लकीर का फ़क़ीर मतलब
रीति-रिवाजों- मान्यताओं
पर आँख बंद करके चलते
रहना बस चलते रहना है।
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कुरीतियों- परंपराओं का
अंधानुकरण और समय के
साथ हो रहे बदलावों को न
देखना न आत्मसात करना है।
लकीर का फ़क़ीर होना
कभी कभी अच्छा होता है,
छोटी लकीर से बड़ी दूसरी
लकीर बनाना गर्व होता है।
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लकीर का फ़क़ीर बनना,
भेंड़ चाल चलना जैसा भी है,
रीतियाँ कुरीतियाँ न बने,
लकीर से हट जाना भी है।
लकीर के समानांतर एक
और अन्य लकीर खींचना,
बुद्धिमानी भी दिखलाना है,
पर अनदेखी अवमानना है।
आदित्य लक्ष्मण रेखा पार
करना संकल्प प्रतिकार था,
सीता माता व रावण के लिये
अभिशाप सा बन गया था।
डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’
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