SIR के नाम पर मताधिकार पर डाका! रामपुर कारखाना में 122 वोटरों की काग़ज़ी अनुपस्थिति, फर्जी हस्ताक्षर से नाम काटने का आरोप
गौरव कुशवाहा
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान मतदाता सूची से नाम काटे जाने के कथित खेल ने रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। चिरकिहंवा गांव से सामने आए इस मामले ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 122 मतदाताओं को “अनुपस्थित” दिखाते हुए फॉर्म-7 भरकर उनके मताधिकार पर एकमुश्त प्रहार किया गया।
यह मामला बूथ नंबर-39 से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां कथित तौर पर 122 फॉर्म-7 एक साथ जमा कराए गए। जैसे ही जानकारी सामने आई, गांव में आक्रोश फैल गया। समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और रामपुर कारखाना की पूर्व विधायक फसीहा मंजर गजाला लारी मौके पर पहुंचीं और प्राथमिक विद्यालय परिसर में बीएलओ से जवाब-तलब किया। उनका आरोप है कि जिन मतदाताओं को अनुपस्थित दिखाया गया है, वे सभी अपने पते पर मौजूद हैं।
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू फर्जी हस्ताक्षरों से जुड़ा है। आरोप है कि फॉर्म-7 पर “बिकाऊ” नामक व्यक्ति के हस्ताक्षर दर्शाए गए, जबकि गांव निवासी बिकाऊ ने लिखित रूप में कहा है कि ये हस्ताक्षर उसके नहीं हैं। उसने एफिडेविट देने की बात कही है। इससे दस्तावेजी जालसाजी और संगठित षड्यंत्र की आशंका और गहरी हो गई है।
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पूर्व विधायक गजाला लारी ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया राजनीतिक हस्तक्षेप के तहत कराई गई। उनके अनुसार फॉर्म-7 एक श्रृंखला में होते हुए बीएलओ तक पहुंचे। उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी और भारत निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की बात कही है। उनका कहना है कि मताधिकार से वंचित करना लोकतंत्र पर सीधा हमला है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि रामपुर कारखाना विधानसभा के अन्य बूथों पर भी 100 से 150 मतदाताओं के फॉर्म-7 एक साथ भरकर भेजे गए हैं और बूथ स्तर पर स्वीकार करने का दबाव बनाया गया। यदि यह तथ्य सही साबित होता है तो मामला केवल एक गांव तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र में व्यवस्थित वोट-कटौती की ओर संकेत करता है।
प्रशासन का कहना है कि मामले की औपचारिक जांच शुरू की जा रही है। लेकिन सवाल यही है कि क्या समय रहते जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या फिर SIR के नाम पर मतदाता सूची से खेल चलता रहेगा। यह प्रकरण अब राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुका है।
