महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रामीण विकास की प्रमुख योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को जमीनी स्तर पर लागू करने वाले ग्राम रोजगार सेवक खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। जनपद के सैकड़ों कर्मियों का आरोप है कि जुलाई माह से अब तक उनका मानदेय लंबित है। सात माह से भुगतान न होने के कारण उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है।
काम पूरा, भुगतान शून्य
ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि वे मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने, जॉब कार्ड सत्यापन, मास्टर रोल संधारण, कार्यस्थल निरीक्षण और ऑनलाइन फीडिंग जैसे अहम दायित्व निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिल रहा।
एक रोजगार सेवक ने कहा, “सरकार हमसे हर लक्ष्य समय पर पूरा कराती है, लेकिन भुगतान के समय फाइलें अटक जाती हैं। बच्चों की फीस, राशन और दवाइयों का खर्च कैसे उठाएं?”
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त्योहार पर बढ़ी चिंता
होली जैसे बड़े पर्व पर भी जेब खाली होने से उनके घरों की खुशियां फीकी पड़ती दिख रही हैं। बढ़ती महंगाई के बीच कई कर्मियों ने उधार लेकर घर चलाने की बात कही है।
रोजगार सेवकों का आरोप है कि अन्य विभागों के संविदा कर्मियों का वेतन नियमित जारी हो रहा है, लेकिन मनरेगा कर्मियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। कई बार ज्ञापन देने के बावजूद समाधान नहीं हुआ।
आंदोलन की चेतावनी
कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वे सामूहिक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि सम्मान और अधिकार के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
इस संबंध में डीसी मनरेगा गौरवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रायः प्रमुख त्योहारों पर वेतन जारी किया जाता है। मानदेय आने की संभावना है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
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