भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। अदालत के आदेश के बाद 26 साल पुराने भूमि विवाद का आखिरकार पटाक्षेप हो गया, लेकिन विवादित जमीन से गुमटियां हटने के बावजूद स्थानीय लोगों की आवागमन संबंधी परेशानी अभी बरकरार है। रास्ते में मौजूद पेड़ और नाला लोगों के आने-जाने में बाधा बने हुए हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि भूमि विवाद खत्म होने के बाद अब रास्ते की समस्या का भी स्थायी समाधान होना चाहिए।

मईल थाना क्षेत्र के अंतर्गत मेन मार्केट भागलपुर में वर्ष 2001 से भूमि के स्वामित्व को लेकर विवाद चल रहा था। न्यायालय के आदेश के बाद विवादित भूमि पर रखी गुमटियों को हटवाकर डिक्रीदार संतोष सैनी को कब्जा-दखल दिला दिया गया। कार्रवाई के बाद भूमि संबंधी विवाद का निस्तारण तो हो गया, लेकिन आम लोगों के आवागमन का सवाल अभी भी बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस रास्ते से क्षेत्र के लोग आवागमन करते हैं, वहां पेड़ और नाला होने के कारण रास्ता सुगम नहीं है। लोगों का कहना है कि जब तक इन बाधाओं को दूर नहीं किया जाता, तब तक न्यायालय के आदेश के बाद भी आम जनता को आवागमन की पूरी सुविधा नहीं मिल पाएगी।
बताया गया कि संतोष सैनी की भूमि पर गांव के ही लक्ष्मी चौरसिया ने पान की गुमटी रखी थी। दूसरी ओर, उक्त भूमि को ग्रामसभा की जमीन बताए जाने को लेकर भी विवाद सामने आया था। मामले में ग्रामसभा और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इजरा वाद में आपत्ति दर्ज कराई गई थी।
सभी पक्षों को सुनने के बाद जनपद न्यायालय ने संतोष सैनी के पक्ष में निर्णय और डिक्री पारित की। इसके बाद डिक्री के निष्पादन के लिए इजरा वाद दाखिल किया गया। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में अदालत अमीन दुर्गेश मणि त्रिपाठी और पुलिस उपनिरीक्षक अजय राय पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
पुलिस टीम की मौजूदगी में विवादित भूमि पर रखी गुमटियों को हटवाया गया। इसके बाद डिक्रीगत भूमि पर संतोष सैनी को कब्जा-दखल दिलाया गया। कार्रवाई के दौरान मौके पर शांति व्यवस्था बनी रही और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति सामने नहीं आई।
अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासनिक स्तर पर होने वाली अगली कार्रवाई पर है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि 26 साल पुराने भूमि विवाद का समाधान होने के बाद रास्ते में बाधा बने पेड़ और नाले को भी हटाया जाना चाहिए, ताकि बाजार और आसपास के लोगों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।