Saturday, May 23, 2026
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यूपी में सस्ते टेंडर डालने वालों पर शिकंजा, खराब निर्माण पर 2 साल बैन

यूपी पीडब्ल्यूडी में टेंडर प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: 15% से ज्यादा कम बोली लगाने वालों पर सख्ती, खराब काम पर 2 साल का डिबार


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। उत्तर प्रदेश शासन ने नई निविदा निस्तारण प्रक्रिया लागू करते हुए कम दरों पर टेंडर लेने वाले ठेकेदारों पर कड़ी निगरानी और अतिरिक्त परफारमेन्स सिक्योरिटी की व्यवस्था लागू कर दी है।
प्रमुख सचिव अजय चौहान द्वारा जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि अब 5 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों में अत्यधिक कम दर पर बोली लगाने वाले ठेकेदारों की गुणवत्ता जांच अनिवार्य होगी। खराब गुणवत्ता मिलने पर संबंधित ठेकेदार को दो वर्षों के लिए डिबार किया जाएगा और उसकी निविदा निरस्त कर दोबारा टेंडर जारी होगा।
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई ठेकेदार आगणित लागत से 10 प्रतिशत तक कम बोली लगाता है तो उसे अतिरिक्त परफारमेन्स सिक्योरिटी नहीं देनी होगी। लेकिन 10 से 15 प्रतिशत तक कम दर पर बोली लगाने पर लागत अंतर का 50 प्रतिशत, 15 से 20 प्रतिशत तक कम बोली पर 100 प्रतिशत तथा 20 प्रतिशत से अधिक कम बोली लगाने पर 150 प्रतिशत अतिरिक्त परफारमेन्स सिक्योरिटी जमा करनी होगी।
शासनादेश के अनुसार 15 प्रतिशत से अधिक कम दर पर टेंडर लेने वाले ठेकेदारों के पहले से चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच कराई जाएगी। लोक निर्माण विभाग में ऐसे ठेकेदारों के सबसे कम दर पर हुए अनुबंधों का चयन कर मुख्य अभियन्ता स्तर से जांच होगी। यदि निर्माण गुणवत्ता खराब मिली तो कारण बताओ नोटिस जारी कर दो वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
अन्य विभागों में कार्य कर रहे ठेकेदारों के लिए भी नई शर्तें लागू की गई हैं। अब उन्हें अपने सभी निर्माणाधीन कार्यों और अद्यतन बिड कैपेसिटी की जानकारी ऑनलाइन अपलोड करनी होगी। यदि कोई ठेकेदार जानकारी छिपाता पाया गया तो अनुबंध निरस्त कर सामान्य एवं अतिरिक्त परफारमेन्स सिक्योरिटी जब्त कर ली जाएगी।
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन ठेकेदारों के किसी विभाग में 5 करोड़ रुपये से अधिक लागत के कार्य चल रहे हैं या पिछले दो वर्षों में पूरे हुए हैं, उन्हें संबंधित विभाग के मुख्य अभियन्ता स्तर के अधिकारी से गुणवत्ता प्रमाणपत्र अपलोड करना अनिवार्य होगा।
नई प्रक्रिया में ई-टेंडरिंग प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए समान दरों वाली निविदाओं के चयन हेतु “प्रहरी एप्लीकेशन” के रैण्डमाइजेशन सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और चयन प्रक्रिया निष्पक्ष मानी जा रही है।
5 करोड़ रुपये से कम लागत वाले कार्यों के लिए भी लगभग इसी प्रकार की व्यवस्था लागू की गई है। हालांकि इनमें तकनीकी मूल्यांकन स्थानीय निविदा समिति स्तर पर ही किया जाएगा और अन्य विभागों के कार्यों का संज्ञान नहीं लिया जाएगा।
शासन ने सभी आयुक्तों, जिलाधिकारियों, मुख्य अभियन्ताओं तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नए नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। माना जा रहा है कि इस नई नीति से फर्जी प्रतिस्पर्धा, अव्यावहारिक कम दरों और घटिया निर्माण पर प्रभावी रोक लगेगी तथा सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

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