तीन मंजिला इमारत से गिरा शाखामृग, घंटों चला रेस्क्यू—नहीं बच सकी जान

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Maharajganj जिले में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। सिसवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बरवां विद्यापति में एक शाखामृग (हिरण) तीन मंजिला इमारत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। घंटों तक चले रेस्क्यू और उपचार के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।

अचानक हुई घटना से गांव में मचा हड़कंप

जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब एक शाखामृग अचानक किसी तरह तीन मंजिला भवन पर पहुंच गया और संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर पड़ा। गिरने के बाद वह बुरी तरह घायल हो गया। जैसे ही घटना की खबर गांव में फैली, मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई।
हर कोई इस बेजुबान की जान बचाने के लिए चिंतित था और लोग दुआ कर रहे थे कि किसी तरह उसे बचा लिया जाए।

तत्काल शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलते ही पशु अस्पताल शिकारपुर की टीम मौके पर पहुंची और घायल शाखामृग को प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

ग्रामीणों ने भी पूरी संवेदनशीलता दिखाते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोग किया। साथ ही डायल 112 पुलिस सेवा और वन विभाग को भी सूचना दी गई, जिसके बाद प्रशासनिक टीम भी मौके पर पहुंच गई।

घंटों इलाज के बाद भी नहीं बच सकी जान

चिकित्सकों ने शाखामृग को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। लंबे समय तक चले इलाज और प्रयासों के बावजूद देर रात उसकी मौत हो गई।

जैसे ही उसकी मौत की खबर गांव में पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों की उम्मीदें और प्रार्थनाएं अधूरी रह गईं।

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नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

घटना की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद विभागीय टीम ने मृत शाखामृग को अपने कब्जे में लिया। नहर नारायणी की पटरी पर पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया।
ग्रामीणों ने गाजे-बाजे और विधि-विधान के साथ इस बेजुबान को विदाई दी। यह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष नम आंखों से मौजूद रहे।

ग्रामीणों की संवेदनशीलता बनी मिसाल

इस घटना ने यह साबित कर दिया कि इंसान और प्रकृति के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव आज भी जीवित है। ग्रामीणों ने जिस तरह से एक बेजुबान जानवर के प्रति संवेदनशीलता दिखाई, वह काबिले तारीफ है।
मौके पर डॉ. गजेंद्र प्रताप सिंह, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामदयाल, सुनील यादव, अमरजीत, टिंकू कश्यप, अमरनाथ और रंजीत समेत कई लोग मौजूद रहे।

बढ़ती घटनाओं पर उठे सवाल

इस घटना ने यह भी सवाल खड़े किए हैं कि आखिर वन्य जीव आबादी वाले क्षेत्रों में कैसे पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के घटते क्षेत्र और बढ़ते शहरीकरण के कारण वन्य जीव अक्सर भटककर आबादी वाले इलाकों में आ जाते हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं होती हैं।

Karan Pandey

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