Tuesday, February 10, 2026
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खामोशी की ताकत: आकाश सैनी का एशिया कप तक सफर

खामोशी से इतिहास रचने वाला बेटा: मूकबधिर आकाश सैनी का भारतीय डेफ टीम एशिया कप के लिए चयन


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।यह खबर सिर्फ एक खिलाड़ी के चयन की नहीं है, यह कहानी है उस जज़्बे की जिसने खामोशी को ताकत बना दिया। कुशीनगर नगर पालिका क्षेत्र के पकवा इनार निवासी मूकबधिर आकाश सैनी का भारतीय डेफ टीम एशिया कप के लिए चयन हुआ है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे जिले और देश के लिए गर्व का विषय है। आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे—और यही बात इस कहानी को ऐतिहासिक बनाती है।
जन्म से मूकबधिर होने के बावजूद आकाश सैनी ने कभी अपनी स्थिति को कमजोरी नहीं माना। जहां बहुत से लोग शब्दों के सहारे आगे बढ़ते हैं, वहीं आकाश ने अनुशासन, मेहनत और निरंतर अभ्यास से अपनी पहचान बनाई। आज जब आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप के लिए चुने गए हैं, तो यह साबित हो गया है कि सीमाएं परिस्थितियों की होती हैं, सपनों की नहीं।

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पिता का संबल, बेटे का सपना
आकाश सैनी, नंदलाल सैनी के पुत्र हैं। उनके संघर्ष भरे सफर में पिता नंदलाल सैनी एक मजबूत ढाल बनकर हर मोड़ पर साथ खड़े रहे। सीमित संसाधन, आर्थिक कठिनाइयां और सामाजिक उपेक्षा—इन सबके बीच पिता ने बेटे के सपनों को अपना सपना बना लिया। खेल किट से लेकर अभ्यास तक, हर ज़रूरत को पूरा करने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। यही वजह है कि आज आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप के मंच तक पहुंचे हैं।
मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास
आकाश की दिनचर्या अनुशासन का उदाहरण रही है। नियमित अभ्यास, फिटनेस पर फोकस और कोचों की सलाह को गंभीरता से अपनाना—यही उनकी सफलता की कुंजी बनी। खेल के मैदान पर उनका फोकस और प्रदर्शन बताता है कि प्रतिभा को बस सही मंच और समर्थन चाहिए। आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप के लिए चुने गए हैं, क्योंकि उन्होंने मैदान पर खुद को साबित किया है।

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इशारों में भावनाएं, आंखों में गर्व
एक छोटे से साक्षात्कार में आकाश ने इशारों में अपनी भावनाएं साझा कीं। भारतीय टीम की जर्सी पहनना उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना रहा है। उन्होंने अपने पिता की ओर देखते हुए धन्यवाद जताया—वह पल भावनाओं से भरा था। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। यह दृश्य बताता है कि जीत सिर्फ पदक की नहीं होती, रिश्तों और विश्वास की भी होती है।
समाज के लिए प्रेरणा
आकाश सैनी का चयन समाज के लिए एक मजबूत संदेश है—कमज़ोरी अभिशाप नहीं, अगर उसे ताकत में बदला जाए। वे कहते हैं कि भारतीय डेफ टीम एशिया कप में खेलकर वे हर उस मूकबधिर बच्चे को प्रेरित करना चाहते हैं, जो चुपचाप सपने देखता है। उनका मानना है कि प्रतिभा को सहानुभूति नहीं, अवसर चाहिए।

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जिले में जश्न का माहौल
आकाश सैनी की इस उपलब्धि से पकवा इनार गांव समेत पूरे कुशीनगर जिले में खुशी की लहर है। लोगों ने मिठाइयां बांटीं, शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह जीत गांव की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय गौरव बन गई है। आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप में उतरेंगे—यह खबर युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

डेफ स्पोर्ट्स का बढ़ता सम्मान

भारत में डेफ स्पोर्ट्स को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। आकाश सैनी जैसे खिलाड़ी इस बदलाव के चेहरे हैं। उनकी सफलता बताती है कि समावेशी खेल व्यवस्था और निरंतर समर्थन से असाधारण परिणाम मिल सकते हैं। आकाश सैनी भारतीय डेफ टीम एशिया कप में देश का परचम लहराने के लिए तैयार हैं—और पूरा देश उनके साथ है।
आज आकाश सैनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं हैं,
वे उन लाखों मूकबधिर युवाओं की आवाज़ हैं,
जो खामोशी में भी बड़े सपने देखते हैं—और उन्हें सच करने की हिम्मत रखते हैं।

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