Thursday, January 15, 2026
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उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग जांच हेतु तीन सदस्यीय समिति गठित

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को घोषणा की कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति में न्यायमूर्ति अमित कुमार, न्यायमूर्ति मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.बी. आचार्य को शामिल किया गया है।

लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने का प्रस्ताव 146 सांसदों के हस्ताक्षरों के साथ प्रस्तुत किया गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ आंतरिक जांच और महाभियोग की प्रक्रिया को वैध ठहराया गया था।

गौरतलब है कि 7 अगस्त 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना की महाभियोग सिफारिश को चुनौती दी थी। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब उनके दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास में आग लगने की घटना के बाद बड़ी मात्रा में जली हुई बेहिसाब नकदी बरामद हुई थी। उस समय न्यायमूर्ति वर्मा दिल्ली उच्च न्यायालय में पदस्थ थे।

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने वर्मा की याचिका को यह कहते हुए खारिज किया था कि जांच समिति ने अपने निष्कर्ष उचित प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किए हैं। वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि उन्हें जवाब देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया, किंतु अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया।

अब लोकसभा द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति आरोपों की विस्तृत जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी, जिसके आधार पर महाभियोग की आगे की प्रक्रिया तय होगी।

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