पुरुषोत्तम पट्टी के पास नदी में समाहित हो रही उपजाऊ जमीन, ग्रामीणों ने बाढ़ विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप
बलिया (राष्ट्र क़ी परम्परा )
तहसील क्षेत्र के पुरुषोत्तम पट्टी गांव के समीप घाघरा नदी का कटान लगातार जारी है। नदी के तेज बहाव से किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि धीरे-धीरे नदी में समाहित होती जा रही है। कटान की बढ़ती रफ्तार से ग्रामीणों और किसानों में दहशत का माहौल है। उनका कहना है कि समय रहते सुरक्षा कार्य नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में गांव पर भी खतरा मंडरा सकता है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले वर्ष कटान रोकने के लिए बाढ़ विभाग द्वारा लगभग 2 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत से सुरक्षा कार्य कराया गया था। इसके तहत जियो बैग में बालू भरकर पिचिंग, प्रीकास्ट प्वाइंट तथा झाड़-झंखाड़ आदि लगाकर नदी की धारा को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया था। लेकिन इस वर्ष उन सुरक्षा कार्यों का न तो रखरखाव किया गया और न ही क्षतिग्रस्त स्थानों की मरम्मत कराई गई। परिणामस्वरूप जियो बैग बह गए हैं और सुरक्षा कार्य पूरी तरह निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि बाढ़ विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष 15 जून तक कटान संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी कर ली जाती है, लेकिन इस बार न तो कोई बचाव कार्य शुरू हुआ और न ही विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके का निरीक्षण करने पहुंचा। इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी मात्रा में कृषि भूमि नदी में समा जाएगी, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन और बाढ़ विभाग से तत्काल कटान रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा कार्य शुरू कराने तथा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर स्थायी समाधान कराने की मांग की है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में घाघरा नदी का कटान उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। समय पर सुरक्षा कार्य नहीं होने से लोगों में भय और असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
