महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज का भारत एक ऐसे ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है, जहां नारी की पहचान केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रही। शिक्षा, विज्ञान, खेल, राजनीति, प्रशासन, सेना और उद्योग—हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी प्रतिभा, साहस और नेतृत्व क्षमता से नए भारत की सशक्त तस्वीर गढ़ रही हैं। नारी की यह उड़ान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय प्रगति का सशक्त संकेत है।
कभी अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली नारी आज निर्णय लेने की भूमिका में है। गांव की पंचायत से लेकर संसद तक, कक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। यह परिवर्तन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज की सोच में आए व्यापक बदलाव को दर्शाता है। नया भारत अब सहानुभूति नहीं, सहभागिता और सम्मान की संस्कृति को आगे बढ़ा रहा है।
सरकारी पहल और सामाजिक जागरूकता से सशक्तिकरण
नारी सशक्तिकरण को गति देने में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, स्वयं सहायता समूह, महिला उद्यमिता और कौशल विकास योजनाओं की अहम भूमिका रही है। इन पहलों ने महिलाओं को शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ाया है। ग्रामीण भारत में महिलाएं स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका कार्यक्रमों की धुरी बन चुकी हैं—यह जमीनी स्तर पर सामाजिक क्रांति का प्रमाण है।
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खेल, विज्ञान और सुरक्षा बलों में बेटियों का परचम
खेल के मैदान में बेटियों ने देश का मान बढ़ाया है, तो विज्ञान और तकनीक में महिलाओं ने अपनी बौद्धिक क्षमता का लोहा मनवाया है। अंतरिक्ष, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी यह सिद्ध करती है कि प्रतिभा का कोई लिंग नहीं होता। सेना और पुलिस जैसी चुनौतीपूर्ण सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी ने साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की नई मिसालें कायम की हैं।
चुनौतियां और समाधान
यह सच है कि सामाजिक रूढ़ियां, लैंगिक असमानता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अब भी चुनौती बने हुए हैं। लेकिन कानूनों में सख्ती, शिक्षा का विस्तार और बदलती सामाजिक मानसिकता यह संकेत दे रही है कि नारी की प्रगति को अब रोका नहीं जा सकता। आज की नारी सवाल भी करती है और समाधान भी खोजती है।
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