
नई दिल्ली/तियानजिन। (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात वर्षों बाद अपनी पहली चीन यात्रा पर पहुंचे तो तियानजिन हवाई अड्डे पर उनका स्वागत अभूतपूर्व अंदाज में किया गया। रेड कॉर्पेट बिछाकर चीनी अधिकारियों ने पीएम मोदी का स्वागत किया। इस भव्य स्वागत ने हर हिंदुस्तानी का मन प्रफुल्लित कर दिया।
जापान यात्रा समाप्त कर सीधे चीन पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने पहुंचते ही एक्स पर संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा— “चीन के तियानजिन पहुंच गया हूं। एससीओ शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श और विभिन्न विश्व नेताओं से मुलाकात के लिए उत्सुक हूं।”
मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव गहराता जा रहा है। कुछ ही दिन पहले अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बंद करने से इनकार पर प्रतिक्रिया स्वरूप भारतीय निर्यात पर शुल्क दोगुना करके 50 प्रतिशत कर दिया था। इस कदम ने दोनों देशों के बीच वर्षों से बने रणनीतिक सहयोग पर असर डाला है, जो अब तक तकनीकी साझेदारी और बीजिंग की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने की साझा सोच पर आधारित रहा था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा वॉशिंगटन को सख्त संदेश है कि भारत किसी भी दबाव की राजनीति के आगे झुकेगा नहीं। मोदी की यह यात्रा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।
भारत अब अपने व्यापार और रणनीतिक साझेदारी में विविधता लाने के लिए तेजी से कदम बढ़ा रहा है। चीन पहुंचते ही प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि भारत यदि आंख दिखाने वालों को नजरअंदाज करना जानता है तो मित्रवत देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना भी जानता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस यात्रा के दौरान न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार संतुलन और बहुपक्षीय सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर भी गहन विमर्श होने की संभावना है।