होली से पहले भीख मांगो आंदोलन, प्रशासन की चुप्पी पर फूटा जबरदस्त आक्रोश
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में विकास योजनाओं की रीढ़ माने जाने वाले ग्राम रोजगार सेवक अब खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर हो गए हैं। विकासखंड सदर के सैकड़ों ग्राम रोजगार सेवक मंगलवार मंगल को सड़क पर उतर आए और होली से ठीक एक दिन पहले भीख मांगो आंदोलन छेड़ कर प्रशासनिक तंत्र को खुली चुनौती दे डाली।
उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष ब्रह्मानंद द्वारा 03 मार्च 2026 को जारी हस्तलिखित पत्र के बाद यह विरोध खुलकर सामने आया। आरोप है कि पिछले आठ महीनों से मानदेय भुगतान पूरी तरह बंद है। बार-बार गुहार के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो ग्राम रोजगार सेवकों ने विकास खंड सदर से जिला सूचना कार्यालय महराजगंज तक दुकानों पर भिक्षाटन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि वे मनरेगा सहित तमाम सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कराते हैं, गांवों में विकास की गाड़ी खींचते हैं, लेकिन उनके अपने घरों में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। होली जैसे पावन पर्व पर बच्चों के लिए अबीर- गुलाल तक खरीदना दूभर हो गया है।

कई ग्राम रोजगार सेवकों ने भावुक होकर कहा कि बच्चों की फीस बकाया है, परिवार के सदस्य दवाईयों के लिए तरस रहे हैं और सामाजिक सम्मान दांव पर लगा है। पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है कि कई बार संबंधित अधिकारियों और जन-प्रतिनिधियों से संपर्क किया गया, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। आरोप है कि फाइलों को जान- बूझकर लंबित रखकर मामला टाला जा रहा है।
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ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि जब मेहनताना ही न मिले तो सम्मान जनक जीवन कैसे जिया जाए? भीख मांगना उनकी मजबूरी है, शौक नहीं।
आंदोलन को नैतिक आधार देते हुए ग्राम रोजगार सेवकों ने घोषणा की है कि भिक्षाटन से जो भी धनराशि एकत्र होगी, उसे प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा किया जाएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करने के लिए है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कर्मचारी आठ महीने से बिना वेतन कार्य कर रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं हो रही? क्या शासन को जमीनी स्तर पर काम कर रहे इन कर्मियों की हालत का अंदाजा नहीं? होली जैसे प्रमुख पर्व से पहले कर्मचारियों का सड़कों पर उतरना प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।

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इस दौरान इंद्रमणि विश्वकर्मा (जिला महासचिव), संतोष कुमार गुप्ता, धर्मेंद्र, ओमप्रकाश आर्य, रमेश सिंह, अरविंद कुमार, ओम प्रकाश सिंह, सर्वेश कुमार, घनश्याम वर्मा, अंबिका प्रसाद, कमलेश कुमार यादव, जितेंद्र चौहान, चिन्नू प्रसाद, सुरेश प्रसाद, अमरनाथ, रविंद्र कुमार गुप्ता, राजेश तिवारी, दयानंद, चंद्रिका, योगेंद्र साहनी, प्रमोद राय, प्रमोद विश्वकर्मा, अनिरुद्ध, बाबूराम सहित भारी संख्या में ग्राम रोजगार सेवकों ने भिक्षाटन कर आक्रोश जताया।
ग्राम रोजगार सेवकों ने साफ कहा है कि यदि शीघ्र मानदेय भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो जिला मुख्यालय पर धरना- प्रदर्शन की रणनीति बनाई जाएगी।अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं—क्या संवेदनशीलता दिखाते हुए लंबित मानदेय जारी किया जाएगा या फिर विकास योजनाओं की धुरी माने जाने वाले कर्मियों को सड़कों पर ही अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ेगी?
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