सड़क पर हूटर बजाया तो खैर नहीं! हाईकोर्ट सख्त, सरकार को 3 महीने का अल्टीमेटम; अवैध हूटर वालों पर होगी कार्रवाई

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सड़कों पर बेवजह तेज आवाज, वाहनों के कानफोड़ू हॉर्न और अवैध हूटरों का इस्तेमाल करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ध्वनि प्रदूषण के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर औद्योगिक, व्यावसायिक, आवासीय और शांत क्षेत्रों का वर्गीकरण कर उन्हें अधिसूचित करने का निर्देश दिया है। अदालत के इस रुख से सड़कों पर अनावश्यक शोर फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित क्षेत्रों का वर्गीकरण और अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है, तो इसे निर्धारित तीन महीने की समयसीमा में हर हाल में पूरा किया जाए। हाईकोर्ट ने वाहनों में हूटर के इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत के निर्देश के मुताबिक, हूटरों का उपयोग अधिकृत सरकारी वाहनों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं तक सीमित रहना चाहिए। निजी वाहनों में अवैध रूप से हूटर लगाकर सड़क पर चलने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। अदालत ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक इस दिशा में उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया है। इससे स्पष्ट है कि न्यायालय इस मामले में केवल निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सरकारी कार्रवाई की प्रगति की जानकारी भी चाहता है। आम लोगों के लिए क्यों अहम है यह आदेश? सड़कों पर अनावश्यक हॉर्न और तेज आवाज से आम नागरिकों, बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों तथा विद्यार्थियों को परेशानी होती है। अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और अन्य शांत क्षेत्रों के आसपास ध्वनि प्रदूषण की समस्या विशेष रूप से गंभीर हो सकती है। ऐसे में ध्वनि क्षेत्रों का स्पष्ट वर्गीकरण और नियमों का प्रभावी पालन शोर पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। हालांकि, आदेश के बाद कार्रवाई का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित विभाग नियमों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू करते हैं और अवैध हूटरों के इस्तेमाल पर कितना नियंत्रण कर पाते हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है। अब निगाहें राज्य सरकार की कार्रवाई और अदालत में पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर रहेंगी।