की है कि नागरिक बिना पुष्टि के किसी भी सूचना पर विश्वास न करें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

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क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
उत्तर प्रदेश में गौसंरक्षण से जुड़े विषय सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में गोवंश अस्थि प्रकरण जैसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी जांच आवश्यक हो जाती है।
यह घटना प्रशासनिक जवाबदेही, पशु संरक्षण व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की स्थिति—तीनों से जुड़ी है।
जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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