बिहार में जमीन-फ्लैट रजिस्ट्री का नया युग: फर्जीवाड़े पर लगेगी डिजिटल लगाम
पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार में जमीन और फ्लैट की खरीद-बिक्री से जुड़े वर्षों पुराने विवादों और फर्जीवाड़े पर अब निर्णायक चोट होने वाली है। राज्य सरकार जमीन, मकान, फ्लैट और व्यावसायिक संपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी में है। इस नई व्यवस्था के लागू होते ही रजिस्ट्री केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीन की वास्तविक स्थिति, सटीक लोकेशन और ऑन-स्पॉट तस्वीर भी सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा बनेगी।
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मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे नए सॉफ्टवेयर के तहत किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले उसकी रीयल-टाइम फोटो अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) के साथ सरकारी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। तस्वीर और लोकेशन सत्यापित होने के बाद ही रजिस्ट्री आगे बढ़ सकेगी। इससे जमीन की पहचान स्पष्ट होगी और उसी जमीन को दोबारा बेचने जैसे मामलों पर तुरंत रोक लग सकेगी।
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भू-माफिया पर तकनीकी ब्रेक
अब तक जीपीएस कैमरे से सत्यापन के बावजूद कई बार लोकेशन में एक किलोमीटर तक का अंतर आ जाता था, खासकर ग्रामीण इलाकों में। इससे विवाद की गुंजाइश बनी रहती थी। नया सॉफ्टवेयर इस कमी को दूर करेगा। ऑन-स्पॉट फोटो और सटीक लोकेशन अपलोड होते ही सिस्टम जमीन के मालिकाना हक की जांच करेगा। यदि कोई भू-माफिया या दूसरा व्यक्ति उसी जमीन को दोबारा बेचने की कोशिश करेगा, तो रजिस्ट्री प्रक्रिया वहीं रुक जाएगी।
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खरीदार को मिलेगी पूरी डिजिटल कॉपी
नई तकनीक के तहत रजिस्ट्री पूरी होते ही खरीदार के मोबाइल पर एक एसएमएस लिंक भेजा जाएगा, जिसमें जमीन या फ्लैट की पूरी जानकारी फोटो सहित उपलब्ध होगी। यह डिजिटल दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड के रूप में मान्य होगा। इससे अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने और नकल निकलवाने की परेशानी खत्म हो जाएगी।
दाखिल-खारिज भी होगा तेज
निबंधन विभाग का दावा है कि नई प्रणाली लागू होने के बाद रजिस्ट्री होने वाली करीब 60 प्रतिशत जमीन का दाखिल-खारिज ऑनलाइन हो सकेगा। इससे प्रक्रिया में होने वाली देरी, भ्रष्टाचार और विवादों में बड़ी कमी आएगी। विभाग के अनुसार दरभंगा सहित कई जिलों में इस व्यवस्था का सफल ट्रायल किया जा चुका है। अब इसे पूरे राज्य में लागू करने के लिए कैबिनेट से मंजूरी लेने की तैयारी है।
भरोसेमंद बनेगी जमीन की खरीद-बिक्री
जमीन की वास्तविक तस्वीर और सटीक लोकेशन सिस्टम में दर्ज होने से खरीदार को वही संपत्ति मिलेगी, जिसके लिए उसने भुगतान किया है। गूगल मैप के जरिए लोकेशन जांचना आसान होगा और किसी भी गड़बड़ी की संभावना बेहद कम रह जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बिहार में रियल एस्टेट सेक्टर को नई विश्वसनीयता देगा और आम लोगों का भरोसा मजबूत करेगा।
कुल मिलाकर, बिहार जमीन रजिस्ट्री नया नियम न केवल फर्जी बिक्री और दोहरी रजिस्ट्री पर रोक लगाएगा, बल्कि जमीन की खरीद-बिक्री को सुरक्षित, पारदर्शी और भविष्य-उन्मुख बनाएगा।
