संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में फसल अवशेष (पराली) जलाने पर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने पर 2500 रुपये से लेकर 15000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा और पुनरावृत्ति की स्थिति में एफआईआर सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से 19 अप्रैल 2026 के बीच जिले में 723 पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनकी जांच कृषि व राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की जा रही है। दोषी किसानों से पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली की तैयारी भी चल रही है।
डॉ. सिंह ने कहा कि कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों का उपयोग अनिवार्य है। नियमों का पालन न करने पर हार्वेस्टर जब्त कर स्वामी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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उन्होंने किसानों से अपील की कि पराली जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक प्रबंधन करें। इसके लिए कृषि विभाग द्वारा 50 से 80 प्रतिशत अनुदान पर सुपर सीडर, स्ट्रा रीपर, मल्चर, रोटरी स्लेशर, स्ट्रा रेक व बेलर जैसे यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पराली को मल्च बनाकर खेत में उपयोग करने या गौशाला, सीबीजी प्लांट एवं औद्योगिक इकाइयों को देने की भी व्यवस्था है।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है, लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं और पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
