बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह ने यूजीसी एक्ट में प्रस्तावित संशोधन को शिक्षा जगत के लिए अत्यंत खतरनाक बताते हुए इसे “काला कानून” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन शिक्षा व्यवस्था में समानता, स्वतंत्रता और स्वायत्तता को कमजोर करने वाला है, जिससे शिक्षक, शिक्षण संस्थान और छात्र—तीनों प्रभावित होंगे।
रामइकबाल सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी कि वर्ष 2026 से इस संशोधन के नाम पर फर्जी मुकदमों की बाढ़ आ सकती है। इससे शिक्षकों में भय का माहौल बनेगा और संस्थानों का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा। उन्होंने आशंका जताई कि इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा और प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं असमंजस और दबाव का शिकार होंगे।
पूर्व विधायक ने कहा कि शिक्षा नीति में किसी भी प्रकार का बदलाव व्यापक विमर्श, शिक्षाविदों की राय और छात्र संगठनों से संवाद के बाद ही होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी एक्ट में प्रस्तावित संशोधन पूरी तरह से एकतरफा है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। न तो शिक्षकों की सहमति ली गई और न ही छात्रों की आवाज सुनी गई।
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इसके साथ ही रामइकबाल सिंह ने प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उस पावन अवसर पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को सम्मानपूर्वक स्नान कराया जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने विवेक के बजाय बल प्रयोग किया, जो निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अंत में उन्होंने सरकार से मांग की कि यूजीसी एक्ट में प्रस्तावित संशोधन को तत्काल वापस लिया जाए और शिक्षा व धर्म जैसे संवेदनशील विषयों पर निर्णय लेते समय गंभीरता और संवेदनशीलता दिखाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस पर विचार नहीं हुआ, तो व्यापक जनविरोध देखने को मिलेगा।
