Tuesday, February 10, 2026
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10 फ़रवरी को हुए प्रमुख निधन: इतिहास के पन्नों में दर्ज अमर नाम

भारतीय इतिहास और साहित्य जगत में 10 फरवरी को हुए निधन कई ऐसे महान व्यक्तित्वों से जुड़े हैं, जिन्होंने अपने विचार, लेखनी और शासन से समाज को नई दिशा दी। आज का इतिहास 10 फरवरी केवल तारीख नहीं, बल्कि स्मृति और विचार का संगम है।
इस लेख में हम 10 फरवरी प्रमुख निधन के अंतर्गत तीन विशिष्ट व्यक्तित्वों—हिंदी कवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’, साहित्यकार गुलशेर ख़ाँ शानी, और मध्य भारत के शासक राजा बख्तावर सिंह—के जीवन, योगदान और ऐतिहासिक महत्व को विस्तार से समझते हैं।
✍️ सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ (1936–1975)
हिंदी कविता में जनप्रतिरोध की आवाज
10 फरवरी को हुए निधन में हिंदी साहित्य का सबसे सशक्त नाम सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ का आता है। वे आधुनिक हिंदी कविता में आक्रोश, यथार्थ और सत्ता-विरोध की स्पष्ट आवाज़ थे।
धूमिल की कविताएँ आम आदमी के दर्द, राजनीतिक पाखंड और सामाजिक विसंगतियों को निर्भीक शब्द देती हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना “संसद से सड़क तक” आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
10 फरवरी इतिहास भारत में धूमिल को जनकवि के रूप में याद किया जाता है।

ये भी पढ़ें – 9 फरवरी को हुए निधन: यादें, योगदान और विरासत

📚 गुलशेर ख़ाँ शानी (1933–1995)
हिंदी कथा साहित्य के संवेदनशील शिल्पकार
10 फरवरी प्रमुख निधन में गुलशेर ख़ाँ शानी का स्थान विशेष है। वे हिंदी कथा साहित्य के उन लेखकों में थे, जिन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक द्वंद्व को गहराई से उकेरा।
उनकी कहानियाँ समाज के हाशिए पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा, अकेलेपन और पहचान के संघर्ष को अभिव्यक्त करती हैं।
“काला जल” और “साँप और सीढ़ी” जैसी रचनाएँ उन्हें विशिष्ट पहचान देती हैं।
आज का इतिहास 10 फरवरी उन्हें एक गंभीर और प्रतिबद्ध साहित्यकार के रूप में स्मरण करता है।
🏰 राजा बख्तावर सिंह (निधन: 1858)
अमझेरा रियासत के साहसी शासक
10 फरवरी को हुए निधन में राजा बख्तावर सिंह का नाम भारतीय रियासती इतिहास से जुड़ा है। वे मध्य प्रदेश के धार जिले के अमझेरा कस्बे के शासक थे।
1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौर में उनका शासनकाल रहा। राजनीतिक उथल-पुथल के बीच उन्होंने अपनी रियासत और परंपराओं की रक्षा का प्रयास किया।
10 फरवरी इतिहास भारत में उनका उल्लेख स्थानीय स्वशासन और प्रतिरोध की भावना के प्रतीक के रूप में मिलता है।
🔍 Why This Day Matters
10 फरवरी को हुए प्रमुख निधन हमें यह याद दिलाते हैं कि विचार, साहित्य और साहस समय से परे होते हैं। इन व्यक्तित्वों की विरासत आज भी समाज, साहित्य और इतिहास को दिशा देती है।
⚠️ Disclaimer
हम किसी भी प्रकार के 100 प्रतिशत प्रमाणित दावा नहीं करते।
यह सामग्री उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों, साहित्यिक संदर्भों और गहन छानबीन के आधार पर तैयार की गई है। फिर भी किसी प्रकार की त्रुटि के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।

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