पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पटना के एक निजी गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। घटना के चार दिन बाद सामने आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसके बाद पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को सेकेंड ओपिनियन के लिए पटना एम्स भेजने का निर्णय लिया गया है, ताकि किसी भी कानूनी या तकनीकी त्रुटि की गुंजाइश न रहे।
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पुलिस का कहना है कि जांच हर पहलू से की जा रही है। सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए हॉस्टल के वार्डन मनीष रंजन को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को इनपुट मिला था कि हॉस्टल परिसर के भीतर साक्ष्यों को प्रभावित किया जा सकता है। इसी के तहत यह कार्रवाई की गई। इसके अलावा, छात्रा का इलाज करने वाले सभी डॉक्टरों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
जांच का दायरा अब पटना तक सीमित नहीं रहा। पुलिस टीम पटना से जहानाबाद तक विभिन्न एंगल से जांच कर रही है। अब तक 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है। छात्रा जिन-जिन रास्तों से गुजरी थी, उन सभी रूट्स का डिजिटल साक्ष्य एकत्र किया गया है। पुलिस का दावा है कि किसी भी संभावित कड़ी को छोड़ा नहीं जाएगा।
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वहीं, मृत छात्रा के पिता ने हॉस्टल से जुड़े कुछ लोगों पर दुष्कर्म के बाद हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के बाद से हॉस्टल का मुख्य गेट बंद है, ताला लटका हुआ है और सभी छात्राएं हॉस्टल खाली कर चुकी हैं। पूरे इलाके में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। छात्राओं और स्थानीय लोगों में भय इतना है कि वे पुलिस के सामने बयान देने से भी कतरा रहे हैं।
घटना के बाद शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बाहर भारी हंगामा हुआ। कुछ नकाबपोश लोगों ने पत्थरबाजी और आगजनी की, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। पुलिस ने इस तोड़फोड़ और हिंसा के मामले में अलग से एफआईआर दर्ज की है। इससे पहले, छात्रा के परिजनों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज भी हुआ था, जिसने हालात को और भड़का दिया।
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पुलिस के अनुसार, छात्रा 5 जनवरी को घर से हॉस्टल लौटी थी। 6 जनवरी की रात उसने अन्य छात्राओं के साथ भोजन किया और फिर अपने कमरे में चली गई। काफी देर तक बाहर न आने पर हॉस्टल स्टाफ को शक हुआ। दरवाजा तोड़ने पर वह बेहोशी की हालत में मिली, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शुरुआती जांच में डॉक्टरों ने बाहरी चोटों से इनकार किया था, लेकिन अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था का, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। समाज के लिए यह एक चेतावनी है कि शिक्षा के नाम पर रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
