10 जनवरी के ऐतिहासिक निधन: जब भारत और विश्व ने खोए अपने महान सितारे
भारत और विश्व के इतिहास में 10 जनवरी एक ऐसी तिथि है, जब कई महान व्यक्तित्वों ने इस दुनिया को अलविदा कहा। इन विभूतियों ने कला, साहित्य, राजनीति और न्याय के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। आइए जानते हैं 10 जनवरी को हुए प्रमुख निधन और उनके जीवन, योगदान व ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तार से।
नाडिया (Nadia) – भारतीय सिनेमा की पहली एक्शन हीरोइन
निधन: 10 जनवरी 1996
नाडिया, जिनका वास्तविक नाम मैरी एन इवांस था, का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ था, लेकिन उन्होंने भारत आकर हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी। वह भारतीय फिल्मों की पहली महिला स्टंट कलाकार और एक्शन हीरोइन मानी जाती हैं। 1930–40 के दशक में उन्होंने ‘हंटरवाली’, ‘डायमंड क्वीन’ और ‘जंगल प्रिंसेस’ जैसी फिल्मों से अपार लोकप्रियता हासिल की। उस दौर में जब महिलाएं परदे पर सीमित भूमिकाओं तक सिमटी थीं, नाडिया ने तलवारबाजी, घुड़सवारी और साहसिक स्टंट कर समाज की सोच को चुनौती दी। भारतीय सिनेमा में नारी सशक्तिकरण की नींव रखने में उनका योगदान ऐतिहासिक माना जाता है।
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गिरिजाकुमार माथुर – आधुनिक हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर
निधन: 10 जनवरी 1994
गिरिजाकुमार माथुर का जन्म राजस्थान के अजमेर जिले में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि, नाटककार और आलोचक थे। नई कविता आंदोलन के महत्वपूर्ण स्तंभों में गिने जाने वाले माथुर की रचनाओं में मानवीय संवेदना, सामाजिक यथार्थ और आधुनिक चेतना स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी कविताओं में भाषा की सादगी और विचारों की गहराई का सुंदर समन्वय मिलता है। ‘मैं वक्त के सामने’ और ‘धूप के धुएँ’ जैसे काव्य संग्रह उन्हें साहित्य जगत में अमर बनाते हैं। साहित्य के माध्यम से समाज को जागरूक करना उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य रहा।
सम्पूर्णानंद – स्वतंत्र भारत के विचारशील राजनेता
निधन: 10 जनवरी 1969
सम्पूर्णानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हुआ था। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, विद्वान लेखक और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा बाद में राज्यपाल रहे। गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित सम्पूर्णानंद ने राजनीति को सेवा का माध्यम माना। उन्होंने शिक्षा, भाषा और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्कृत और हिंदी के विद्वान होने के कारण वे लेखन में भी सक्रिय रहे। उनका योगदान भारतीय लोकतंत्र को नैतिक और बौद्धिक आधार देने में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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राधाबिनोद पाल – न्याय और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रतीक
निधन: 10 जनवरी 1967
राधाबिनोद पाल का जन्म पश्चिम बंगाल के कुश्तिया (वर्तमान बांग्लादेश क्षेत्र) में हुआ था। वे विश्वविख्यात न्यायविद थे और टोक्यो युद्ध अपराध न्यायाधिकरण में भारत के न्यायाधीश रहे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापानी नेताओं को सामूहिक रूप से दोषी ठहराने का विरोध किया और अंतरराष्ट्रीय कानून में निष्पक्षता की मिसाल पेश की। उनका असहमति मत आज भी न्यायिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का मजबूत दस्तावेज माना जाता है। भारत ही नहीं, जापान में भी उन्हें अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
जाब चार्नोक – आधुनिक कोलकाता की नींव रखने वाला व्यक्तित्व
निधन: 10 जनवरी 1692
जाब चार्नोक एक अंग्रेज व्यापारी थे, जिन्हें परंपरागत रूप से कलकत्ता (कोलकाता) का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने 1690 में हुगली नदी के तट पर व्यापारिक केंद्र की स्थापना की, जो आगे चलकर ब्रिटिश भारत की राजधानी बना। हालांकि वे औपनिवेशिक शासन से जुड़े थे, लेकिन उनके द्वारा बसाई गई बस्ती ने भारत के आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास को गहराई से प्रभावित किया। कोलकाता आज भी उनके ऐतिहासिक प्रयासों की जीवित पहचान है।
