महाराष्ट्र (राष्ट्र की परम्परा)। महाराष्ट्र की अंबरनाथ महानगरपालिका में राजनीति ने ऐसा करवट लिया है, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। कभी कट्टर विरोधी रही बीजेपी और कांग्रेस के बीच बना गठबंधन अब कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित हुआ है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अंबरनाथ अब पूरी तरह कांग्रेस मुक्त हो गया है, जबकि बीजेपी बिना किसी औपचारिक गठबंधन के सबसे मजबूत स्थिति में पहुंच गई है।
गठबंधन से शुरू हुआ विवाद, कांग्रेस आलाकमान ने की कार्रवाई
महानगरपालिका चुनाव के दौरान अंबरनाथ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच स्थानीय स्तर पर गठबंधन हुआ था। इस फैसले पर कांग्रेस आलाकमान ने कड़ी नाराजगी जताई और पार्टी लाइन से हटकर निर्णय लेने के आरोप में 12 कांग्रेस पार्षदों को निलंबित कर दिया। यही कदम आगे चलकर कांग्रेस के लिए घातक साबित हुआ।
निलंबित पार्षद BJP में शामिल, कांग्रेस का सफाया
कांग्रेस की कार्रवाई के बाद निलंबित किए गए सभी 12 पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए। इसके साथ ही अंबरनाथ महानगरपालिका में कांग्रेस का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया। इस घटनाक्रम का सीधा फायदा बीजेपी को मिला, जिसने बिना अलायंस के सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
देवेंद्र फडणवीस ने भी जताई थी नाराजगी
बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सार्वजनिक रूप से असहमति जताई थी। उनकी नाराजगी के बाद यह गठबंधन टूट गया। इसके तुरंत बाद कांग्रेस की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
शिंदे गुट को भी झटका
बीजेपी का यह राजनीतिक दांव एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना पर भी भारी पड़ा। बीजेपी ने कांग्रेस के साथ अस्थायी तालमेल कर शिवसेना को अंबरनाथ की सत्ता से दूर कर दिया। अब नतीजा यह है कि शिवसेना भी महानगरपालिका से बाहर है और कांग्रेस भी राजनीतिक रूप से हाशिये पर चली गई है।
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कांग्रेस की सफाई और अंदरूनी कलह
अंबरनाथ कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि गठबंधअंबरनाथन का प्रस्ताव सबसे पहले बीजेपी की ओर से आया था। हालांकि, यह फैसला लेते समय राज्य कांग्रेस कार्यालय को भरोसे में नहीं लिया गया, इसी वजह से आलाकमान ने कड़ा कदम उठाया। अब निलंबित पार्षदों के बीजेपी में जाने से पार्टी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
BJP की स्थिति मजबूत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के टूटने और शिंदे गुट के बाहर होने से अंबरनाथ में बीजेपी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अब महानगरपालिका में बीजेपी का कामकाज बिना किसी बड़े राजनीतिक विरोध के आसानी से आगे बढ़ सकता है।
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