देवरिया में हत्या के प्रयास के दोषी को 7 साल की जेल, कोर्ट ने लगाया 30 हजार रुपये जुर्माना

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। हत्या के प्रयास के पुराने मामले में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। देवरिया में वर्ष 2020 में दर्ज मुकदमे की सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला 15 अक्टूबर 2026 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, देवरिया की अदालत ने सुनाया। पुलिस की प्रभावी पैरवी से आए इस फैसले को गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला मदनपुर थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 51/2020 से संबंधित है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 504 और 506 के तहत अभियोग दर्ज किया गया था। मामले में गोबरी यादव पुत्र स्वर्गीय शारदा यादव, निवासी ग्राम ससरांव, थाना मदनपुर, जनपद देवरिया आरोपी था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान देवरिया पुलिस ने ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया और सात वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता हरेंद्र प्रसाद निषाद ने की। वहीं, पुलिस की मॉनिटरिंग सेल के प्रभारी दुर्गेश कुमार सिंह, कोर्ट मोहर्रिर मुख्य आरक्षी राजेश यादव तथा मदनपुर थाने के पैरवीकार मुख्य आरक्षी अखिलानंद यादव ने मामले की पैरवी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देवरिया पुलिस का कहना है कि ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के अंतर्गत गंभीर अपराधों से जुड़े मुकदमों में साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाना और अपराध करने वालों को कानून के अनुसार दंडित कराना है।
वर्ष 2020 के मुकदमे में आया यह फैसला बताता है कि पुराने आपराधिक मामलों में भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई और पैरवी जारी रहती है। पुलिस ने गंभीर मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी जारी रखने की बात कही है।