हजारीबाग/रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री डॉ हरीश बुद्धू की बेटी सचिता बुद्धू गुरुवार को अपने पति अजय बुद्धू के साथ झारखंड पहुंचीं। सुबह 8:15 बजे दोनों रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उतरे, जहां उनके पैतृक क्षेत्र हजारीबाग जिले के बड़कागांव और आसपास के गांवों से पहुंचे लोगों ने पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया। फूल-मालाओं, पारंपरिक सम्मान और आत्मीय अभिवादन के बीच एयरपोर्ट पर उत्साह का माहौल देखने को मिला।
एयरपोर्ट पर स्वागत करने वालों में बड़कागांव प्रखंड के सिमरातरी गांव के कई गणमान्य लोग शामिल थे। प्रमुख रूप से राम लखन महतो, दिलीप कुमार महतो, कुशवाहा समाज के अध्यक्ष सोहनलाल मेहता, ग्राम अध्यक्ष केदार प्रसाद दांगी, ग्राम उपाध्यक्ष दिलीप कुमार, ग्राम सचिव कमल कुमार, ग्राम कोषाध्यक्ष सिकंदर महतो, अजीत कुमार राम, लखन महतो, ईश्वरी महतो, कैलाश महतो, दौलत महतो, दीपक महतो, अशोक महतो, सुरेंद्र प्रसाद दांगी, अरुण महतो, रामू महतो, तिलनाथ महतो और कंचन महतो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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सचिता बुद्धू अपने पैतृक गांव सिमरातरी, जो बड़कागांव प्रखंड के नयाटांड़ पंचायत में स्थित है, जा रही हैं। यह गांव हजारीबाग जिला मुख्यालय से लगभग 36 किलोमीटर दूर है। पूर्व उप प्रधानमंत्री डॉ हरीश बुद्धू की बेटी के आगमन की खबर से पूरे क्षेत्र में खुशी और गौरव का वातावरण है। ग्रामीणों का कहना है कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है कि उनके गांव की बेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित परिवार से जुड़ी होने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़ने गांव आ रही हैं।
सिमरातरी निवासी और सचिता बुद्धू के चचेरे भाई दिलीप कुमार महतो ने बताया कि यह यात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सचिता बुद्धू और उनके पति अजय बुद्धू केवल अपने परिवारजनों और रिश्तेदारों से मिलने आ रहे हैं। गांव के लोग लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रहे थे। यह दौरा भावनात्मक जुड़ाव और पारिवारिक मिलन का प्रतीक है।
गौरतलब है कि वर्ष 1991 में मॉरीशस के तत्कालीन उप प्रधानमंत्री डॉ हरीश बुद्धू अपनी पत्नी डॉ सरिता बुद्धू के साथ अपने पिता की जन्मभूमि सिमरातरी पहुंचे थे। उस समय भी गांव में ऐतिहासिक स्वागत हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार, उस यात्रा ने गांव के शिक्षा और सामाजिक विकास को नई दिशा दी।
कुशवाहा समाज के अध्यक्ष सोहनलाल मेहता के अनुसार, डॉ हरीश बुद्धू ने 1991 में हजारीबाग में एक ट्रस्ट का गठन किया था, जिसका उद्देश्य सामाजिक और शैक्षणिक विकास को बढ़ावा देना था। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा पर जोर दिया। उनकी प्रेरणा से तत्कालीन प्रमुख गुरुदयाल महतो ने बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना में अहम भूमिका निभाई, जिससे क्षेत्र में लड़कियों की शिक्षा को नया आयाम मिला।
पूर्व उप प्रधानमंत्री की बेटी-दामाद का यह दौरा आज भी गांव और प्रवासी भारतीयों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव और आत्मीय संबंधों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। सिमरातरी गांव में उनके स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। यह यात्रा केवल एक पारिवारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।
