नवरात्रि स्पेशल: पारंपरिक फलाहार के साथ इस बार ट्राई करें विदेशी अंदाज का मीठा डेजर्ट, कुट्टू, दही और स्ट्रॉबेरी से तैयार करें स्वादिष्ट पारफे

नवरात्रि का पावन पर्व आते ही घरों में भक्ति, उत्साह और उमंग का वातावरण बन जाता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। इस दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखना भी जरूरी होता है, ताकि दिनभर की पूजा-पाठ और अन्य गतिविधियों के बीच शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती रहे। ऐसे में फलाहार के लिए ऐसे व्यंजनों का चुनाव करना अच्छा रहता है, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी हों और जिन्हें घर पर आसानी से तैयार किया जा सके।

अक्सर नवरात्रि का व्रत रखते समय सबसे बड़ी परेशानी यही होती है कि रोजाना क्या नया बनाया जाए। साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू की पूरी, आलू की सब्जी और मखाने की खीर जैसे पारंपरिक व्यंजन तो लगभग हर घर में बनाए जाते हैं। लेकिन अगर इस बार आप अपनी व्रत की थाली में कुछ नया और खास शामिल करना चाहती हैं, तो यहां दो बेहतरीन विकल्प दिए जा रहे हैं। पहला है पारंपरिक स्वाद से भरपूर साबूदाना खिचड़ी और दूसरा है कुट्टू के आटे, गाढ़े दही तथा ताजी स्ट्रॉबेरी से तैयार होने वाला आकर्षक स्ट्रॉबेरी पारफे।

रंजना की रसोई में इन दोनों व्यंजनों को बनाने का तरीका जानिए और इस नवरात्रि अपने फलाहार को स्वादिष्ट, आकर्षक और विविधतापूर्ण बनाइए।

1. साबूदाना खिचड़ी: व्रत का पारंपरिक स्वाद और झटपट बनने वाला फलाहार

साबूदाना खिचड़ी नवरात्रि के व्रत में पसंद किए जाने वाले लोकप्रिय व्यंजनों में से एक है। साबूदाने की नरम बनावट, भुनी हुई मूंगफली का कुरकुरापन और आलू का स्वाद इसे खास बनाते हैं। इसे सुबह के नाश्ते, दोपहर के फलाहार या शाम के हल्के भोजन के रूप में तैयार किया जा सकता है। सही तरीके से साबूदाना भिगोने पर खिचड़ी के दाने खिले-खिले रहते हैं और आपस में ज्यादा चिपकते नहीं हैं।

साबूदाना खिचड़ी बनाने के लिए सामग्री

  • साबूदाना – 1 कप
  • उबले हुए आलू – 1 से 2 मध्यम आकार के
  • हरी मिर्च – 1 से 2, बारीक कटी हुई
  • भुनी हुई मूंगफली – आधा कप, दरदरी पिसी हुई
  • जीरा – आधा छोटा चम्मच
  • देसी घी – 1 से 2 बड़े चम्मच
  • सेंधा नमक – स्वादानुसार
  • हरा धनिया – बारीक कटा हुआ
  • नींबू का रस – वैकल्पिक

साबूदाना खिचड़ी बनाने की विधि

पहला चरण: साबूदाना भिगोएं

सबसे पहले साबूदाने को साफ पानी से धो लें। इसके बाद जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर कुछ घंटों के लिए भिगो दें। भिगोने का समय साबूदाने के प्रकार पर निर्भर कर सकता है। जब दाने नरम हो जाएं, तो अतिरिक्त पानी निकाल दें। ध्यान रखें कि साबूदाना बहुत ज्यादा गीला न रहे, वरना खिचड़ी चिपचिपी बन सकती है।

दूसरा चरण: तड़का तैयार करें

अब एक कड़ाही में देसी घी गर्म करें। इसमें जीरा डालें और चटकने दें। इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च डालकर हल्का भून लें। अब उबले हुए आलू को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर कड़ाही में डालें और कुछ मिनट तक चलाते हुए पकाएं।

तीसरा चरण: साबूदाना और मूंगफली मिलाएं

आलू के साथ भीगा हुआ साबूदाना डालें। अब सेंधा नमक और दरदरी पिसी हुई भुनी मूंगफली मिलाएं। सभी सामग्रियों को अच्छी तरह चलाएं, ताकि साबूदाने पर घी और मसालों की हल्की परत चढ़ जाए। धीमी से मध्यम आंच पर लगभग 4 से 6 मिनट तक पकाएं। बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि मिश्रण तली में न लगे।

चौथा चरण: गरमा-गरम परोसें

जब साबूदाने के दाने पारदर्शी और नरम दिखाई देने लगें, तो गैस बंद कर दें। ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और चाहें तो थोड़ा नींबू का रस डालें। आपकी स्वादिष्ट साबूदाना खिचड़ी तैयार है। इसे दही या व्रत में स्वीकार्य किसी अन्य फलाहारी व्यंजन के साथ परोस सकती हैं।

साबूदाना खिचड़ी को स्वादिष्ट बनाने के खास टिप्स

  • साबूदाने को भिगोने के बाद अतिरिक्त पानी अच्छी तरह निकालना जरूरी है।
  • मूंगफली को भूनकर दरदरा पीसें, इससे खिचड़ी का स्वाद और बनावट बेहतर होती है।
  • खिचड़ी को बहुत तेज आंच पर न पकाएं।
  • सेंधा नमक और हरी मिर्च की मात्रा अपने स्वाद के अनुसार रखें।
  • व्रत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और मसालों की स्वीकार्यता अपनी परंपरा के अनुसार सुनिश्चित करें।

साबूदाना खिचड़ी के पोषण संबंधी फायदे

साबूदाना मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। मूंगफली से कुछ प्रोटीन और वसा मिलती है, जबकि आलू भी कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है। हालांकि, यह व्यंजन ऊर्जा से भरपूर है, लेकिन इसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा सीमित हो सकती है। इसलिए व्रत के दौरान इसे दही, फल या अन्य स्वीकार्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित मात्रा में खाना बेहतर है।

2. स्ट्रॉबेरी पारफे: कुट्टू, दही और फलों से तैयार करें खास व्रत वाला डेजर्ट

अगर आप नवरात्रि के दौरान पारंपरिक मिठाइयों से हटकर कुछ नया बनाना चाहती हैं, तो स्ट्रॉबेरी पारफे एक आकर्षक विकल्प हो सकता है। यह डेजर्ट देखने में जितना सुंदर लगता है, इसकी परतों में मिलने वाला स्वाद भी उतना ही खास होता है। इसमें कुट्टू के आटे से तैयार कुरकुरा मिश्रण, मीठा गाढ़ा दही और ताजी स्ट्रॉबेरी की परतें बनाई जाती हैं।

पारफे एक ऐसी मिठाई है, जिसे आमतौर पर गिलास या पारदर्शी जार में अलग-अलग परतों के रूप में सजाकर परोसा जाता है। सामान्य पारफे में बिस्कुट, केक, क्रीम या अन्य सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है, लेकिन व्रत के अनुकूल संस्करण में कुट्टू का आटा, दही और फल शामिल किए जा सकते हैं।

मशहूर शेफ कुणाल कपूर से जुड़ी इस व्रत वाली रेसिपी में एयर फ्रायर का इस्तेमाल करके कुट्टू के आटे को कुरकुरा बनाया जाता है। इसके बाद इसे मीठे दही और स्ट्रॉबेरी के साथ सजाया जाता है। इस तरह पारंपरिक फलाहारी सामग्री को एक नए अंदाज में परोसा जा सकता है।

स्ट्रॉबेरी पारफे बनाने के लिए सामग्री

  • कुट्टू का आटा – 1 कप
  • देसी घी – 1 से 2 छोटे चम्मच
  • स्ट्रॉबेरी – 1 कप, बारीक कटी हुई
  • गाढ़ा दही – डेढ़ कप, अच्छी तरह फेंटा हुआ
  • इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच
  • शहद या धागे वाली मिश्री का पाउडर – स्वादानुसार
  • बादाम, काजू और पिस्ता – बारीक कटे हुए, सजाने के लिए

ध्यान दें: व्रत में शहद, मिश्री, दही और अन्य सामग्री के इस्तेमाल की स्वीकार्यता परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। अपनी व्रत-परंपरा के अनुरूप सामग्री चुनें।

स्ट्रॉबेरी पारफे बनाने की आसान विधि

पहला चरण: कुट्टू के आटे का कुरकुरा मिश्रण तैयार करें

सबसे पहले एक बर्तन में कुट्टू का आटा लें। इसमें थोड़ा देसी घी और जरूरत के अनुसार मिश्री का पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं। मिश्रण को हल्के हाथों से मिलाते हुए भुरभुरा बना लें। जरूरत से ज्यादा घी डालने से बचें, ताकि मिश्रण बहुत चिकना न हो जाए।

दूसरा चरण: एयर फ्रायर में पकाएं

अब तैयार मिश्रण को एयर फ्रायर में डालें और लगभग 160 डिग्री सेल्सियस पर 8 से 10 मिनट तक पकाएं। बीच में एक बार मिश्रण को देखकर जरूरत के अनुसार चलाएं, क्योंकि एयर फ्रायर की क्षमता और मिश्रण की मात्रा के आधार पर समय बदल सकता है। जब मिश्रण सुनहरा और कुरकुरा हो जाए, तो इसे बाहर निकालकर पूरी तरह ठंडा होने दें।

यदि आपके पास एयर फ्रायर नहीं है, तो कड़ाही में धीमी आंच पर मिश्रण को लगातार चलाते हुए हल्का सुनहरा और कुरकुरा होने तक भून सकती हैं।

तीसरा चरण: मीठा और क्रीमी दही तैयार करें

एक साफ बर्तन में गाढ़ा दही लें। इसमें इलायची पाउडर और स्वाद के अनुसार शहद या मिश्री का पाउडर डालें। अब इसे अच्छी तरह फेंटें, ताकि दही मुलायम और क्रीमी हो जाए। यदि दही में अधिक पानी है, तो उसे पहले मलमल के कपड़े या उपयुक्त छन्नी की मदद से गाढ़ा कर सकती हैं।

चौथा चरण: स्ट्रॉबेरी तैयार करें

ताजी स्ट्रॉबेरी को अच्छी तरह धोकर साफ कपड़े से सुखा लें। इसके बाद छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। स्ट्रॉबेरी का हल्का खट्टा-मीठा स्वाद मीठे दही के साथ अच्छा मेल बनाता है। चाहें तो कुछ टुकड़े सजाने के लिए अलग रख दें।

पांचवां चरण: पारफे की परतें सजाएं

अब एक पारदर्शी गिलास या जार लें। सबसे नीचे कुट्टू के आटे का कुरकुरा मिश्रण डालें। इसके ऊपर मीठे दही की परत लगाएं और फिर कटी हुई स्ट्रॉबेरी डालें। इसी क्रम में दो से तीन परतें तैयार करें। सबसे ऊपर स्ट्रॉबेरी के टुकड़े, बारीक कटे बादाम, काजू और पिस्ता डालकर सजाएं।

छठा चरण: ठंडा करके परोसें

पारफे को तुरंत परोस सकती हैं। यदि आपको ठंडा डेजर्ट पसंद है, तो इसे थोड़ी देर फ्रिज में रख सकती हैं। हालांकि, कुरकुरेपन को बनाए रखने के लिए कुट्टू की परत और दही को परोसने से कुछ समय पहले ही मिलाना बेहतर है।

इस तरह आपकी आकर्षक स्ट्रॉबेरी पारफे तैयार हो जाएगी। इसे नवरात्रि के फलाहार में मीठे व्यंजन के रूप में परोस सकती हैं।

स्ट्रॉबेरी पारफे को खास बनाने के टिप्स

  • कुट्टू के आटे को अच्छी तरह पकाएं, ताकि उसमें कच्चापन न रहे।
  • एयर फ्रायर में मिश्रण को बहुत मोटी परत में न फैलाएं, इससे कुरकुरापन बेहतर मिल सकता है।
  • दही गाढ़ा और ताजा होना चाहिए।
  • स्ट्रॉबेरी को धोने के बाद सुखाकर काटें, ताकि डेजर्ट में अतिरिक्त पानी न आए।
  • पारफे की परतें परोसने से ठीक पहले बनाएं, जिससे कुट्टू का मिश्रण कुरकुरा बना रहे।
  • मेवे अपनी पसंद और उपलब्धता के अनुसार कम या ज्यादा कर सकती हैं।

स्ट्रॉबेरी पारफे क्यों है एक अलग विकल्प?

स्ट्रॉबेरी पारफे की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वाद, बनावट और आकर्षक प्रस्तुति है। दही से प्रोटीन और कैल्शियम, स्ट्रॉबेरी से विटामिन सी तथा कुछ फाइबर और मेवों से वसा एवं अन्य पोषक तत्व मिल सकते हैं। कुट्टू का आटा भी कार्बोहाइड्रेट और कुछ प्रोटीन प्रदान करता है।

इस रेसिपी में एयर फ्रायर और कम मात्रा में घी इस्तेमाल करने से अतिरिक्त वसा को सीमित रखने में मदद मिल सकती है। फिर भी इसकी कुल कैलोरी इस बात पर निर्भर करेगी कि इसमें कितना घी, मीठा और मेवा डाला गया है। इसे पौष्टिक फलाहार का एक विकल्प समझें, न कि शरीर को डिटॉक्स करने वाला कोई विशेष उपचार।

नवरात्रि के व्रत में खानपान का रखें विशेष ध्यान

नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत रखने के दौरान शरीर को पर्याप्त ऊर्जा, तरल पदार्थ और जरूरी पोषक तत्व मिलना भी आवश्यक है। केवल आलू, साबूदाना, तली हुई पूरी या मिठाइयों पर निर्भर रहने के बजाय फल, दही, स्वीकार्य मेवे और अन्य पौष्टिक फलाहारी विकल्पों को भी अपनी थाली में शामिल करें।

दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें और अपनी भूख के अनुसार भोजन करें। जिन लोगों को मधुमेह, किडनी संबंधी समस्या या कोई अन्य ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें खानपान पर विशेष ध्यान देना पड़ता है, उन्हें उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

इस नवरात्रि अपनी थाली में लाएं नया स्वाद

नवरात्रि का व्रत केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संयम, श्रद्धा और सात्त्विक जीवनशैली से जुड़ा अवसर भी है। ऐसे में भोजन को स्वादिष्ट और संतुलित बनाना जरूरी है। साबूदाना खिचड़ी जहां पारंपरिक फलाहार का बेहतरीन विकल्प है, वहीं स्ट्रॉबेरी पारफे आधुनिक अंदाज में तैयार किया गया ऐसा मीठा डेजर्ट है, जो आपकी व्रत की थाली को खास बना सकता है।

रंजना की रसोई के इन दोनों व्यंजनों को घर पर आजमाएं और अपने परिवार के साथ नवरात्रि के स्वाद का आनंद लें। थोड़े-से बदलाव और सही सामग्री के साथ व्रत का भोजन भी स्वाद, पोषण और सुंदर प्रस्तुति का शानदार मेल बन सकता है।