
बीबीएयू में भारतीय ज्ञान परंपरा और योग के वैज्ञानिक महत्व पर हुआ विशेष व्याख्यान
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में मंगलवार को योग के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. एच. आर. नगेन्द्र ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और चेतना के बीच संतुलन स्थापित करने वाली समग्र जीवन पद्धति है। इसके नियमित अभ्यास से शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिरता और आत्मिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
एमीनेंट लेक्चर सीरीज समिति की ओर से आयोजित व्याख्यान का विषय ‘योग : भारतीय ज्ञान परंपरा से आधुनिक वैज्ञानिक समझ और समग्र कल्याण तक’ रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य वक्ता डॉ. नगेन्द्र ने योग के विभिन्न आयामों और उसके वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने पंचकोश की अवधारणा समझाते हुए कहा कि अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश के समुचित विकास से व्यक्ति के व्यक्तित्व को व्यापकता मिलती है। अष्टांग योग के यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि का नियमित अभ्यास शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन और आत्मिक उन्नति में सहायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में योग तनाव प्रबंधन, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। स्वामी विवेकानंद के कथन ‘प्रत्येक आत्मा संभावित रूप से दिव्य है’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मानुशासन और साधना से व्यक्ति अपनी आंतरिक क्षमताओं को विकसित कर सकता है।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न अंग है। यह आत्मचिंतन, आत्मबोध और समाज कल्याण की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय ज्ञान परंपरा और योग के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार योग अनुशासन, संयम, सहिष्णुता और समरसता के माध्यम से संतुलित व्यक्तित्व तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देता है।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। आयोजन समिति की अध्यक्ष प्रो. शिल्पी वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। मंच पर प्रो. सुनीता मिश्रा भी मौजूद रहीं। अंत में मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न और शॉल भेंट किया गया। प्रो. सुनीता मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. सुदर्शन चक्रधारी ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के अध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
