Wednesday, March 11, 2026
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युवा कलाकारों के हाथों जीवंत होती पारंपरिक कोहबर कला

लोक में कोहबर कला: गोरखपुर के राजकीय बौद्ध संग्रहालय में दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर में शनिवार को “लोक में कोहबर कला” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य पूर्वांचल की पारंपरिक कोहबर कला को संरक्षित करना, उसका दस्तावेजीकरण करना और युवा पीढ़ी को इस समृद्ध लोक विरासत से जोड़ना है।
कार्यशाला में पूर्वांचल के छह जनपदों—गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महाराजगंज, संतकबीर नगर और सिद्धार्थनगर—से आए कुल 30 युवा कलाकार प्रतिभाग कर रहे हैं, जिन्हें कोहबर कला की तकनीकी, सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक बारीकियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान, लखनऊ की सदस्य डॉ. कुमुद सिंह मुख्य अतिथि रहीं। वे इस कार्यशाला की मुख्य प्रशिक्षक भी हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पूर्वांचल क्षेत्र लोक चित्रकला की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध रहा है। कोहबर कला, जो सनातन विवाह संस्कार से जुड़ी एक अमूल्य लोक धरोहर है, आज संरक्षण की मांग कर रही है। इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना और इसके सांस्कृतिक संदेश को समझाना समय की आवश्यकता है।

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बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय, आगरा के ललित कला विभाग की सहायक आचार्य डॉ. विनीता गुप्ता ने कहा कि कोहबर कला के माध्यम से प्रतिभागी विभिन्न मंगलिक प्रतीकों, प्राकृतिक तत्वों और लोक विश्वासों को समझ सकेंगे। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा पारिवारिक स्मृतियों और लोक ज्ञान के आधार पर बनाए गए चित्रों की सराहना की और इसे लोक परंपरा के जीवंत उदाहरण बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उप निदेशक डॉ. यशवंत सिंह राठौड़ ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। कोहबर कला का अध्ययन युवाओं को पूर्वांचल की प्राचीन लोक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से परिचित कराता है।
कार्यशाला के संयोजक एवं संचालक प्रेमनाथ ने बताया कि प्रतिभागी कलाकार कैनवास पर कोहबर कला का सृजन कर रहे हैं, जिससे यह परंपरा आधुनिक संदर्भ में भी जीवंत बनी रहे।

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कार्यशाला का समापन रविवार सायं 4 बजे होगा। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे तथा कार्यशाला में सृजित चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जाएगा। इस अवसर पर गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

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