देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।समाजवादी पार्टी के युवा नेता दिव्यांश श्रीवास्तव ने भाजपा की राष्ट्रवाद की राजनीति पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “छद्म राष्ट्रवाद” करार दिया है। उन्होंने कहा कि हालिया रिपोर्टिंग ने भाजपा के उस दोहरे चरित्र को उजागर कर दिया है, जिसमें सत्ता के हित में राष्ट्रवाद की परिभाषा बदली जाती है और विपक्ष को बदनाम करने के लिए उसी राष्ट्रवाद को हथियार बना लिया जाता है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि जब केंद्र की सत्ता चीन सहित अन्य देशों से राजनीतिक या आर्थिक समझौते करती है, तो उसे कूटनीति का नाम दिया जाता है, लेकिन वही नीति यदि विपक्ष अपनाए तो उसे देशद्रोह कहकर जनता के सामने पेश किया जाता है। यह विरोधाभास भाजपा की मंशा और मानसिकता को साफ तौर पर उजागर करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लिए देशभक्ति कोई नैतिक मूल्य नहीं, बल्कि सत्ता को बचाए रखने और सवाल पूछने वालों को डराने का जरिया बन चुकी है। “राष्ट्रहित” शब्द का इस्तेमाल केवल भाषणों और प्रचार तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी सच्चाई इससे कोसों दूर है।
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सपा नेता ने कहा कि स्वदेशी की बात करने वाली सरकार आज स्वयं विदेशी प्रभाव और पूंजी के दबाव में काम कर रही है। इससे पार्टी के अपने कार्यकर्ता और समर्थक भी भ्रम और असंतोष की स्थिति में हैं। उन्होंने इसे जनता के साथ विश्वासघात बताया।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए भाजपा देशभक्ति का चोला पहन लेती है और विपक्ष की निष्ठा पर सवाल खड़े करती है। यह वही राजनीति है, जिसे आम बोलचाल में “रंगे सियार” की संज्ञा दी जाती है—जो बाहर से कुछ और, भीतर से कुछ और होती है।
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उन्होंने दावा किया कि अब जनता पहले से अधिक जागरूक है और सत्ता के अहंकार में डूबे लोगों की सच्चाई को समझने लगी है। लोकतंत्र में सवाल पूछना देशद्रोह नहीं, बल्कि नागरिक का अधिकार है। राष्ट्रहित का फैसला भाषणों से नहीं, बल्कि ईमानदार नीतियों और पारदर्शी कार्यप्रणाली से होता है।
सपा नेता ने कहा कि आने वाले समय में जनता इस दोहरी राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
