बिहार में भूमि सुधार की दिशा में बड़ा कदम, जमीन विवादों के समाधान को मिलेगी रफ्तार

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार सरकार ने भूमि सुधार और राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी बनाने की दिशा में एक अहम पहल की है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा मुजफ्फरपुर में ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा स्वयं जमीन से जुड़े विवादों और शिकायतों को सुनेंगे। यह संवाद डॉ. भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय परिसर स्थित श्रीकृष्ण सिंह प्रेक्षागृह में आयोजित होगा।

इस पहल को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आमतौर पर भूमि विवादों में रैयतों और राजस्व अधिकारियों के बीच सीधा संवाद नहीं हो पाता। पहली पाली में पीड़ित रैयतों के सामने ही अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारी मौजूद रहेंगे, जहां मौके पर ही शिकायतों पर चर्चा कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। इससे वर्षों से लंबित दाखिल-खारिज, जमाबंदी और सीमांकन जैसे मामलों को गति मिलने की उम्मीद है।
जन कल्याण संवाद के दौरान परिमार्जन प्लस पोर्टल पर लंबित आवेदनों, ई-मापी सेवाओं की स्थिति और अभियान बसेरा-2 के तहत भूमिहीनों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रगति की भी समीक्षा होगी।

साथ ही ऑनलाइन सेवाओं में आ रही तकनीकी समस्याओं को लेकर आम नागरिकों से सीधा फीडबैक लिया जाएगा, ताकि डिजिटल व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके। सरकार ने जमाबंदी सुधार को लेकर सख्त समय-सीमा तय कर दी है। लिपिकीय या टाइपिंग जैसी छोटी त्रुटियों का निपटारा 15 कार्य दिवस में, तकनीकी राजस्व संबंधी मामलों का 35 दिनों में और जटिल मामलों का अधिकतम 75 कार्य दिवस में निस्तारण अनिवार्य किया गया है। तय समय-सीमा में कार्य नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

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राज्य में अब तक करीब 4.50 करोड़ जमाबंदियों का डिजिटलीकरण हो चुका है। इस प्रक्रिया में सामने आई विसंगतियों को दूर करने के लिए परिमार्जन प्लस पोर्टल को पहले से अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब किसी भी रैयत को अपनी ही जमीन के रिकॉर्ड के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि आमने-सामने संवाद, डिजिटल प्लेटफॉर्म और तय समय-सीमा से न सिर्फ जमीन विवादों में कमी आएगी, बल्कि प्रशासन पर जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।

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Karan Pandey

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