मऊ (राष्ट्र की परम्परा)l वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम कार्यदिवस पर मऊ कोषागार ने रिकॉर्ड भुगतान करते हुए ऐतिहासिक समापन दर्ज किया। विकास कार्यों और जनहित योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से कोषागार की टीम ने दिनभर युद्धस्तर पर काम कर सभी वैध बिलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया। डिजिटल भुगतान प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी और तेज प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई।
कोषागार प्रशासन के अनुसार, 31 मार्च को विभिन्न आहरण-वितरण अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत कुल 354 बिलों का परीक्षण कर उन्हें ई-पेमेंट पोर्टल के जरिए सीधे लाभार्थियों, फर्मों और संस्थाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता दोनों सुनिश्चित हुई।
इस दौरान नगर निकायों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। नगर पालिका और नगर पंचायतों ने मिलकर 16.22 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर जिले में पहला स्थान हासिल किया। इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से शहरी विकास, स्वच्छता व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार में किया गया।
पूरे दिन में कुल 37.45 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का ऑनलाइन निस्तारण किया गया। इसमें अवस्थापना विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा क्षेत्र और लंबित देयकों को प्राथमिकता दी गई। पोर्टल पर दबाव के बावजूद कोषागार कर्मियों ने सभी वैध बिलों का निस्तारण कर ‘जीरो पेंडेंसी’ का लक्ष्य प्राप्त किया।
कोषागार प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी विभाग का स्वीकृत बजट लैप्स न हो, इसके लिए देर रात तक कार्य जारी रखा गया। इस उपलब्धि में लेखाकारों, कंप्यूटर सहायकों और बैंक अधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही, जिनके समन्वय से पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई।
अधिकारियों के अनुसार, 1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जिसमें भी पारदर्शिता और समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाएगी।
मऊ कोषागार में वित्तीय वर्ष का शानदार समापन, 37.45 करोड़ का भुगतान कर हासिल की ‘जीरो पेंडेंसी’
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