पंचांग 16 जनवरी 2026 | आज का हिंदू पंचांग, शुभ–अशुभ मुहूर्त, यात्रा दिशा, व्रत व योग,आज का पंचांग – शुक्रवार, 16 जनवरी 2026
आज माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि है। दिन मास शिवरात्रि और प्रदोष व्रत के कारण विशेष फलदायी माना गया है। चंद्रमा पूरे दिन धनु राशि में और मूल नक्षत्र (गण्डमूल) में रहेगा, इसलिए कुछ कार्यों में विशेष सावधानी आवश्यक है।
तिथि विवरण कृष्ण पक्ष त्रयोदशी – 15 जनवरी 08:16 PM से 16 जनवरी 10:22 PM तक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी – 16 जनवरी 10:22 PM से 18 जनवरी 12:04 AM तक
🌟 नक्षत्र, योग व करण
नक्षत्र – मूल (05:47 AM से 17 जनवरी 08:12 AM तक)
योग – ध्रुव (09:06 PM तक), उसके बाद व्याघात योग
करण –
गर: 09:22 AM तक
वणिज: 10:22 PM तक
विष्टि (भद्रा): 10:22 PM के बाद
🕉️ संवत व मास
विक्रम संवत – 2082 (कालयुक्त)
शक संवत – 1947 (विश्वावसु)
अमांत मास – पौष
पूर्णिमांत मास – माघ
राष्ट्रीय तिथि – पौष 26, 1947
☀️ सूर्य और 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय – 07:14 AM
सूर्यास्त – 05:58 PM
चन्द्रोदय – 05:11 AM
चन्द्रास्त – 03:46 PM
अयन – उत्तरायण
ऋतु – द्रिक: शिशिर | वैदिक: हेमंत
🔴 अशुभ काल (इन समयों में शुभ कार्य न करें)
राहुकाल – 11:16 AM से 12:36 PM
यमगण्ड – 03:17 PM से 04:38 PM
कुलिक काल – 08:34 AM से 09:55 AM
दुर्मुहूर्त –
09:23 AM – 10:06 AM
12:58 PM – 01:40 PM
वर्ज्यम् –
06:25 AM – 08:11 AM
02:35 PM – 04:21 PM
🟢 शुभ काल (महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उत्तम)
ब्रह्म मुहूर्त – 05:37 AM – 06:25 AM
अभिजीत मुहूर्त – 12:15 PM – 12:58 PM
अमृत काल – 01:13 AM – 02:59 AM
आनन्दादि योग – सुस्थिर
सर्वार्थसिद्धि योग – ❌ आज नहीं है
♈ सूर्य व चंद्र राशि
सूर्य राशि – मकर
चंद्र राशि – धनु (पूरा दिन–रात)
🚩 चंद्रबल व ताराबल
चंद्रबल (17/01/26 सुबह 07:14 तक) –
मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुंभ, मीन
ताराबल (17/01/26 सुबह 07:14 तक) –
भरणी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व/उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्व/उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती
🧭 यात्रा दिशा विचार (दिशा शूल)
आज किस दिशा की यात्रा वर्जित?
शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा अशुभ मानी जाती है।
यदि यात्रा अनिवार्य हो तो क्या करें?
गुड़ या दही खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
किस दिशा में यात्रा लाभकारी?
पूर्व और उत्तर दिशा की यात्रा से लाभ, सफलता और कार्यसिद्धि के योग बनते हैं।
🛕 आज के व्रत–पर्व का महत्व
मास शिवरात्रि – भगवान शिव की उपासना, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण से मनोकामना पूर्ति।प्रदोष व्रत – प्रदोष काल में शिव पूजन से रोग, ऋण और संकटों से मुक्ति।
📌 नोट– इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए ‘राष्ट्र की परम्परा’ जिम्मेदार नहीं होगा। कृपया किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व योग्य विद्वान या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।
