Sunday, March 1, 2026
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मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन विषय पर जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया

डॉ. हर्षिता ने कृषकों को एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन अपनाने की सलाह दी

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा) आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र नानपारा के कार्य क्षेत्र में आने वाले ग्राम कोटवा विकास खंड शिवपुर में लाइफ मिशन के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन विषय पर जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. के. एम. सिंह ने बताया कि मृदा एक जीवित माध्यम है, जो पौधों की वृद्धि के लिये आवश्यक पोषक तत्वों के प्राकृतिक स्त्रोत के रूप में कार्य करती है किन्तु सघन खेती पद्धति, अत्यधिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग एवं भूमि का क्षमता से अधिक दोहन होने के दुष्प्रभाव से मृदा उर्वरक शक्ति और जीवांश कार्बन के स्तर में कमी बढ़ती जा रही है ,जो कि मृदा स्वास्थ्य में गिरावट के रूप में सामने आ रही है। उन्होंने कृषकों को मृदा परीक्षण व जैविक खेती के माध्यम से इस समस्या का निदान करने की सलाह दी। उद्यान वैज्ञानिक डॉ शशांक शेखर सिंह ने कृषकों को स्वस्थ्य मृदा का अर्थ समझाते हुए बताया कि पौधों के सभी आवश्यक पोषक तत्वों को सन्तुलित मात्रा में उपलब्ध कराना स्वस्थ मृदा का गुण है और पोषक तत्वों की उपलब्धता का सीधा सम्बन्ध मृदा उर्वरता एवं फसल उत्पादन से होता है। पोषक तत्वों की कमी या अधिकता पौधों के कुपोषण का कारण बनती है जिससे फसल की उपज और गुणवता प्रभावित होती है। इसके लिए आवश्यक है कि इन पोषक तत्वों का आनुपातिक मात्रा में ही प्रयोग किया जाए जिससे मृदा की उर्वरता का ह्रास न हो और लम्बे समय तक मृदा स्वास्थ्य बना रहे। केन्द्र की पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. हर्षिता ने कृषकों को एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन अपनाने की सलाह दी और कम से कम कीटनाशकों का प्रयोग करने को कहा जिससे मृदा स्वस्थ रहे और हमारा भोजन भी विषरहित हो। पादप प्रजनन वैज्ञानिक डॉ अरुण कुमार ने कृषकों से पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने का आग्रह करते हुए उन्हें सिंगल यूज पॉलिथीन का कम से कम इस्तेमाल एवं वर्षा जल संचयन करने की सलाह दी। कार्यक्रम में सीता देवी, निर्मला, ज्ञानवती, रुखसार, मालती, अनिल बिश्नोई, अमरेंद्र वर्मा, मुन्नीलाल, मैनेजर प्रसाद, मस्तराम सोनकर आदि उपस्थित रहे।

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