Friday, February 20, 2026
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स्थापत्य, संस्कृति और इतिहास से सजा मध्य प्रदेश का अनमोल धरोहर नगर

बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) – नर्मदा नदी के किनारे बसा बुरहानपुर मध्य भारत का वह ऐतिहासिक नगर है, जिसने सदियों से स्थापत्य, संस्कृति, भक्ति और मुग़ल इतिहास को अपने आंचल में सहेज रखा है। यह नगर न केवल युद्धों और राजवंशों के संघर्ष का गवाह रहा है, बल्कि प्रेम और कला की अनमोल कहानियों का भी केंद्र रहा है। इत्र निर्माण की समृद्ध परंपरा ने इसे सुगंधों की नगरी भी बना दिया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बुरहानपुर की स्थापना 14वीं शताब्दी में फारूक़ी सुल्तानों ने की थी। लेकिन इसका स्वर्णिम अध्याय शुरू हुआ मुग़ल काल में, जब इसे साम्राज्य का प्रमुख सैन्य केंद्र और शाही विश्रामगृह के रूप में विकसित किया गया। मुग़ल शासक अकबर से लेकर औरंगज़ेब तक सभी ने इस नगर का महत्व समझा।
यहीं पर शाहजहाँ की प्रिय पत्नी मुमताज़ महल ने 1631 में अंतिम सांस ली थी। ताजमहल के निर्माण से पहले शाहजहाँ ने बुरहानपुर में ही मुमताज़ का मकबरा बनवाने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में वास्तुकला और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उसे आगरा ले जाया गया।
स्थापत्य और स्मारक
बुरहानपुर का स्थापत्य अपने आप में अनोखा है। यहां की इमारतें मुग़ल कला और दक्कनी शैली का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती हैं।
शाही किला – मुग़ल सम्राटों का प्रमुख किला, जहाँ से सैन्य गतिविधियों का संचालन होता था।
बादशाही किला और दीवान-ए-आम – सत्ता और प्रशासन का केंद्र।
आहुखाना – मुमताज़ महल का अस्थायी समाधि स्थल।
हमाम – शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया शाही स्नानगृह, जिसकी छत पर बनी चित्रकला आज भी अद्भुत प्रतीत होती है।
जामा मस्जिद – फारूक़ी सुल्तानों की भव्य धरोहर, जो आज भी आस्था और स्थापत्य का अद्भुत उदाहरण है।
संस्कृति और परंपरा
बुरहानपुर का सांस्कृतिक जीवन धार्मिक सहिष्णुता और विविधता का प्रतीक है। यहाँ सूफी संतों की दरगाहें और हिंदू मंदिर दोनों ही समान आस्था का केंद्र हैं।

सूफी संत शाह मौला अली दरगाह और अन्य दरगाहों ने इस नगर को आध्यात्मिक केंद्र बनाया।
नर्मदा किनारे स्थित असीरगढ़ किला इतिहासकारों और पर्यटकों दोनों के लिए विशेष आकर्षण है।
इत्र नगरी की पहचान
बुरहानपुर सदियों से इत्र (परफ्यूम) निर्माण की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां के कारीगर प्राकृतिक फूलों और जड़ी-बूटियों से इत्र बनाते हैं, जो दूर-दराज़ तक प्रसिद्ध हैं। बुरहानपुर का “रूह-ए-गुलाब” और “केवड़ा” विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।

पर्यटन के लिहाज़ से महत्व
आज बुरहानपुर न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए बल्कि स्थापत्य कला, संस्कृति और परंपराओं को जानने वालों के लिए भी एक आदर्श पर्यटन स्थल है। यहाँ आकर पर्यटक नर्मदा किनारे की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद भी उठा सकते हैं।
बुरहानपुर एक ऐसा नगर है, जो सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतों में सीमित नहीं है, बल्कि यह अतीत की कहानियों, मुग़ल वैभव, प्रेम की निशानियों और संस्कृति की खुशबू से महकता है। यदि आप भारत की धरोहर को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो बुरहानपुर आपके सफर की सूची में अवश्य होना चाहिए।

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