महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर जिले में असमंजस की स्थिति गहराती जा रही है। आरक्षण सूची जारी न होने और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया मार्च के अंत तक बढ़ जाने से मौजूदा प्रधानों और संभावित उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई है।
समय पर होंगे चुनाव या टलेंगे?
वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव की अधिसूचना मार्च में जारी हुई थी और मई तक प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। उसी आधार पर चुने गए प्रधानों और ग्राम पंचायत सदस्यों का पांच वर्षीय कार्यकाल जून 2026 में समाप्त होगा।
नियमों के अनुसार यदि समय पर चुनाव नहीं हो पाता है तो पंचायत का संचालन प्रशासक के हाथों में चला जाता है। ऐसे में मौजूदा प्रधानों के अधिकार स्वतः समाप्त हो जाएंगे, हालांकि कई जनप्रतिनिधियों में कार्यकाल बढ़ने की उम्मीद बनी हुई है।
आरक्षण सूची पर अटका मामला
प्रशासन ने परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन पिछड़ा वर्ग आरक्षण की अंतिम रिपोर्ट तैयार न होने से आरक्षण सूची जारी नहीं हो सकी है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट तैयार होने में दो से चार माह का समय लग सकता है। इसके बाद ही ग्राम और वार्डवार आरक्षण घोषित होगा और चुनाव अधिसूचना का रास्ता साफ होगा।
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एसआईआर से प्रभावित तैयारियां
बीएलओ फिलहाल मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में व्यस्त हैं, जो 28 मार्च तक चलेगा। इससे चुनावी तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में अप्रैल से पहले अधिसूचना जारी होना मुश्किल माना जा रहा है।
दावेदारों की रणनीति
आरक्षण और चुनाव तिथि स्पष्ट न होने से संभावित उम्मीदवार खुलकर प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया पोस्ट, बैनर और होर्डिंग के जरिए सक्रियता दिखाई जा रही है। गांवों में राजनीतिक चर्चा तेज है, लेकिन आधिकारिक घोषणा का इंतजार बना हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आरक्षण और अधिसूचना में और देरी होती है तो जून के बाद ग्राम पंचायतों में प्रशासक व्यवस्था लागू होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पंचायत चुनाव को लेकर संशय बरकरार है।
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