Monday, March 2, 2026
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शताब्दी बाद बन रहा है पितृ पक्ष में चन्द्रग्रहण व सूर्यग्रहण का योग – आचार्य अजय शुक्ल

पितृपक्ष 7 सितम्बर से शुरू होकर 21सितम्बर को हो रहा समाप्त

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। इस वर्ष शुरू हो रहे पितृपक्ष में बड़ा ही दुर्लभ संयोग बन रहा है। एक शताब्दी वर्ष बाद पितृपक्ष में चन्द्रग्रहण व सूर्य ग्रहण लग रहा है।उक्त बातें बताते हुए जयराम ब्रम्ह पीठ के आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि पितृपक्ष का प्रारंभ 7 सितम्बर को शुरू हो कर 21 सितम्बर को समाप्त हो रहा है।7 सितम्बर को रात 9 बजकर 57 मिनट पर ग्रहण की शुरूआत होगा मध्य रात्रि 11 बजकर 41 मिनट व मोक्ष रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। ग्रहण का सूतक 9 घण्टे पूर्व ही लग जाएगा जबकि सूर्यग्रहण 21 सितम्बर को लगेगा जो भारत में नही दिखाई देने के कारण कोई सूतक नही लगेगा। पितृपक्ष में ग्रहण की यह घटना पितरों के तर्पण,शांति व कर्मकांड को खास बनाता है। पितृपक्ष में पूर्णिमा श्राद्ध 7 सितम्बर,प्रतिपदा 8 द्वितीया 9,तृतीया 10, चतुर्थी 11,पंचमी व षष्टी 12 ,सप्तमी 13,अष्टमी 14,नवमी 15,दशमी 16,एकादशी 17,द्वादशी 18,त्रयोदशी 19 चतुर्दशी 20 व अमावस्या 21 को है। पितृपक्ष में लोग अपने पितरों को मोक्ष के लिए पिंडदान से लेकर हर प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान विधिविधान से करते हैं। पितरों के शान्ति के लिए तर्पण और श्राद्ध करें ब्राह्मणों को भोजन करावें व दान दें, घर के दक्षिण दिशा में पितरों के नाम दीपक जलाएं, प्रतिदिन पीपल के वृक्ष की पूजा करें व जल अर्पित करें, ॐ श्री पितराय नमः या ॐ श्री पितृभ्य नमः जैसे मन्त्र का जाप पूरे पितृपक्ष में नियमित जाप करें। अगर पितर लोग शांत रहेंगे तो आपका का जीवन सुख सम्पत्ति व वैभव से परिपूर्ण रहेगा।

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