Wednesday, March 11, 2026
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गुरु ही जीवन का पथप्रदर्शक, राम कथा में संत किशोरी शरण जी महाराज का उद्बोधन

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। गुरु के बिना मनुष्य माया रूपी भवसागर से पार नहीं हो सकता। गुरु ही ज्ञान के माध्यम से अज्ञान रूपी अंधकार को समाप्त कर जीवन को सही दिशा देता है। यह विचार अयोध्या से पधारे मानस मर्मज्ञ किशोरी शरण जी महाराज ने मऊ नगर की सिंधी कॉलोनी स्थित दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर में आयोजित राम कथा महायज्ञ के दौरान व्यक्त किए।

राम कथा के अंतर्गत गुरु महिमा पर प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु का होना सबसे आवश्यक है। जीवन के प्रथम गुरु माता–पिता होते हैं, जो संस्कार और मर्यादा का बीज बोते हैं। शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, शंकर और परम ब्रह्म परमात्मा के समान माना गया है, क्योंकि गुरु ही मनुष्य को सत्य के मार्ग पर ले जाता है।

कथा के प्रारंभ से पूर्व हनुमत कृपा सेवा समिति के सुंदरकाण्ड पाठ परिवार तथा हनुमान गढ़ी मंदिर समिति के सदस्यों द्वारा संगीतमय सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन किया गया। भक्तिमय वातावरण में श्रोता भजनों पर भाव-विभोर होकर झूमते रहे।

कार्यक्रम में मंदिर के प्रधान सेवक विवेकानंद पाण्डेय और कार्यक्रम व्यवस्थापक छवि श्याम शर्मा ने आगंतुकों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। चंद्रशेखर अग्रवाल, कैलाश चंद जायसवाल, रामप्यारे गुप्ता, बबलू शाही, शिवधर यादव सहित अन्य श्रद्धालुओं ने व्यास जी की आरती उतारी।

इस अवसर पर राजकुमार खंडेलवाल, डॉ. रामगोपाल गुप्त, रवि प्रकाश बरनवाल, अरुण कुमार, आर.के. सिंह, सुनील चौबे, रिंकू मिश्रा, अनिल शर्मा, तरुण कुमार, ओम प्रकाश प्रजापति, विजय कुमार, पंकज राजभर, मनोज तिवारी, अनुपम पाण्डेय, अर्जुन राजभर, आशीष सिंह, मोतीलाल विश्वकर्मा, अजय मिश्र, बब्बन सिंह, किशुन जी बरनवाल, देवेंद्र मोहन सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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