देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सरयू नदी में लापता मछुआरे धरमु प्रसाद की तलाश के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे गोताखोर सुरेंद्र साहनी नदी में गोता लगाते समय अचानक गहराई में फंसकर डूबने लगे। मौके पर मौजूद SDRF टीम और स्थानीय लोगों की सूझबूझ से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया, हालांकि उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
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क्या है पूरा मामला
थाना क्षेत्र गौरा निवासी सुरेंद्र साहनी (45), पुत्र मोहन साहनी, सरयू नदी में सोमवार को डूबे धरमु प्रसाद (35), पुत्र स्वर्गीय हरिराम प्रसाद, निवासी परसिया देवार, की तलाश में जुटे थे। तलाश के दौरान सुरेंद्र साहनी नदी के तेज बहाव और गहराई की चपेट में आ गए।
करीब 20 मिनट तक नदी से बाहर न आने पर आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। शोर सुनते ही पास में सर्च ऑपरेशन कर रही SDRF टीम सक्रिय हुई और तत्काल रेस्क्यू कर सुरेंद्र को नदी से बाहर निकाला।
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तत्काल उपचार और रेफर
रेस्क्यू के बाद स्थानीय मछुआरों और पुलिस की मदद से सुरेंद्र साहनी को सीएचसी ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज, देवरिया रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार, समय रहते रेस्क्यू न होता तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।
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SDRF की भूमिका अहम
इस घटना में SDRF की तत्परता निर्णायक साबित हुई। तेज धार और सीमित दृश्यता के बावजूद टीम ने समन्वय के साथ काम करते हुए गोताखोर की जान बचाई। स्थानीय प्रशासन ने भी SDRF के प्रयासों की सराहना की है।
सुरक्षा पर सवाल
सरयू नदी में तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा मानकों पर फिर सवाल खड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण, लाइफ जैकेट और सीमित समय तक गोता जैसे प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन जरूरी है।
