Sunday, March 22, 2026
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डीडीयू की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि: डॉ. अम्बरीश श्रीवास्तव करेंगे हाइड्रोजन स्टोरेज पर आधारित विशेष अंक का संपादन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव के मुख्य संपादन में हाइड्रोजन ऊर्जा के भविष्य को समर्पित एक महत्वपूर्ण शोध संग्रह “हार्नेसिंग सुपरएटॉमिक क्लस्टर्स फॉर एन्हैंस्ड हाइड्रोजन स्टोरेज सॉल्यूशंस” का प्रकाशन होने जा रहा है। यह विशेष शोध विषय स्विट्जरलैंड के प्रतिष्ठित जर्नल्स ‘फ्रंटियर्स इन केमिस्ट्री’ और ‘फ्रंटियर्स इन फिजिक्स’ में प्रकाशित होगा, जो स्वच्छ ऊर्जा और नैनो-मटेरियल्स के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेगा।
इस वैश्विक शोध परियोजना का नेतृत्व डॉ. अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव कर रहे हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों का सहयोग प्राप्त है। संपादक मंडल में प्रो. गेन्नेडी एल. गुत्सेव (फ्लोरिडा एग्रीकल्चर एवं मैकेनिकल यूनिवर्सिटी, अमेरिका), प्रो. वेई-मिंग सुन (फ़ुज़ियान नॉर्मल यूनिवर्सिटी, चीन), प्रो. प्रतीम कुमार चट्टराज (बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा, भारत) और डॉ. फिलिप वेल्कोविच (विनचा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर साइंसेज, बेलग्रेड विश्वविद्यालय, सर्बिया) शामिल हैं।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट का उद्देश्य ‘सुपरएटम्स’ की क्षमताओं को सामने लाना है, जो हाइड्रोजन को सुरक्षित और उच्च घनत्व में संग्रहित करने के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। इस शोध संग्रह में दुनिया भर के उत्कृष्ट शोध कार्यों को शामिल किया जाएगा।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि डीडीयू के वैज्ञानिकों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व करना विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों के साथ यह सहयोग वैश्विक समस्याओं के समाधान में विश्वविद्यालय की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
यह शोध संग्रह हाइड्रोजन को भविष्य के स्वच्छ ईंधन के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसमें सुपरएटॉमिक क्लस्टर्स, विशेष रूप से बोरॉन आधारित संरचनाओं के माध्यम से हाइड्रोजन के सुरक्षित भंडारण की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, कंप्यूटेशनल फिजिक्स और क्वांटम केमिस्ट्री के माध्यम से नए उन्नत पदार्थों की खोज को भी बढ़ावा मिलेगा।

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