Monday, February 16, 2026
Homeकविताजीवन के सिद्धांत

जीवन के सिद्धांत

सबका जीवन अपनी ही,
पसंद का क़ायल होता है,
अवसर वादिता का जीवन
मिथ्या जीवन कहलाता है।

जीवन के परिवर्तन स्वेच्छा से हों,
बहाने बाज़ी से करना ठीक नहीं,
प्रेरणा का अति महत्व है जीवन में,
हेराफेरी से छल करना ठीक नहीं।

खुद उपयोगी होना बेहतर है,
पर इस्तेमाल होना ठीक नहीं,
सर्वोत्तम बनना तो उत्तम है पर,
अनुचित स्पर्धा करना ठीक नहीं।

अंतर्मन की सुनवाई तो उत्तम है,
दूसरों की रव में बहना ठीक नहीं;
आत्म सम्मान जीवन में उत्तम है,
स्वयं पर तरस दिखाये ठीक नहीं।

जीवन में कभी किसी के
चरित्र, परिपक्वता, मित्रता,
प्रेम व सत्यनिष्ठा की परीक्षा
करनी हो तो धैर्य के साथ करें।

प्रायः हर व्यक्ति अपने आप
में स्वभाव से अच्छा होता है,
ऐसी परीक्षा आख़िरी ज़रूरत
समझ कर ही की जाती है।

जीवन में कभी भी दूसरों
से उम्मीदें रखने के बजाय,
अपनी उम्मीदों पर निर्भर
रहना ही अच्छा होता है।

जब दूसरों से की गयी
हमारी उम्मीद न पूरी हो,
तो इंसान का स्वभाव है,
कि वह दुखी हो जाता है।

पर स्वयं से की गई उम्मीदों के
पूरी होने से, या न भी पूरी होने
से खुद के उत्साह और जिज्ञासा
निश्चय ही दोनो जोश में बढ़ते हैं।

ईश्वर की कृपा से ही किसी
भी माँ की छाती का दूध,
नवजात शिशु के जीवन
का सम्बल बन जाता है।

कवि की काव्य कल्पना
एवं उसकी रचना धर्मिता,
उसी प्रकार ईश्वर प्रदत्त
उपहार ही मानी जाती है।

ये कल्पनायें, ये विचार
कवि के ही अंतर्मन के,
अविरल प्रवाह स्वरूप
ही बहने वाले होते हैं।

यही सोच और ये ही विचार
लेखनीबद्ध हो कवि की कृति
में, आदित्य समाज सुधार
हेतु निरंतर मिलते रहते हैं।

  • डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र
    ‘आदित्य’
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments